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श्रीराम के संग सीता ने लिए सात फेरे; विवाह के भावुक दृश्यों ने श्रद्धालुओं की आंखें कीं नम

14 Oct 2026, 08:39 AM • Vande Bharat Live TV News
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IMG 20261013 213613महुली, सोनभद्र(राकेश कुमार कन्नौजिया)_दुद्धी ब्लॉक के महुली स्थित श्री राजा बरियार शाह खेल मैदान में चल रही 80वीं रामलीला के छठवें दिन मंगलवार की रात भगवान श्रीराम और जनकनंदिनी माता सीता के विवाह प्रसंग का भव्य, मनोहारी और भावपूर्ण मंचन किया गया। जनकपुर में सजे विवाह मंडप, वैदिक मंत्रोच्चार, मंगलगीत, सिंदूरदान और सात फेरों की रस्मों ने ऐसा समां बांधा कि पूरा रामलीला पंडाल भक्तिरस में डूब गया।

विवाह के दौरान भाई द्वारा लावा मेराने की परंपरा का दृश्य देखकर पंडाल में बैठी कई महिलाओं और श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कहीं श्रद्धालु हाथ जोड़कर प्रभु के विवाहोत्सव के साक्षी बन रहे थे तो कहीं जय श्रीराम के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो रहा था।IMG 20261013 224636

मुख्य अतिथि ने उतारी प्रभु श्रीराम की आरती, पुष्पमाला पहनाकर किया सम्मान
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मकसूद आलम उर्फ गोल्डन, चेयरमैन राष्ट्रीय हायर सेकेंडरी स्कूल पोलवा एवं आदर्श इंटरमीडिएट कॉलेज महुली ने भगवान श्रीराम की आरती उतारकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।IMG 20261013 231441 रामलीला समिति के अध्यक्ष अरविंद जायसवाल एवं उपाध्यक्ष वीरेंद्र कुमार कन्नौजिया ने मुख्य अतिथि को पुष्पमाला पहनाकर स्वागत एवं सम्मान किया।

इसके बाद मंच पर विवाह प्रसंग की शुरुआत हुई और दर्शक भगवान श्रीराम तथा माता सीता के दिव्य विवाह की लीला देखने में तल्लीन हो गए। धनुष यज्ञ में श्रीराम ने तोड़ा शिवधनुष, सीता ने पहनाई वरमाला
रामलीला में दिखाया गया कि मिथिला के राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के स्वयंवर के लिए भगवान शिव के दिव्य धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने की शर्त रखी थी।IMG 20261013 231308

स्वयंवर में देश-विदेश के अनेक राजा और महाराजा पहुंचे, लेकिन कोई भी धनुष को हिला तक नहीं सका। राजाओं की असफलता देखकर राजा जनक निराश हो उठे।

तभी गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम आगे बढ़े। उन्होंने सहज भाव से शिवधनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास करते ही धनुष टूट गया।

धनुष टूटने की गूंज के साथ पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। इसके बाद माता सीता ने भगवान श्रीराम के गले में वरमाला डालकर उन्हें अपने जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया।

इस दृश्य पर श्रद्धालुओं ने करतल ध्वनि के साथ जयकारे लगाए। परशुराम के आगमन और लक्ष्मण-परशुराम संवाद ने बांधा समां
शिवधनुष टूटने की सूचना मिलते ही भगवान परशुराम का आगमन हुआ।IMG 20261013 231308

क्रोधित परशुराम और तेजस्वी लक्ष्मण के बीच हुए संवाद ने रामलीला मंचन में रोमांच भर दिया। लक्ष्मण के तर्कपूर्ण और व्यंग्यपूर्ण उत्तरों तथा परशुराम के क्रोधपूर्ण संवादों ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया।

वहीं, भगवान श्रीराम ने विनम्रता और धैर्य का परिचय देते हुए स्थिति को संभाला। इस प्रसंग ने दर्शकों को मर्यादा, संयम और विनम्रता का संदेश दिया।

अयोध्या से मिथिला पहुंची बारात, मंगलगीतों के बीच संपन्न हुआ विवाह
इसके बाद अयोध्या में श्रीराम-सीता विवाह की सूचना पहुंचने, राजा दशरथ की सहमति और विवाह की तैयारियों का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। अयोध्या से बारात के मिथिला पहुंचने पर राजा जनक के परिवार की ओर से बारातियों का स्वागत किया गया।

विवाह मंडप को आकर्षक ढंग से सजाया गया और मंगलगीतों के बीच विवाह की रस्में आगे बढ़ीं। मंच पर भगवान श्रीराम और माता सीता को विवाह मंडप में विराजमान देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह की रस्मों का मंचन हुआ। सिंदूरदान और सात फेरों के दृश्य ने पूरे वातावरण को भावनात्मक बना दिया।

भाई द्वारा लावा मेराने की परंपरा ने विवाह संस्कार की आत्मीयता और पारिवारिक रिश्तों की महत्ता को जीवंत कर दिया। इस दृश्य को देखकर पंडाल में बैठी कई महिलाओं की आंखें छलक उठीं।

श्रद्धालुओं के लिए यह केवल रामलीला का मंचन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पारिवारिक परंपराओं और धार्मिक आस्था का सजीव अनुभव बन गया। प्रभु श्रीराम-लक्ष्मण को भोजन कराने के लिए श्रद्धालुओं ने लगाए भाव
विवाहोत्सव के दौरान भोजन की परंपरा का दृश्य भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहा।

भगवान श्रीराम और लक्ष्मण जब भोजन करने बैठे तो दर्शक दीर्घा में मौजूद माताओं ने उन्हें मनाने के लिए श्रद्धापूर्वक कुछ मुद्रा भेंट की। इसके बावजूद जब दोनों भोजन करने के लिए तैयार नहीं हुए तो रामलीला समिति के अध्यक्ष एवं ग्राम प्रधान महुली अरविंद जायसवाल ने 500 रुपये और उपाध्यक्ष वीरेंद्र कुमार कन्नौजिया ने 200 रुपये देकर उन्हें मनाया।

इसके बाद प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण ने भोजन ग्रहण किया। इस अनूठे प्रसंग ने पंडाल में मौजूद लोगों को आनंदित कर दिया।

श्रद्धालुओं ने इस परंपरा को रामलीला की जीवंतता और लोक आस्था से जुड़ा विशेष क्षण बताया। जगदीश प्रसाद कन्नौजिया ने संभाली बारातियों के भोजन की व्यवस्था
रामलीला में बारातियों के भोजन की व्यवस्था सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी जगदीश प्रसाद कन्नौजिया की ओर से की गई।IMG 20261013 231638

उनके इस सहयोग से विवाहोत्सव की परंपरा को व्यवस्थित रूप से निभाया गया। रामलीला समिति के सदस्यों और उपस्थित श्रद्धालुओं ने भोजन व्यवस्था में उनके योगदान की सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान व्यास दिलीप कुमार कन्नौजिया, विश्वनाथ शर्मा, शेषमान कन्नौजिया, मुन्ना भारती, दयाराम कन्नौजिया और सुशील गुप्ता सहित रामलीला समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह की लीला देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटे।जनकपुर में गूंजे मंगलगीत, श्रीराम के संग सीता ने लिए सात फेरे; विवाह के भावुक दृश्यों ने श्रद्धालुओं की आंखें कीं नम - SONBHADRA, उत्तर प्रदेश

देर रात तक पंडाल दर्शकों से भरा रहा और पूरा परिसर जय श्रीराम के जयघोष से गुंजायमान होता रहा। 80वीं रामलीला का यह विवाहोत्सव श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, भावनाओं और सांस्कृतिक परंपराओं का यादगार संगम बन गया।

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