चाल्स शोभराज की गिरफ्तारी की दिलचस्प कहानी

1986 में कुख्यात सीरियल किलर चार्ल्स शोभराज ने तिहाड़ जेल के सुरक्षाकर्मियों को नशीला पदार्थ खिलाकर चकमा दिया और जेल से फरार हो गया। लेकिन मुंबई पुलिस के एक इंस्पेक्टर ने महज तीन सप्ताह बाद उसे गोवा में ढूँढ़ निकाला। इसकी एक दिलचस्प वजह थी—वह रात के समय सन हैट (धूप से बचने वाली टोपी) पहने हुए था।
उस इंस्पेक्टर का नाम था मधुकर झेंडे, जो मुंबई पुलिस में तैनात थे।
यह पहली बार नहीं था जब झेंडे ने शोभराज को गिरफ्तार किया था। इससे पहले भी 1971 में वे उसे गिरफ्तार कर चुके थे।
मार्च 1986 में शोभराज ने तिहाड़ जेल के अंदर एक पार्टी आयोजित की। जेल के सुरक्षाकर्मियों को नशीला पदार्थ मिला हुआ खाना खिलाया गया और फिर शोभराज जेल से बाहर निकल गया।
उसे ढूँढ़ने की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर मधुकर झेंडे को सौंपी गई।
तीन अहम सुराग उन्हें गोवा तक ले गए।
पहला, एक व्यक्ति को रिवॉल्वर और बम के साथ पकड़ा गया था, जिसका संबंध शोभराज से जुड़ा हुआ था।
दूसरा, एक स्थानीय व्यक्ति ने मोरपंखी हरे रंग की मोटरसाइकिल देखी थी।
तीसरा, टेलीग्राम ऑफिस के एक कर्मचारी ने बताया कि विदेशी नागरिक अक्सर पोरवोरिम स्थित 'ओ'कोक्वेरो' (O'Coqueiro) नाम के एक रेस्तराँ से फोन किया करते थे।
झेंडे ने उस रेस्तराँ पर नजर रखनी शुरू कर दी।
6 अप्रैल 1986 की रात उन्होंने कुछ विदेशी नागरिकों को सन हैट पहने हुए रेस्तराँ में प्रवेश करते देखा। बाद में उन्होंने बताया कि उनके मन में एक सवाल आया—
"आखिर कोई रात के समय सन हैट क्यों पहनेगा?"
उन्होंने तुरंत शोभराज को पहचान लिया और उसे दबोच लिया।
शोभराज के पास एक भरी हुई पिस्तौल थी और उसने उसे निकालने की कोशिश भी की। उसके जूतों में 10,000 डॉलर भी छिपाकर रखे हुए थे।
इस तरह तिहाड़ जेल से फरार होने वाला शख्स आखिरकार दोबारा पुलिस की गिरफ्त में आ गया और उसे विमान से वापस दिल्ली ले जाया गया।
एक अपराधी की चालाकी पर भारी पड़ा एक पुलिस इंस्पेक्टर का अनुभव, धैर्य और बारीक नजर!
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