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अमेरिका से डिपोर्ट हुए भारतीयों की दर्दनाक कहानी: 45 लाख खर्च कर लौटे तो हाथों में हथकड़ी

अमेरिका में बेहतर जीवन का सपना देखने और शाहरुख खान की डंकी फिल्म जैसा अनुभव पाने के लिए कई भारतीयों ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था। लेकिन वे जब वापस भारत लौटे तो उनके पास कुछ नहीं बचा

अमेरिका से डिपोर्ट हुए भारतीयों की दर्दनाक कहानी: 45 लाख खर्च कर लौटे तो हाथों में हथकड़ी

🔴 डंकी रूट से अमेरिका गए, अब वापस लौटे तो मिला केवल निराशा
🔴 परिवारों ने खेती की ज़मीन बेचकर और रिश्तेदारों से उधार लेकर भेजा था
🔴 अमेरिका में जेल जैसी स्थिति, फिर भारत आते समय हाथों में हथकड़ी और पैरों में जंजीरें

नई दिल्ली:

अमेरिका में बेहतर जीवन का सपना देखने और शाहरुख खान की डंकी फिल्म जैसा अनुभव पाने के लिए कई भारतीयों ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था। लेकिन वे जब वापस भारत लौटे तो उनके पास कुछ नहीं बचा— सिर पर दुख, हाथों में हथकड़ी और पैरों में जंजीरें। ये हैं उन भारतीयों की कहानियां, जो अवैध तरीके से अमेरिका जाने के बाद डिपोर्ट हुए हैं।

शनिवार को अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरे अमेरिकी सैन्य विमान में 116 डिपोर्ट हुए भारतीयों में से कई ने बताया कि उनके परिवार ने उन्हें अमेरिका भेजने के लिए अपनी खेतों की ज़मीन बेचकर, गहने गिरवी रखकर, और रिश्तेदारों से उधार लेकर 45-46 लाख रुपये खर्च किए थे।

सौरव की कहानी: ‘हथकड़ी लगाई गई, और पैरों में जंजीरें थीं’

पंजाब के सौरव (20) ने बताया कि 27 जनवरी को जब वह सीमा पार कर अमेरिका में घुसने की कोशिश कर रहा था, तो उसे अमेरिकी अधिकारियों ने पकड़ लिया था। वह पिछले साल 17 दिसंबर को अपने घर से अमेरिका के लिए निकला था। सौरव ने कहा, “हमें 18 दिनों तक शिविर में रखा गया, हमारे मोबाइल फोन ले लिए गए थे। जब हमें विमान में बिठाया गया तो उन्होंने कहा कि हमें भारत ले जाया जा रहा है।”

सौरव ने बताया कि उनके परिवार ने उन्हें विदेश भेजने के लिए दो एकड़ खेत की ज़मीन बेची थी और बाकी पैसे रिश्तेदारों से उधार लिए थे। जब वह वापस आए, तो उन्हें हथकड़ी और जंजीरों में लाकर अमृतसर हवाई अड्डे पर उतारा गया।

हरजीत और मंताज सिंह की पीड़ा

हरजीत सिंह (गुरदासपुर) और उनके चचेरे भाई को भी अमेरिका से डिपोर्ट किया गया। हरजीत ने कहा, “हमारे परिवार ने हमें अमेरिका भेजने के लिए 90 लाख रुपये खर्च किए। हमें आश्वासन दिया गया था कि यह कानूनी प्रक्रिया से होगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। हमें 18 दिनों तक हिरासत में रखा गया, फिर हमें हाथों में हथकड़ी और पैरों में जंजीरें डालकर भेजा गया।”

मंताज सिंह (होशियारपुर) ने भी बताया कि उन्हें ‘डंकी रूट’ के जरिए अमेरिका भेजा गया था, एक अवैध मार्ग जो आजकल प्रवासियों के बीच प्रचलित है।

ट्रैवल एजेंटों की धोखाधड़ी

पंजाब के साहिल प्रीत सिंह के माता-पिता ने आरोप लगाया कि एक ट्रैवल एजेंट ने उनके बेटे को विदेश भेजने में धोखाधड़ी की। उनकी मां ने कहा, “हमने गहने बेचकर और ज़मीन गिरवी रखकर पैसे जुटाए थे। ट्रैवल एजेंट ने हमें झूठा वादा किया था।”

राजपुरा से जुड़े हत्या के आरोपियों का मामला

इस बीच, राजपुरा (पटियाला) के दो युवकों, संदीप सिंह और प्रदीप सिंह, को अमेरिका से निर्वासित किया गया। दोनों पर हत्या का आरोप था और यह मामले 2023 में दर्ज हुए थे। भारतीय अधिकारियों ने इन्हें अमृतसर हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया और इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान का बयान

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अमृतसर हवाई अड्डे पर अमेरिकी विमानों के पहुंचने के बाद केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। उनका कहना था कि केंद्र को इस गंभीर मुद्दे पर ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो।

निष्कर्ष:

इन मामलों से यह स्पष्ट होता है कि अवैध प्रवासियों का एक बड़ा हिस्सा धोखाधड़ी और झूठे वादों के कारण बर्बाद हो गया। लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद, उन्हें न तो अमेरिका में बेहतर जीवन मिला और न ही सही तरीके से उनका प्रवेश हुआ। अब वे वापस अपने देश लौट रहे हैं, लेकिन उनके परिवारों की मेहनत और रकम बर्बाद हो चुकी है। ऐसे में यह जरूरी है कि सरकार और संबंधित विभाग इन मामलों पर कड़ी निगरानी रखें ताकि भविष्य में किसी को ऐसे धोखे का शिकार न होना पड़े।

📞 रिपोर्ट: वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
📞 एलिक सिंह (संपादक) – 8217554083
📞 जिला प्रभारी (BJAC) भारतीय पत्रकार अधिकार परिषद्

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