कैली अस्पताल के अल्ट्रासाउंड व पैथोलॉजी विभाग में मरीजों से जमकर हो रही लूटपाट

अजीत मिश्रा (खोजी)
कैली अस्पताल: पूर्वांचल के ‘मिनी पीजीआई’ में बदहाली और भ्रष्टाचार
- सुविधा शुल्क का खेल: जो दे रहा मोटा सुविधा शुल्क, उसका हो रहा तुरंत अल्ट्रासाउंड तथा बिना सुविधा शुल्क वालों को महीने भर बाद की डेट दी जा रही है
- इलाज पर संकट: बिना जांच व अल्ट्रासाउंड मरीजों का कैसे हो इलाज, यह एक अहम प्रश्न बना हुआ है
- लापरवाही की इंतहा: सीनियर सिटीजन व दिव्यांगों को भी व्यवस्था के नाम पर पूरे दिन लाइन में खड़ा रखा जा रहा है
बस्ती जिले का कैली अस्पताल, जिसे कभी ‘पूर्वांचल का मिनी पीजीआई’ कहा जाता था, वर्तमान में गंभीर अनियमितताओं और लूटपाट का केंद्र बन चुका है. 1 अप्रैल 1991 को तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री माता प्रसाद पाण्डेय द्वारा बस्ती के कैली गांव में 28 से 34 एकड़ भूमि पर स्थापित यह विशालकाय अस्पताल आज अपनी व्यवस्थाओं के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है।बस्ती जिले की पहचान और पूर्वांचल को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से 1 अप्रैल 1991 को स्थापित 28 से 34 एकड़ में फैला कैली अस्पताल आज अपनी बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही के कारण चर्चा का विषय बन गया है। कभी ‘मिनी पीजीआई’ कहे जाने वाले इस विशालकाय अस्पताल में वर्तमान में गरीबों और जरूरतमंदों के स्वास्थ्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ और लूटपाट की जा रही है।
अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी विभाग में खुली लूट
अस्पताल के जांच विभागों में भ्रष्टाचार इस हद तक बढ़ चुका है कि मरीजों का शोषण खुलेआम हो रहा है:
- जो मरीज या तीमारदार मोटा ‘सुविधा शुल्क’ या जुगाड़ का सहारा लेते हैं, उनका अल्ट्रासाउंड तुरंत कर दिया जाता है.
- इसके विपरीत, जो गरीब मरीज अतिरिक्त शुल्क नहीं दे पाते, उन्हें अल्ट्रासाउंड के लिए एक-एक महीने बाद की लंबी तारीख थमा दी जाती है.
- बिना समय पर अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी रिपोर्ट मिले, मरीजों का सही इलाज होना असंभव बना हुआ है, जो कि एक गंभीर जांच और प्रशासनिक कार्रवाई का विषय है.
ओपीडी और प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता
- डॉक्टरों के समय पर ओपीडी में न बैठने के कारण अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ जमा हो जाती है.
- इलाज के लिए आने वाले मरीजों को अपनी बारी का इंतजार करने के लिए पूरा-पूरा दिन लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता है.
- व्यवस्था की लचर स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों को भी कोई राहत नहीं दी जाती, बल्कि उन्हें भी पूरे दिन लाइनों में खड़ा रखा जाता है.
निष्कर्ष और आगे की राह
सरकार भले ही जनता को मुफ्त और सुलभ चिकित्सा सेवा देने के बड़े-बड़े दावे करे, लेकिन कैली अस्पताल की यह जमीनी हकीकत उन दावों की पोल खोलती नजर आती है.
क्या जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर कैली अस्पताल की व्यवस्था सुधारने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा?
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