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रहली विधानसभा का रण,दोस्ती की मिसाल या भविष्य का महामुकाबला? अभिषेक गोपाल भार्गव और राजीव हजारी की अदृश्य प्रतिद्वंदिता पर टिकीं नजरें

15 Oct 2026, 10:34 AM • Vande Bharat Live TV News
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रहली विधानसभा का रण,दोस्ती की मिसाल या भविष्य का महामुकाबला? अभिषेक गोपाल भार्गव और राजीव हजारी की अदृश्य प्रतिद्वंदिता पर टिकीं नजरें - सागर, मध्य प्रदेश

सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 * जिले की सबसे चर्चित सीटों में शुमार रहली विधानसभा सीट पर राजनीतिक तापमान धीरे-धीरे एक नए मोड़ की तरफ बढ़ रहा है। 40 साल ज्यादा से भाजपा के अभेद्य किले के रूप में स्थापित इस विधानसभा क्षेत्र में अब युवा पीढ़ी अपनी जमीन मजबूत करने में जुट गई है।

इस जमीनी संघर्ष के केंद्र में दो बेहद लोकप्रिय, युवा और महत्वाकांक्षी चेहरे हैं, अभिषेक गोपाल भार्गव (दीपू भैया) और राजीव हजारी (ढाना)। सार्वजनिक मंचों पर दोनों के बीच दिखने वाली गहरी मित्रता के पीछे, राजनीति के जानकार एक न दिखने वाली गहरी प्रतिद्वंदिता को साफ तौर पर पढ़ रहे हैं, जो आने वाले समय में क्षेत्र की सियासत का रुख तय करेगी।

रहली और गढ़ाकोटा की राजनीति में गोपाल भार्गव एक ऐसा नाम है जिन्हें अपराजित माना जाता है। अब उनकी इसी समृद्ध राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कमान उनके पुत्र अभिषेक गोपाल भार्गव के हाथों में है।

अभिषेक भार्गव लंबे समय से भारतीय जनता युवा मोर्चा में वरिष्ठ पदों पर रहकर संगठन को मजबूत कर चुके हैं। रहली विधानसभा के हर बूथ और कार्यकर्ता पर उनकी सीधी पकड़ है।

सूत्रों और स्थानीय राजनैतिक गलियारों में यह चर्चा बेहद आम है कि गोपाल भार्गव अपने पुत्र अभिषेक को दमोह संसदीय क्षेत्र या फिर अपनी पारंपरिक रहली विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारने के लिए भाजपा हाईकमान से गुजारिश कर चुके हैं। अभिषेक भार्गव का पूरा ध्यान मुख्यत रहली विधानसभा की सीमाओं के भीतर सेवा संकल्प अभियान जन कल्याण शिविरों और बड़े धार्मिक आयोजनों (जैसे हाल ही में बागेश्वर धाम सरकार की यात्राओं) के जरिए अपनी दावेदारी को निर्विवाद बनाने पर केंद्रित है।

दूसरी तरफ, क्षेत्र के एक और प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक राजनीतिक परिवार से आने वाले राजीव हजारी (ढाना) इस क्षेत्र में अपनी एक अलग और जुझारू लकीर खींच रहे हैं। अभिषेक भार्गव के विपरीत, जिन्होंने खुद को केवल रहली विधानसभा तक केंद्रित रखा है, राजीव हजारी की सक्रियता सागर जिला मुख्यालय, ढाना और आसपास के अन्य क्षेत्रों में समानांतर रूप से बनी हुई है।

राजीव हजारी किसी बड़े गॉडफादर या सत्ता के वरदहस्त के बिना अपनी जमीन खुद तैयार कर रहे हैं। वे जनता से जुड़ी बुनियादी समस्याओं को लेकर सीधे कलेक्टर और प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने जैसे जमीनी कार्यों में जुटे रहते हैं।

भले ही राजीव हजारी कांग्रेस पार्टी की पृष्ठभूमि से आते हैं, लेकिन संगठन की पारंपरिक राजनीति से इतर उनका मुख्य फोकस सोशल मीडिया, स्वतंत्र जनसंपर्क और हमेशा टाइमलाइन में बने रहने पर रहता है, जिसमें वे काफी सफल भी दिखते हैं। उनकी लोकप्रियता और युवाओं के बीच उनकी पहुंच किसी भी मामले में अभिषेक भार्गव से कम नहीं आंकी जा रही है।

अभिषेक भार्गव और राजीव हजारी के बीच की आपसी मित्रता और शिष्टाचार भले ही जगजाहिर हो, लेकिन रहली विधानसभा पर दोनों की विशेष नजर ने एक अंदरूनी अंडरकरेंट पैदा कर दी है। अभिषेक भार्गव जहां अपने पिता की 40-50 साल की तैयार जमीन पर अपना दावा मजबूत कर रहे हैं, वहीं राजीव हजारी को यह अच्छे से आभास है कि उन्हें इस कठिन राजनीतिक संघर्ष में बने रहने के लिए अपनी मेहनत और खुद के संपर्क सूत्रों को कई गुना ज्यादा मजबूत करना होगा।

यही वजह है कि दोनों नेता एक-दूसरे के कदमों पर पैनी नजर रखते हैं। रहली की राजनीति अब केवल पुरानी विरासत को सौंपने जितनी सरल नहीं रह गई है।

जनता के बीच सुलभ बने रहने की राजीव हजारी की आक्रामक रणनीति और अभिषेक भार्गव का मजबूत सांगठनिक किला इन दोनों युवाओं की यह न दिखने वाली जंग आने वाले दिनों में साग़र जिले की राजनीति की सबसे बड़ी और बहु-चर्चित सर्चिंग स्टोरी बनने जा रही है

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