

ओमकार हॉस्पिटल बलौदाबाजार पर गंभीर आरोप — इलाज के नाम पर वसूली, मरीज को बंधक बनाकर डराने-धमकाने की शिकायत
कलेक्टर ने लिया संज्ञान, तत्काल जांच के आदेश — पहले भी उठ चुकी हैं कई शिकायतें
बलौदाबाजार।
जिले का चर्चित ओमकार हॉस्पिटल एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। गरीब मरीज से जबरन रुपये वसूलने, डराने-धमकाने और यहां तक कि मरीज को बंधक बनाकर रखने जैसे गंभीर आरोप अस्पताल प्रबंधन पर लगे हैं।
यह ताज़ा मामला जिला बिलासपुर के ग्राम बसंतपुर निवासी गोरेलाल पटेल द्वारा जिला कलेक्टर बलौदाबाजार-भाटापारा को दिए गए लिखित आवेदन के माध्यम से उजागर हुआ है।
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🚨 इलाज के नाम पर वसूली, ऑपरेशन के लिए डेढ़ से दो लाख की मांग
आवेदक गोरेलाल पटेल ने बताया कि उसका पुत्र शंभू पटेल 2 नवम्बर (रविवार) की रात लगभग 8 से 9 बजे के बीच पनगांव बायपास के पास सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया था।
घटना के बाद घायल को तत्काल जिला अस्पताल बलौदाबाजार लाया गया, लेकिन वहां के कर्मचारियों ने यह कहकर इलाज से इंकार कर दिया कि — “डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं।”
इसी दौरान अस्पताल परिसर में खड़ी एक निजी एम्बुलेंस के चालक ने उन्हें ओमकार हॉस्पिटल ले जाने की सलाह दी और कहा कि — “वहाँ आयुष्मान कार्ड से बेहतर इलाज होता है।”
मजबूरी में परिजन घायल को उसी एम्बुलेंस से ओमकार हॉस्पिटल ले गए।
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😡 मरीज को बनाया बंधक — 80 हजार रुपये की मांग
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टरों ने एक्स-रे कर रातभर मरीज को भर्ती रखा।
अगले दिन बताया गया कि जबड़ा टूट गया है और ऑपरेशन करना पड़ेगा, जिसकी लागत डेढ़ से दो लाख रुपये बताई गई।
गरीबी का हवाला देकर जब परिजनों ने ऑपरेशन से इंकार किया तो डॉक्टरों ने कथित रूप से कहा —
“ये होटल का भजिया नहीं है कि तुम बोलोगे और हो जाएगा।
तुम लोग अपनी मर्जी से आए हो, जाओगे हमारी मर्जी से।”
इसके बाद अस्पताल स्टाफ ने जबरन कई कागजों पर हस्ताक्षर कराए, परिजनों को बाउंसरों से बाहर निकाल दिया और घायल शंभू पटेल को ऑक्सीजन पाइप के साथ कमरे में बंद कर दिया।
अस्पताल प्रबंधन अब ₹80,000 की मांग कर रहा है और पैसे दिए बिना मरीज को छोड़ने से साफ इनकार कर रहा है।
📄 पहले भी उठ चुकी हैं शिकायतें, जांच रिपोर्ट अब तक गुम
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, ओमकार हॉस्पिटल के खिलाफ इससे पहले भी कई शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं।
प्रशासन ने एक तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी, लेकिन उस जांच का कोई ठोस परिणाम अब तक सार्वजनिक नहीं हुआ।
ऐसे में यह मामला जिले में निजी अस्पतालों की मनमानी और गरीबों के शोषण की गम्भीर स्थिति को उजागर करता है।
🏛️ कलेक्टर ने लिया संज्ञान — स्वास्थ्य विभाग, एसडीएम और पुलिस को जांच के निर्देश
नवीन शिकायत पर जिला कलेक्टर बलौदाबाजार-भाटापारा ने तत्काल संज्ञान लिया है।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, एसडीएम और पुलिस प्रशासन को संयुक्त जांच के आदेश जारी किए हैं।
जानकारी के अनुसार, संबंधित टीम ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
🚑 जिला अस्पताल और निजी एम्बुलेंस नेटवर्क पर भी सवाल
यह पूरा प्रकरण जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाता है।
मरीजों को “डॉक्टर नहीं है” कहकर बाहर भेजना और उसी परिसर से निजी एम्बुलेंस द्वारा महंगे अस्पतालों में भेजना संभावित मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
आवेदक ने इसे “सुनियोजित नेटवर्क” बताया है जो गरीब मरीजों को जाल में फँसाने का काम करता है।
💔 मानवता और कानून दोनों पर गहरी चोट
एक घायल युवक को उसकी मर्जी के खिलाफ बंधक बनाना और परिजनों से जबरन वसूली करना न केवल कानूनी अपराध है बल्कि मानवता के मूल मूल्यों पर भी गहरी चोट है।
यह घटनाएँ स्वास्थ्य तंत्र की असफलता और निजी अस्पतालों की बेलगाम व्यवस्था की पोल खोलती हैं।
📢 स्थानीय नागरिकों की मांग — कठोर कार्रवाई हो
स्थानीय समाजसेवियों और नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि—
•अस्पताल प्रबंधन पर FIR दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।
•आयुष्मान कार्ड के दुरुपयोग की जांच हो।
•जिला अस्पताल के उन कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो जो इस अस्पताल माफिया नेटवर्क में शामिल हैं।
यह घटना केवल एक परिवार की व्यथा नहीं, बल्कि पूरे समाज की पीड़ा है।
जब सरकारी अस्पतालों में इलाज उपलब्ध नहीं होता और निजी अस्पताल उसे अवसर बनाकर गरीबों से लूट करते हैं, तो यह स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की असल तस्वीर सामने लाता है।
अब पूरा जिला कलेक्टर की जांच रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहा है — ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ओमकार हॉस्पिटल पर लगे आरोपों में कितनी सच्चाई है और यह नेटवर्क आखिर कितना गहरा है












