जिला रिपोर्टर सुरेश चौहान आगर मालवा मध्य प्रदेश छावनी नाका पर हर 10-15 मिनट में जाम, आखिर कब जागेगा प्रशासन?

मंडी रोड पर शासकीय सांदीपनि स्कूल की बसों की आवाजाही, जनपद पंचायत और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय भी इसी मार्ग पर;
हादसों के खतरे के बीच यातायात व्यवस्था पर सवाल
आगर-मालवा। शहर के इंदौर-कोटा रोड स्थित छावनी नाका चौराहा इन दिनों यातायात अव्यवस्था का केंद्र बनता जा रहा है। कृषि उपज मंडी में बढ़ती वाहनों की आवाजाही के बीच यहां हर 10 से 15 मिनट में जाम लगने की स्थिति बन रही है। शाम के समय चौराहे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। हालात ऐसे हैं कि वाहन चालकों को निकलने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। सवाल यह है कि जब शहर के इस महत्वपूर्ण मार्ग पर रोजाना बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं, तो यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं?
इस मार्ग की अहमियत केवल मंडी तक सीमित नहीं है। मंडी रोड पर स सांदीपनी स्कूल संचालित है, जिसकी बसों की आवाजाही इसी मार्ग से होती है। इसके अलावा जिला जनपद पंचायत और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय भी इसी रोड पर स्थित है। ऐसे में स्कूली बसों, सरकारी कार्यालयों में आने-जाने वाले लोगों, मंडी के वाहनों और आम नागरिकों की आवाजाही के कारण सड़क पर यातायात का दबाव बढ़ जाता है। इसके बावजूद बार-बार जाम की स्थिति बनना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
*स्कूली बसों की आवाजाही, बच्चों की सुरक्षा भी अहम*
सांदीपनी स्कूल की बसों की आवाजाही को देखते हुए इस मार्ग पर यातायात प्रबंधन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। स्कूल के समय बसों का आवागमन, सड़क पर अन्य वाहनों की मौजूदगी और मंडी की गतिविधियां मिलकर यातायात को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में जाम की स्थिति केवल वाहन चालकों की परेशानी नहीं, बल्कि स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही से जुड़ा विषय भी है।
यदि व्यस्त समय में वाहनों का दबाव नियंत्रित नहीं किया जाता, तो बसों और अन्य वाहनों के बीच आवागमन बाधित होने की आशंका बनी रहती है। इसलिए संबंधित विभागों को स्कूल बसों की आवाजाही के समय और मंडी के व्यस्त समय को ध्यान में रखते हुए यातायात प्रबंधन की व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।
*मंडी चालू होते ही सड़कों पर बढ़ता दबाव*
छावनी नाका से कृषि उपज मंडी के साथ गवलीपुरा, कानड़, सारंगपुर और इंदौर कोटा रोड की ओर जाने वाले मार्ग जुड़ते हैं। मंडी में कृषि उपज की आवक बढ़ने पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, मालवाहक वाहनों और अन्य वाहनों की आवाजाही भी बढ़ जाती है। ऐसे में चौराहे पर थोड़ी-सी अव्यवस्था वाहनों की लंबी कतारों का कारण बन जाती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां बार-बार जाम लगने से वाहन चालकों को परेशानी होती है। जनपद पंचायत और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय आने-जाने वाले लोगों को भी इसी मार्ग से गुजरना पड़ता है। व्यस्त चौराहे पर यातायात का सुचारु संचालन नहीं होने से लोगों का समय बर्बाद होता है और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।
*पहले भी हो चुके हैं हादसे, फिर भी स्थायी समाधान का इंतजार*
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि छावनी नाका चौराहे पर पहले भी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कई लोगों की जान जाने की बात सामने आई है। ऐसे में बार-बार लगने वाला जाम और बढ़ता यातायात दबाव चिंता का विषय है। लोगों का सवाल है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही सक्रिय होगा, या समय रहते व्यवस्था सुधारने के लिए कदम उठाए जाएंगे?
*यातायात पुलिस की तैनाती और ठोस कार्ययोजना की जरूरत*
छावनी नाका की समस्या से निपटने के लिए मंडी के व्यस्त समय में यातायात पुलिस की तैनाती, वाहनों की आवाजाही का बेहतर प्रबंधन और चौराहे के यातायात का आकलन जरूरी है। सांदीपनि स्कूल की बसों के आवागमन को ध्यान में रखते हुए भी आवश्यक इंतजाम किए जाने चाहिए। साथ ही, संबंधित विभागों को मिलकर जाम के स्थायी समाधान की दिशा में काम करना होगा।
अब सवाल यही है कि छावनी नाका पर यातायात व्यवस्था सुधारने की पहल कब होगी? मंडी, स्कूल और सरकारी कार्यालयों के कारण महत्वपूर्ण बन चुके इस मार्ग पर लोगों को राहत दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। समय रहते प्रभावी कदम उठाए गए, तो न केवल जाम की समस्या कम हो सकती है, बल्कि संभावित दुर्घटनाओं का खतरा घटाने में भी मदद मिल सकती है।
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