ऋषिकेश:महा योग ध्यान कुंभ के दूसरे दिन सामूहिक ध्यान और राष्ट्रीय विस्तार पर मंथन

पंकज कथूरिया जिला संवाददाता बाहादराबाद हरिद्वार
(उत्तराखंड)
Vande bharat
October 24, 2026
*2030 तक 30 करोड़ लोगों तक ध्यान पहुंचाने का संकल्प।
ऋषिकेश। तीर्थनगरी ऋषिकेश के मुनि की रेती स्थित स्वामी नारायण आश्रम घाट पर आयोजित नौवें महायोग ध्यान कुंभ के दूसरे दिन शनिवार को गंगा तट पर सामूहिक ध्यान, योगाभ्यास और शास्त्रीय संगीत के माध्यम से आंतरिक शांति एवं आत्मनिरीक्षण का संदेश दिया गया। पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटीज मूवमेंट और पीएमसी हिंदी द्वारा आयोजित पांच दिवसीय आध्यात्मिक समागम में वर्ष 2030 तक देश के 30 करोड़ लोगों तक ध्यान पहुंचाने का संकल्प लिया गया।
आत्मनिरीक्षण और आंतरिक चेतना पर जोर
ध्यान सत्र के बाद पीएसएसएम के संस्थापक ब्रह्मर्षि सुभाष पत्री का रिकॉर्डेड संदेश प्रसारित किया गया। इसमें उन्होंने दूसरों के विचारों और कमियों में उलझने के बजाय अपने तन और मन का निरीक्षण करने तथा आत्मसुधार पर ध्यान देने का संदेश दिया। उन्होंने आंतरिक चेतना को समझने और स्वयं के प्रति जागरूक बनने की आवश्यकता पर जोर दिया।
आध्यात्मिक साहित्य के 25 वर्ष पूरे होने का उत्सव
महायोग ध्यान कुंभ के दूसरे दिन आध्यात्मिक साहित्य और क्षेत्रीय भाषाओं में पत्रिकाओं के प्रसार पर भी विशेष चर्चा हुई। ‘न्यू एज स्पिरिचुअल इंडिया’ और ‘न्यू एज स्पिरिचुअल साइंस’ पत्रिकाओं के प्रकाशन के 25वें वर्ष में प्रवेश को रेखांकित करते हुए वक्ताओं ने ध्यान और आध्यात्मिक विचारों को समाज तक पहुंचाने में साहित्य की भूमिका बताई।
श्रीनिवास रेड्डी ने आध्यात्मिक साहित्य को संस्था की वैचारिक पहचान बताते हुए उसके सार्वभौमिक और समग्र दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। सृजना वेणुगोपाल रेड्डी ने दोनों पत्रिकाओं की यात्रा का उल्लेख किया और बताया कि इनके माध्यम से 1,330 से अधिक भारतीय गुरुओं तथा 88 आध्यात्मिक वैज्ञानिकों के विचारों को संकलित किया गया है।
‘डॉक्टर से पूछो’ कार्यक्रम
स्वास्थ्य संबंधी सत्र में डॉ. सौरभ रंजन ने ध्यान और स्वास्थ्य के विषय पर अपने विचार साझा किए तथा PMC के ‘डॉक्टर से पूछो’ कार्यक्रम की जानकारी दी। वक्ताओं ने नियमित ध्यान, शाकाहार और आत्मजागरूकता को आंदोलन के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल बताया।
महायोग ध्यान कुंभ के दूसरे दिन की गतिविधियों में व्यक्तिगत साधना के साथ ध्यान के सामाजिक प्रसार, आध्यात्मिक साहित्य और प्रशिक्षण को प्रमुखता दी गई। आयोजकों ने सामूहिक प्रयासों और आधुनिक संचार माध्यमों के जरिए ध्यान को अधिकाधिक लोगों तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।
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