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लखनऊ : जन्मतिथि (डी.ओ.बी) प्रमाण को लेकर बड़ा सरकारी आदेश! अब आधार कार्ड से नहीं होगा जन्मतिथि का सत्यापन

अब सिर्फ हाईस्कूल प्रमाणपत्र या जन्म प्रमाणपत्र ही होंगे मान्य!

लखनऊ : जन्मतिथि (डी.ओ.बी) प्रमाण को लेकर बड़ा सरकारी आदेश! अब आधार कार्ड से नहीं होगा जन्मतिथि का सत्यापन — उत्तर प्रदेश सरकार का ऐतिहासिक निर्णय, नियोजन विभाग के विशेष सचिव ने सभी विभागों को जारी किए कड़े निर्देश! सरकारी सेवाओं, पेंशन, लाइसेंस सहित तमाम अहम कार्यों में अब सिर्फ हाईस्कूल प्रमाणपत्र या जन्म प्रमाणपत्र ही होंगे मान्य! प्रदेश में तुरंत लागू हुआ नया नियम, लाखों आवेदकों और विभागीय प्रक्रियाओं पर पड़ेगा सीधा प्रभाव 🚨⛔

उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा और दूरगामी बदलाव लाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने जन्मतिथि सत्यापन (जन्म की तारीख प्रमाण) को लेकर एक सख्त और ऐतिहासिक आदेश जारी किया है, जिसके तहत अब आधार कार्ड को किसी भी सरकारी कामकाज में जन्मतिथि प्रमाण (तारीख-ए-पैदाइश के सबूत) के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह फैसला तब लिया गया जब यह स्पष्ट हुआ कि आधार कार्ड में दर्ज की गई जन्मतिथि (डी.ओ.बी) के साथ कोई वैध जन्म प्रमाणपत्र अनिवार्य रूप से जुड़ा नहीं होता। शासन के नियोजन विभाग के विशेष सचिव अमित सिंह बंसल ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के सभी विभागों को स्पष्ट दिशा-निर्देश भेजे हैं कि अब से सरकारी सेवाओं में भर्ती, पेंशन सत्यापन, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, सेवा रिकॉर्ड, शैक्षणिक नामांकन, नौकरी आवेदन, कर्मचारी सत्यापन जैसे संवेदनशील और आवश्यक मामलों में केवल और केवल 10वीं कक्षा का प्रमाणपत्र (हाईस्कूल सर्टिफिकेट) या सरकारी जन्म प्रमाणपत्र को ही जन्मतिथि की पुष्टि के लिए वैध और आधिकारिक दस्तावेज़ माना जाएगा। आदेश में यह साफ शब्दों में कहा गया है कि आधार कार्ड में जन्मतिथि दर्ज करने का स्रोत अक्सर स्व-घोषणा (प्रारंभिक जानकारी) पर आधारित होता है, उसमें जन्म प्रमाणपत्र संलग्न (अटैच) करने की अनिवार्यता नहीं होती, इसलिए इस दस्तावेज़ से जन्म की वास्तविक तिथि का प्रमाणिक और कानूनी सत्यापन संभव नहीं है, यही कारण है कि आधार कार्ड अब डी.ओ.बी सत्यापन की श्रेणी में नहीं आएगा। सरकार का यह निर्णय पारदर्शिता, दस्तावेज़ प्रमाणिकता और वैधता की दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि कई वर्षों से सरकारी विभागों में शिकायतें, आवेदन निरस्तीकरण, फर्जी जन्मतिथि विवाद, सेवा-रिकॉर्ड में जन्मतिथि संशोधन के नाम पर अनियमित सत्यापन, और दस्तावेज़ों की वैधता पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। प्रदेश सरकार के इस आदेश के बाद सरकारी विभागों में हलचल तेज़ हो गई है और संबंधित फाइलों, भर्ती प्रक्रियाओं, कर्मचारी सेवा-अभिलेखों और ऑनलाइन आवेदन प्रणालियों में तुरंत संशोधन कार्य शुरू कर दिया गया है, जिससे भविष्य में जन्मतिथि को लेकर किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी, अनियमितता, या गलत सत्यापन की संभावना समाप्त हो सके। प्रशासनिक विशेषज्ञ मानते हैं कि इस आदेश का प्रभाव पूरी प्रदेशीय व्यवस्था पर गहरा पड़ेगा, क्योंकि लाखों युवा, सरकारी आवेदक, कर्मचारी, पेंशनभोगी और नियोजन पैनल से जुड़े उम्मीदवार अब आधार कार्ड की जन्मतिथि के भरोसे काम नहीं कर पाएंगे, बल्कि उन्हें अपने पुराने, प्रमाणिक और कानूनी रूप से मान्य दस्तावेज़ों जैसे जन्म प्रमाणपत्र या हाईस्कूल सर्टिफिकेट की अनिवार्यता का पालन करना होगा। इस निर्णय के बाद जनता में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, जहां एक पक्ष इस फैसले को प्रशासन में पारदर्शिता और सत्यापन-प्रक्रिया में शुचिता लाने वाला ऐतिहासिक कदम बता रहा है, वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि कई लोगों के पास पुराने जन्म प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं हैं, जिससे दस्तावेज़ जुटाने की प्रक्रिया मुश्किल हो सकती है, लेकिन सरकार का इस पर स्पष्ट मत है कि विभागीय कार्य की वैधता और प्रमाणिकता सबसे ऊपर है, और इसी आधार पर यह आदेश लागू किया गया है। सरकार का यह भी कहना है कि जिनके पास प्रामाणिक जन्म रिकॉर्ड नहीं है, वे स्थानीय नगर निकाय या पंचायत स्तर से जन्म प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया का पालन कर सकते हैं और किसी भी सरकारी कार्य में उससे जन्मतिथि की प्रमाणिक पुष्टि देंगे, लेकिन आधार कार्ड को अब जन्मतिथि के प्रमाण के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। पुलिस विभाग, नियोजन विभाग, सचिवालय प्रशासन और अन्य संबंधित संस्थाएँ अब इस फैसले को लागू कराने के लिए विभागीय स्तर पर तकनीकी और प्रशासनिक बदलाव कर रही हैं, ताकि जन्मतिथि से जुड़े किसी भी सरकारी कार्य में गलत या अप्रमाणिक दस्तावेज़ों को आधार न बनाया जा सके। यह फैसला उन सभी लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है, जो प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सरलता की आड़ में प्रमाणिक दस्तावेज़ों की अनदेखी करते आए हैं, और अब उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आधार कार्ड से नहीं, बल्कि केवल जन्म प्रमाणपत्र और हाईस्कूल प्रमाणपत्र से ही जन्मतिथि का काम चलेगा। प्रदेश में यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, और अब सरकारी कामकाज की फाइलों पर एक नया सत्यापन-युग प्रारंभ हो चुका है।


रिपोर्ट : अलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी समाचार
ब्यूरो प्रमुख – दैनिक आशंका बुलेटिन, सहारनपुर
संपर्क : 8217554083

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