**आगर-मालवा।** कलेक्टर और पत्रकारों के बीच पिछले 22 दिनों से जारी गतिरोध बुधवार शाम समाप्त हो गया। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलेक्टर डॉ. शेर सिंह मीना और पुलिस अधीक्षक दिलीप कुमार सोनी की मौजूदगी में हुई बैठक में प्रशासन और पत्रकारों के बीच संवाद बहाली पर सहमति बनी। पत्रकारों ने बैठक में अपनी सात सूत्रीय मांगें रखीं, जिनमें से प्रमुख मांगों पर कलेक्टर ने सहमति जताते हुए शेष मांगों पर भी जल्द उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया।
बैठक में पत्रकार भवन, जिला स्तरीय त्रैमासिक बैठक आयोजित करने, शासकीय कार्यक्रमों में पत्रकारों को आमंत्रित करने और समय पर तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराने जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठे। चर्चा के बाद दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल में सहमति बनी, जिससे जिले में प्रशासन और मीडिया के बीच बेहतर समन्वय की उम्मीद जगी है।
*संवादहीनता से शुरू हुआ था विवाद*
दरअसल, कलेक्टर के साथ संवादहीनता और पत्रकारों के प्रति कथित उपेक्षापूर्ण रवैये से नाराज पत्रकारों ने पिछले 22 दिनों से जनसंपर्क विभाग के माध्यम से जारी समाचारों का बहिष्कार कर रखा था। मांगों का निराकरण नहीं होने पर पत्रकारों ने चरणबद्ध आंदोलन की तैयारी भी शुरू कर दी थी। इस घटनाक्रम से प्रशासन और मीडिया के बीच संवाद का मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ था।
*प्रदेश नेतृत्व के हस्तक्षेप से निकला रास्ता*
मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष शलभ भदौरिया के हस्तक्षेप के बाद बुधवार को कलेक्टर, एसपी और पत्रकारों के बीच बैठक आयोजित हुई। इसमें संघ के जिलाध्यक्ष अजय झंझी ने पत्रकारों की सात सूत्रीय मांगें प्रमुखता से रखीं। चर्चा के दौरान प्रशासन ने मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया और शेष मुद्दों पर भी शीघ्र निर्णय का भरोसा दिलाया।
22 दिनों से चला आ रहा बहिष्कार और असहमति का दौर समाप्त होने के बाद अब निगाहें प्रशासन के आश्वासनों के क्रियान्वयन पर रहेंगी। बैठक से संवाद बहाली का रास्ता जरूर खुला है, लेकिन सहमति को स्थायी परिणाम में बदलना दोनों पक्षों के बीच नियमित संवाद और समयबद्ध कार्रवाई पर निर्भर करेगा।