सिद्धार्थनगरः समूह सखियों का प्रदर्शन, 15 हजार मानदेय समेत 13 मांगें उठाईं

सिद्धार्थनगर में महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता के दावों के बीच राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी समूह सखियों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की है। बांसी के माधव बाबू पार्क में जुटीं महिलाओं ने मानदेय बढ़ाने, राज्य कर्मचारी का दर्जा देने और बकाया भुगतान समेत 13 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। महिलाओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित मांगपत्र एसडीएम बांसी को सौंपकर सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन में कांग्रेस नेता हेमंत चौधरी भी शामिल रहे। महिला समूह एकता जिंदाबाद के नारों से गूंज उठा बांसी का माधव बाबू पार्क। हाथों में मांगों की फेहरिस्त और चेहरे पर अपनी समस्याओं को लेकर नाराजगी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत काम करने वाली समूह सखियों ने सरकार से सीधे सवाल किया है कि आखिर इतने कम मानदेय में वे अपना घर कैसे चलाएं? 23 अक्टूबर को महिला समूह संघ उत्तर प्रदेश की जनपद शाखा के नेतृत्व में महिलाओं ने 13 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। उनकी प्रमुख मांग है कि समूह सखियों का मानदेय दो हजार रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए और उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा मिले। साथ ही ब्लॉक मुख्यालय आने-जाने के लिए यात्रा भत्ता भी दिया जाए। महिलाओं की मांगें सिर्फ मानदेय तक सीमित नहीं हैं। महिला मेट के लिए 12 हजार रुपये मासिक मानदेय और नियुक्ति प्रमाणपत्र, स्वास्थ्य सखियों को स्वास्थ्य किट के साथ 12 हजार रुपये प्रतिमाह, जबकि बीसी सखी, आजीविका सखी और बैंक सखी के लिए 10 हजार रुपये मासिक मानदेय निर्धारित करने की मांग उठाई गई है।
बीसी सखियों को मशीन खरीदने के लिए दी गई 75 हजार रुपये की राशि को ब्याज मुक्त करने की मांग भी प्रमुखता से उठी। इसके अलावा पिछले तीन वर्षों से लंबित राशन ढुलाई और मजदूरी का भुगतान, समूहों की सीसीएल यानी कैश क्रेडिट लिमिट को 10 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त करने और शौचालयों के केयरटेकर को नौ हजार रुपये प्रतिमाह सीधे बैंक खाते में देने की मांग की गई।
मांगपत्र में विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत कराए जाने वाले कार्यों पर सूचना पट्ट लगवाने, उस पर संबंधित समूह का नाम दर्ज कराने और निर्माण कार्यों में समूहों द्वारा तैयार बोर्ड के बिल-वाउचर का भुगतान प्राथमिकता से करने की मांग भी शामिल है। महिलाओं ने कृषि यंत्रों और सरकारी सुविधाओं पर 50 प्रतिशत सब्सिडी देने तथा समूह से जुड़ी महिलाओं की बेटियों की शादी के लिए दो लाख रुपये का अनुदान देने की भी मांग की है। मीडिया से बातचीत में संघ की प्रदेश प्रवक्ता कुसुम लोधी ने आरोप लगाया कि समूह सखियां लगातार काम कर रही हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाला दो हजार रुपये का मानदेय भी नियमित नहीं है। उनका कहना है कि काम के दौरान होने वाला खर्च मानदेय से कहीं अधिक है और कई महिलाओं को कर्ज लेकर काम करना पड़ रहा है।
कुसुम लोधी ने सरकारी कार्यक्रमों में महिलाओं को भेजने के लिए दबाव बनाए जाने और उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं सुने जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने साफ कहा कि जब तक समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक उनकी आवाज उठती रहेगी। वहीं, कांग्रेस नेता हेमंत चौधरी ने भी महिला समूह सखियों के समर्थन में सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के नाम पर उन्हें कर्ज के बोझ तले दबाया जा रहा है। हेमंत चौधरी के मुताबिक, बीसी सखियों को मशीन खरीदने के लिए मिली 75 हजार रुपये की राशि पर ब्याज चुकाने का दबाव है, जबकि कई जगह मशीनों से पर्याप्त लेन-देन नहीं हो पा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर सुनवाई नहीं हुई तो महिलाएं संबंधित विभाग के मंत्री ओम प्रकाश राजभर का घेराव कर सकती हैं। फिलहाल, समूह सखियों ने 13 सूत्रीय मांगपत्र के जरिए सरकार के सामने मानदेय, बकाया भुगतान, कर्ज से राहत और आर्थिक सुरक्षा का मुद्दा रखा है। अब बड़ा सवाल यह है कि महिलाओं की इन मांगों पर सरकार कब तक फैसला लेती है और उन्हें राहत कब मिलती है। फिलहाल, मांगपत्र सौंपे जाने के बाद सभी की निगाहें प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
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