
निवाड़ी। जल संरक्षण और नदियों के पुनर्जीवन की दिशा में निरंतर कार्य कर रही बुंदेलखंड की जल सहेलियां एक ऐतिहासिक पहल करने जा रही हैं। 29 जनवरी से पचनद (पांच नदियों के संगम स्थल) जालौन से जल सहेलियों की यमुना यात्रा का शुभारंभ होगा, जिसे देश की सबसे बड़ी नदी यात्राओं में से एक माना जा रहा है।
500 किलोमीटर की पदयात्रा, दिल्ली तक पहुंचेगी यात्रा
इस यात्रा के अंतर्गत जल सहेलियां लगभग 500 किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए पचनद से दिल्ली स्थित बासुदेव घाट तक पहुंचेंगी। यात्रा का मुख्य उद्देश्य यमुना नदी को प्रदूषण से मुक्त करना, उसके प्रवाह को बढ़ाना और पुनर्जीवन के लिए जन-जागरूकता फैलाना है।
परमार्थ संस्था के मार्गदर्शन में वर्षों से सक्रिय
परमार्थ संस्था के मार्गदर्शन में बुंदेलखंड की जल सहेलियां वर्षों से जल संरक्षण, जल संचयन, नदी संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं।
बोरी बंधान, तालाबों का जीर्णोद्धार, जल चौपाल, नुक्कड़ नाटक और जन अभियान जैसे प्रयासों के जरिए उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में जल के महत्व को जन-जन तक पहुंचाया है।
गांव-शहरों में संवाद, समाज और सरकार से अपील
यमुना यात्रा के दौरान जल सहेलियां नदी किनारे बसे गांवों, कस्बों और शहरों में लोगों से संवाद करेंगी, जल संरक्षण के संदेश देंगी और सरकार व समाज से नदियों को बचाने की सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का आह्वान करेंगी।
देशभर के लिए बनेगी प्रेरणा
यह यात्रा न केवल बुंदेलखंड बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणास्रोत बनेगी और यह संदेश देगी कि यदि समुदाय और सरकार मिलकर आगे आएं, तो नदियों का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है।
यह जानकारी शिवानी सिंह, सुधा लक्ष्मी, सोनम और अंजली (जल सहेलियां) द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दी गई।





