
🚨 सहारनपुर में स्मैक का काला साम्राज्य बेखौफ: पुलिस की लाख कोशिशों के बावजूद नशा तस्करी चरम पर, कासिम टोपा खुलेआम करता है गुणगान, बड़े तस्कर साजिद का नेटवर्क देहात कोतवाली क्षेत्र में फैला 🚨
सहारनपुर। जनपद सहारनपुर में स्मैक और नशे का काला कारोबार पुलिस की तमाम सख्त कार्रवाइयों के बावजूद थमने का नाम नहीं ले रहा है और हालात यह हैं कि कुछ नशा तस्कर अब इतने बेखौफ हो चुके हैं कि न तो उन्हें कानून का डर है और न ही पुलिस का कोई खौफ, जिससे साफ जाहिर होता है कि नशे का यह नेटवर्क अभी पूरी तरह जड़ से समाप्त नहीं हुआ है। बीते दिनों सहारनपुर पुलिस ने नशाखोरों और नशा तस्करों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाकर कई गिरफ्तारी और बरामदगी की, जिससे कुछ हद तक नशे के कारोबार पर रोक लगी, लेकिन इसके बावजूद अब भी ऐसे शातिर तस्कर सक्रिय हैं जो पुलिस की आंखों में धूल झोंकते हुए खुलेआम स्मैक की सप्लाई कर रहे हैं और नई पीढ़ी को अंधेरे की ओर धकेल रहे हैं। सामने आई तस्वीरों और वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति किस तरह चीख-चीखकर अपना गुणगान कर रहा है, उसके चेहरे पर किसी भी प्रकार का डर या पश्चाताप नजर नहीं आता, बल्कि उसका हौसला इस बात का संकेत देता है कि उसे अपने पीछे मजबूत नेटवर्क और संरक्षण का भरोसा है। बताया जा रहा है कि उक्त व्यक्ति का नाम कासिम टोपा है, जो सहारनपुर में सक्रिय एक बड़े स्मैक तस्कर साजिद के लिए काम करता है। सूत्रों के मुताबिक साजिद लंबे समय से स्मैक के अवैध कारोबार में लिप्त है और इसी काले धंधे के जरिए उसने अकूत संपत्ति खड़ी कर ली है, जबकि उसके लिए काम करने वाले छोटे-बड़े गुर्गे इलाके में नशे की सप्लाई चेन को संभालते हैं। कासिम टोपा इन्हीं में से एक अहम कड़ी बताया जा रहा है, जिसने देहात कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत बालाजी धाम के पास एक कमरा किराये पर ले रखा है, लेकिन उसका नशे का कारोबार पूरे कोतवाली देहात क्षेत्र में फैला हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में स्मैक की उपलब्धता आसानी से हो जाती है और युवा तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं, जिससे परिवार बर्बाद हो रहे हैं और सामाजिक ताना-बाना कमजोर पड़ता जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतना सब कुछ खुलेआम होने के बावजूद कासिम टोपा जैसे लोग निडर होकर घूम रहे हैं, जिससे आम जनता के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आखिर इन्हें किसका संरक्षण प्राप्त है। जानकारों का मानना है कि यदि ऐसे तत्वों को समय रहते सलाखों के पीछे नहीं पहुंचाया गया, तो यह न सिर्फ आने वाली युवा पीढ़ी को बर्बाद करेगा, बल्कि यह सहारनपुर पुलिस की साख और नशा विरोधी अभियान की सफलता पर भी सवाल खड़े करेगा। क्षेत्रवासियों का कहना है कि पुलिस को केवल छोटे नशाखोरों तक सीमित न रहकर पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना होगा, तभी इस काले कारोबार पर वास्तविक लगाम लग सकेगी। यह मामला अब केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक भविष्य का भी बन चुका है, क्योंकि नशे की गिरफ्त में फंसता युवा वर्ग किसी भी समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा होता है। जरूरत इस बात की है कि देहात कोतवाली क्षेत्र में सक्रिय ऐसे तस्करों पर विशेष निगरानी रखी जाए, उनके ठिकानों पर सघन छापेमारी हो और बड़े तस्कर साजिद जैसे लोगों की अवैध संपत्तियों की भी जांच कर कार्रवाई की जाए, ताकि नशे के इस काले साम्राज्य को जड़ से खत्म किया जा सके। अगर अब भी ढिलाई बरती गई, तो यह बेखौफ तस्कर कानून को खुली चुनौती देते रहेंगे और सहारनपुर की युवा पीढ़ी को धीरे-धीरे खोखला करते चले जाएंगे।
✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़, सहारनपुर
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