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बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़ | अर्थी, चिता, बकरे का अंतिम संस्कार और फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र! हत्या के मुकदमे से बचने के लिए खुद को मुर्दा दिखाने वाला आरोपी गिरफ्तार

26 Oct 2026, 11:48 AM • Vande Bharat Live TV News
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बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़ | अर्थी, चिता, बकरे का अंतिम संस्कार और फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र! हत्या के मुकदमे से बचने के लिए खुद को मुर्दा दिखाने वाला आरोपी गिरफ्तार - MAU, उत्तर प्रदेश

🚨🔥 **बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़ | अर्थी, चिता, बकरे का अंतिम संस्कार और फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र! हत्या के मुकदमे से बचने के लिए खुद को मुर्दा दिखाने वाला आरोपी गिरफ्तार**

**उत्तर प्रदेश के मऊ में चौंकाने वाला मामला: करीब डेढ़ साल तक कागजों में मृत रहा राजू उर्फ राजकुमार राजभर, पुलिस ने दबोचा; अब सामने आएगी कथित साजिश की पूरी कहानी!**

📍 **मऊ, उत्तर प्रदेश।**

उत्तर प्रदेश के मऊ से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पुलिस जांच, सरकारी दस्तावेजों और न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि वर्ष 2016 में हुए एक हत्याकांड के मुकदमे में कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए एक आरोपी ने अपनी मौत का ही नाटक रच डाला। कथित तौर पर अंतिम संस्कार की तस्वीरें तैयार कराई गईं, चिता पर बकरे की देह जलाई गई और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र हासिल कर न्यायालय में खुद को मृत साबित करने की कोशिश की गई।

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि **जिस व्यक्ति को कागजों में मृत दिखाया जा रहा था, वह कथित तौर पर जिंदा था और पुलिस से बचकर रह रहा था।** अब मऊ पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की कार्रवाई के बाद कथित फर्जीवाड़े की परतें खुलने लगी हैं।

### 🔴 2016 में हुई थी योगेश सिंह की गोली मारकर हत्या

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मामला 19 दिसंबर 2016 का है। मऊ के मुंशीपुरा रेलवे लाइन के पास योगेश सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। योगेश सिंह ईंट-भट्ठा कारोबार से जुड़े थे।

इस मामले में मृतक के भतीजे अविनाश सिंह की शिकायत पर राजू उर्फ राजकुमार राजभर और उसके साथी सुदर्शन राजभर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप था कि रुपये के लेन-देन के विवाद में योगेश सिंह की हत्या की गई। हालांकि, आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाना है।

मामले में न्यायिक कार्यवाही चल रही थी। इसी दौरान मुख्य आरोपियों में शामिल राजू उर्फ राजकुमार राजभर ने कथित तौर पर ऐसा रास्ता अपनाया, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है—उसने अपनी ही मौत की कहानी तैयार कर ली।

### 🔴 30 मई 2025: कथित तौर पर रची गई मौत की कहानी

पुलिस के अनुसार, राजकुमार ने 30 मई 2025 को गाजीपुर जिले में अपनी मौत का नाटक रचने की कथित योजना बनाई। अंतिम संस्कार से जुड़ी तस्वीरों और दस्तावेजों के जरिए उसकी मौत को वास्तविक दिखाने की कोशिश किए जाने का आरोप है।

मीडिया रिपोर्टों में सामने आया है कि चिता पर लेटे व्यक्ति की तस्वीर को कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी **AI की मदद से तैयार या संपादित किए जाने** की बात भी जांच में सामने आई। कथित तौर पर अंतिम शवयात्रा और अंतिम संस्कार का दृश्य इस तरह तैयार किया गया, जिससे लोगों को उसकी मृत्यु पर विश्वास हो जाए।

रिपोर्टों के मुताबिक, चिता पर वास्तविक मानव शरीर के स्थान पर बकरे की देह का अंतिम संस्कार किया गया। इस कथित योजना का उद्देश्य लोगों और संबंधित अधिकारियों के सामने यह दिखाना था कि राजकुमार की मृत्यु हो चुकी है।

### 🔴 मृत्यु प्रमाण पत्र से न्यायालय को गुमराह करने की कथित कोशिश

मामले में सबसे गंभीर पहलू सरकारी दस्तावेजों से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र हासिल किया गया और उसे न्यायालय में पेश कर आरोपी की मृत्यु साबित करने की कोशिश की गई।

इस तरह आरोपी पर आरोप है कि उसने खुद को मृत दिखाकर चल रही न्यायिक कार्यवाही से बचने का प्रयास किया। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात स्पष्ट करना जरूरी है—**मृत्यु प्रमाण पत्र पेश किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हत्या का मुकदमा कानूनी रूप से हमेशा के लिए समाप्त हो गया था।** उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी को अब गिरफ्तार कर लिया गया है और कथित फर्जी दस्तावेजों के मामले में भी कार्रवाई की गई है।

### 🔴 शेयर ट्रेडिंग का कारोबार और निवेशकों के पैसे का एंगल

मामले में शेयर बाजार में ट्रेडिंग और निवेश से जुड़ा पहलू भी सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राजकुमार ट्रेडिंग के कारोबार से जुड़ा था और उसने कई लोगों से शेयर बाजार में निवेश कराने के नाम पर रकम ली थी।

पुलिस के हवाले से आई खबरों में यह भी कहा गया है कि कथित तौर पर अपनी मौत का नाटक रचने के पीछे हत्या के मुकदमे के साथ-साथ पैसों से जुड़े मामलों से बचने का उद्देश्य भी हो सकता है। इस पहलू की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

कुछ मीडिया रिपोर्टों में दो होम्योपैथिक डॉक्टरों की भूमिका को लेकर भी जांच की बात सामने आई है। हालांकि, उनकी कथित भूमिका को अभी जांच का विषय मानना चाहिए। किसी व्यक्ति की संलिप्तता अदालत में प्रमाणित होने से पहले उसे दोषी बताना उचित नहीं होगा।

### 🔴 करीब डेढ़ साल बाद पुलिस ने कैसे पकड़ा?

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मऊ पुलिस ने 25 अक्टूबर 2026 को कार्रवाई करते हुए राजू उर्फ राजकुमार राजभर को ख्वाजाजहांपुर इलाके से गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई में कोतवाली नगर पुलिस के साथ एसओजी और सर्विलांस टीम की भूमिका बताई गई है।

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसकी कथित मौत, मृत्यु प्रमाण पत्र और न्यायालय में पेश किए गए दस्तावेजों को लेकर जांच आगे बढ़ी है। रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि फर्जी दस्तावेजों के संबंध में अलग मुकदमा दर्ज किया गया है।

इस पूरे मामले में अब जांच का केंद्र यह है कि कथित मृत्यु प्रमाण पत्र किन दस्तावेजों के आधार पर जारी हुआ, अंतिम संस्कार से जुड़ी तस्वीरें कैसे तैयार की गईं और इस कथित साजिश में अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

### 🔴 अब उठ रहे हैं कई बड़े सवाल

इस मामले ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं।

❓ यदि किसी व्यक्ति को मृत घोषित किया जाता है, तो संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया कितनी प्रभावी है?

❓ मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने से पहले पहचान और मृत्यु से संबंधित तथ्यों की पुष्टि किस स्तर पर की गई?

❓ क्या न्यायालय में पेश किए गए दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच हुई थी?

❓ यदि तस्वीरों में AI या डिजिटल संपादन का इस्तेमाल हुआ, तो इसकी पहचान किस स्तर पर और कैसे की गई?

❓ क्या इस कथित फर्जीवाड़े में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी?

इन सवालों का जवाब जांच एजेंसियों और संबंधित अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा।

### 🔴 बड़ी बात: कानून से बचने की कथित कोशिश का अंत गिरफ्तारी पर

मऊ का यह मामला दिखाता है कि सरकारी अभिलेखों और न्यायिक प्रक्रिया में कथित धोखाधड़ी के आरोप कितने गंभीर हो सकते हैं। यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी आरोपी ने जानबूझकर खुद को मृत दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कराए और न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया, तो यह अपने आप में गंभीर कानूनी मामला होगा।

फिलहाल, राजू उर्फ राजकुमार राजभर की गिरफ्तारी की खबर सामने आई है। वर्ष 2016 के योगेश सिंह हत्याकांड में उसकी भूमिका और कथित फर्जी मृत्यु प्रकरण के सभी पहलुओं का अंतिम निर्धारण न्यायालय में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

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🖋️ संपादक: वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज़, सहारनपुर
📰 विशेष रिपोर्ट: एलिक सिंह

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