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राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार 13 दिसंबर को प्रस्तावित राष्ट्रीय लोक अदालत को अब तक की सबसे प्रभावी, व्यापक और जन-केंद्रित पहल बनाने में जुट गई है। इस दिशा में मुख्य सचिव एसपी गोयल ने मंगलवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए।

तेज, सस्ता और त्वरित न्याय पर फोकस
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि लोक अदालत जनता के लिए त्वरित, सस्ता और सरल न्याय का अवसर है। इसलिए सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि अधिकतम मामलों का निस्तारण लोक अदालत के माध्यम से हो। इससे नागरिकों को न्यायालय की जटिल प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी और लंबित विवादों का समाधान आसान तरीके से संभव होगा।
ग्राम स्तर तक पहुंचेगी जानकारी
मुख्य सचिव ने जिलों, तहसीलों और ग्राम स्तर तक लोक अदालत की जानकारी पहुंचाने पर विशेष जोर दिया। इसके लिए
इंटरनेट मीडिया,
स्थानीय जनसंपर्क माध्यम,
तहसील प्रशासन द्वारा विशेष जन-जागरूकता अभियान
चलाए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकें।
बार एसोसिएशन के साथ बैठक अनिवार्य
उन्होंने निर्देश दिया कि सभी जिलों में बार एसोसिएशन पदाधिकारियों के साथ बैठक कर कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जाए, ताकि न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था मिलकर एक सफल और कुशल आयोजन कर सके।
2025 में अब तक 3 लोक अदालतें, देश में सबसे अधिक निस्तारण
बैठक में विशेष सचिव न्याय बाल कृष्ण एन. रंजन ने जानकारी दी कि वर्ष 2025 में अभी तक तीन राष्ट्रीय लोक अदालतों का आयोजन हो चुका है। इनमें कुल 3,35,21,803 मामलों का निस्तारण किया गया है, जो कि देश में सबसे अधिक है — यह प्रदेश के न्यायिक तंत्र की दक्षता का प्रमाण है।
अधिकारियों को जिम्मेदारी तय
सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि
विभागवार तैयारी की समीक्षा हो,
स्थानीय विवादों की सूची तैयार हो,
राजस्व, पुलिस, विद्युत, बैंक, नगर निकाय और अन्य विभाग सहयोग में जुटें,
ताकि 13 दिसंबर की लोक अदालत अधिकतम लोगों के लिए राहत का माध्यम बन सके।







