
वंदेभारतलाइवटीव न्युज, नागपुर, गुरूवार 22 जनवरी 2026
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卐 वंदे तां परमेश्वरी भगवतीं बुद्धि प्रदां शारदाम् 卐
==================== सभी देशवासी भाई बंधुओं को वसंत पंचमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं ।। ====> हमारे सनातन धर्म में वसंत पंचमी तिथि का अपना एक विशेष महत्व होता है। वसंत पंचमी तिथि पर ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा आराधना का विधान है। ऐसा कहा जाता है कि वसंत पंचमी के दिन पूजा आराधना करने से जीवन अज्ञानता रूपी अंधकार का नाश होता है और ज्ञान रूपी सूर्य का प्रकाश जीवन में फैलता है। हमारे हिन्दू धार्मिक शास्त्रों के अनुसार सृष्टि के रचनाकार ब्रम्हा जी ने इसी दिन वसंत पंचमी को ज्ञान, विद्या, संगीत की देवी माता सरस्वती को प्रकट किया था, इसी कारण वसंत पंचमी को मां सरस्वती के प्राकट्य उत्सव के रूप में मनाया जाता है। बसंत पंचमी को श्री पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिष पंचांग अनुसार माघ महिने के शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार बसंत पंचमी की यह तिथि 23 जनवरी 2026 शुक्रवार को प्रातःकाल 02:29 मिनट पर आरंभ होगी, और इसका समापन 24 जनवरी2026 शनिवार प्रातःकाल 01:45 मिनट पर होगा। बसंत पंचमी का यह पर्व 23 जनवरी 2026 शुक्रवार को मनाया जायेगा। धार्मिक मान्यता अनुसार बसंत पंचमी के दिन को अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है, इसका मतलब है कि बसंत पंचमी तिथि पर किसी भी शुभ काम जैसे कि विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, विद्या आरंभ आदि के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। बसंत पंचमी के दिन शिक्षा एवं संगीत से जुड़े हुए लोग देवी मां सरस्वती जी की पूजा आराधना करते हैं। इस दिन मां सरस्वती जी की आराधना करने से ज्ञान की प्राप्ति होती है। इस दिन विद्यालयों, कॉलेजों में मे शिक्षक और विद्यार्थी दोनों ही सरस्वती पूजा में शामिल होते हैं। प्राप्त जानकारी अनुसार इस दिन पूजा आराधना के लिए 05 घंटे 36 मिनट का शुभ समय मिलेगा। बसंत पंचमी 2026 का शुभ मुहूर्त 23 जनवरी शुक्रवार सुबह 07 बजकर 15 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा बसंत पंचमी का यह पर्व पूरे भारतवर्ष में विविध रूपों में मनाया जाता है। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्ञान, कला, शिक्षा, बुद्धि की देवी सरस्वती का प्राकट्य इसी दिन हुआ था। बसंत पंचमी पर पीले वस्त्र धारण करने की परंपरा धार्मिक और प्राकृतिक महत्व भी है। बसंत पंचमी का यह पर्व बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक भी माना जाता है, और इस समय बसंत ऋतु में फूल और प्रकृति भी पीले रंगों से भर जाती है, इस समय खेतों में सरसों के फूलों की सुगंध, पीला रंग, खुशहाली ऊर्जा ज्ञान सकरात्मका का संकेत माना जाता है। इस दिन पीले वस्त्र धारण कर मां सरस्वती को पीले फूल और भोग अर्पित किए जाते हैं, मां सरस्वती को पीला रंग प्रिय होता है।





