आगर-मालवा।** जिले की कांग्रेस राजनीति में स्थानीय और बाहरी नेतृत्व को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान के आसार नजर आने लगे हैं। आगर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार रहे तथा जिला कांग्रेस कमेटी अनुसूचित जाति विभाग के भाग अध्यक्ष गौरीशंकर सूर्यवंशी ने बाहरी नेताओं के बढ़ते हस्तक्षेप के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कांग्रेस के प्रदेश एवं राष्ट्रीय नेतृत्व से आगर जिले की राजनीति में बाहरी नेताओं के अनावश्यक दखल पर रोक लगाने और स्थानीय नेताओं व कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने की मांग उठाई है।
सूर्यवंशी ने वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के समक्ष अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आगर विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियों, संगठन की स्थिति और जमीनी हकीकत से स्थानीय कार्यकर्ता बेहतर तरीके से परिचित हैं। ऐसे में बाहरी नेताओं का क्षेत्रीय राजनीति में हस्तक्षेप स्थानीय नेतृत्व के सम्मान और कार्यकर्ताओं की भूमिका को प्रभावित करता है।
उन्होंने कांग्रेस नेता विपिन वानखेड़े का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें अपने अनुभव और राजनीतिक क्षमता का उपयोग इंदौर ग्रामीण क्षेत्र में करना चाहिए। आगर विधानसभा क्षेत्र में उनका हस्तक्षेप बंद होना चाहिए। सूर्यवंशी ने प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संगठनात्मक स्तर पर उचित निर्णय लेने की अपील की है।
**दिल्ली की गतिविधियों पर भी उठाए सवाल**
सूर्यवंशी ने दिल्ली में हुई गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित होना जरूरी है। केवल कुछ चुनिंदा लोगों की मौजूदगी के आधार पर संगठन की वास्तविक स्थिति का आकलन नहीं किया जा सकता। स्थानीय कार्यकर्ताओं को विश्वास में लेकर ही संगठन को मजबूत बनाया जा सकता है।
**व्यक्ति विशेष नहीं, स्थानीय नेतृत्व के सम्मान की लड़ाई**
गौरीशंकर सूर्यवंशी ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आगर जिले में स्थानीय नेतृत्व को सम्मान और संगठन में कार्यकर्ताओं को उचित भागीदारी दिलाने का मुद्दा है। उन्होंने कहा कि जिले के संगठनात्मक निर्णयों में स्थानीय नेताओं की राय को महत्व मिलना चाहिए।
सूर्यवंशी के इस बयान के बाद आगर जिले की कांग्रेस राजनीति में स्थानीय बनाम बाहरी नेतृत्व का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। अब देखना होगा कि जिला संगठन से लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व तक इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं।