
निवाड़ी,ओरछा। सिविल न्यायालय परिसर ओरछा में स्वच्छता नियमों के उल्लंघन और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के मामले में माननीय न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय परिसर की दीवारों को गुटखा थूककर गंदा करने और सार्वजनिक जल स्रोत को दूषित करने के दोष में एक युवक पर आर्थिक जुर्माना लगाया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अभिषेक सिंह परिहार (पुत्र जगदीश सिंह परिहार), निवासी प्रतापपुरा, ओरछा को न्यायालय परिसर की दीवारों पर गुटखा थूकते हुए पकड़ा गया। आरोपी ने न केवल न्यायालय की दीवारों को क्षतिग्रस्त किया, बल्कि परिसर में लगे वाटर कूलर में भी थूककर संक्रमण फैलने की गंभीर स्थिति उत्पन्न की।
न्यायालय का निर्णय
मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय श्री उमेश भगवती, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को मध्य प्रदेश संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम, 1994 की धारा 3 के अंतर्गत दोषी ठहराया। न्यायालय द्वारा आरोपी पर 300 रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
सार्वजनिक अपील व सख्त चेतावनी
जुर्माना लगाने के साथ-साथ माननीय न्यायाधीश ने आरोपी को भविष्य में ऐसा कृत्य न करने की सख्त समझाइश दी। साथ ही न्यायालय परिसर में उपस्थित पक्षकारों, अधिवक्ताओं, कर्मचारियों एवं आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि—
न्यायालय एवं अन्य सार्वजनिक भवनों की दीवारों को गंदा न करें।
न्यायालय परिसर व सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार का नशा एवं धूम्रपान पूर्णतः प्रतिबंधित है।
सार्वजनिक वाटर कूलर एवं अन्य सुविधाओं को दूषित करना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है और यह दंडनीय अपराध है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्वच्छता और मर्यादा बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है, तथा इसके उल्लंघन पर भविष्य में भी कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाती रहेगी।






