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श्री रामकथा में राम वनवास का प्रसंग सुन भावुक हुए श्रोता

कटनी, रीठी।‌। GANESH UPADHYAY VANDE BHARAT LIVE TV NEWS KATNI MP.

रीठी नगर के श्रीराम जानकी मंदिर प्रांगण में चल रही संगीतमय नौ दिवसीय श्रीराम कथा में रविवार को कैकेई द्वारा राजा दशरथ से दो वरदान मांगना राम बनवास दशरथ का पुत्र वियोग में प्राण त्यागना राजा सुमंत का बहुत ही करुण क्रंदन करना तथा भरत का श्रीराम से वापस अयोध्या लौटने की विनय करने का बहुत ही हृदय स्पर्शी वर्णन कथावाचक महंत सीताराम शरण जी महाराज के द्वारा कराया गया। सिद्वन धाम लोढ़ा पहाड़ से पधारे महंत सीताराम शरण जी महाराज ने श्री राम कथा में बहुत ही मार्मिक प्रसंग सुनाकर श्रोताओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि वास्तव में असुरों का संहार तथा सज्जनों की रक्षा के लिए ही मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने माता कैकई से राजा दशरथ से दो वरदान मांगने की विनती की जिसके तहत खुद को वनवास तथा भरत को राजगद्दी देना प्रमुख था।

माता कैकई का अतुलनीय योगदान जिसे भुलाया नहीं जा सकता

उन्होंने कहा कि अधर्म के विनाश के लिए और धर्म के प्रकाश के लिए प्रभु राम के संकल्प को पूरा करने में माता कैकई का अतुलनीय योगदान रहा जिसे भुलाया नहीं जा सकता है। उन्होंने राम बनवास का भी बहुत ही सुंदर प्रसंग सुनाया और संगीत के माध्यम से कहा कि वन को चले अवध के राम, अपनी अवधपुरी को करके बारंबार प्रणाम, राम लखन सिया वन को चले हैं छोड़ अयोध्या धाम वन को चले अवध के राम से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।

अच्छे कर्म आपके अगले जन्म के प्रारब्ध बन सकते हैं

कथा व्यास महंत सीताराम शरण जी ने कहा कि गुरु वशिष्ट की पत्नी अर्थात गुरु माता अदिति द्वारा भी राम बनवास के लिए जब माता कौशल्या से कैकई को दोषी ठहराने की बात की गई तो माता कौशल्या ने कैकई के महान चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि जिस माता की कोख से भरत जैसा पुत्र जन्म लेता है वह माता गलत हो ही नहीं सकती। उन्होंने कहा कि धरा धाम में अवतरित अवतारों ने हमेशा जनमानस को सीख दी है कि आपका प्रारब्ध कभी आपका पीछा नहीं छोड़ेगा। लिहाजा इस जन्म में किए जाने वाले अच्छे कर्म आपके अगले जन्म के प्रारब्ध बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व में राजा दशरथ को श्रवण कुमार के माता-पिता द्वारा यह अभिशाप दिया गया था कि जिस प्रकार से पुत्र के वियोग में अपने प्राण त्याग रहे हैं ठीक उसी प्रकार से पुत्र के वियोग में उन्हें भी अपने प्राण त्यागने पड़ेंगे जो भगवान राम के वनवास जाने के बाद सच साबित हुआ। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने सर्वशक्तिमान होते हुए भी विधाता के नियम को गलत नहीं होने दिया।

प्रभु राम ने भरत को सिखाया धर्म की मर्यादा का पाठ

इस दौरान कथा व्यास महंत सीताराम शरण जी ने दशरथ कैकई संवाद, दशरथ का प्राण त्यागना, मंत्री सुमंत का राम लक्ष्मण और सीता को सरयू पार कराना और वापस अयोध्या चलने का निवेदन करना आदि बहुत ही सुंदर वर्णन किए। इस दौरान उन्होंने राम और केवट का भी बहुत ही हृदय स्पर्शी वर्णन करते हुए सतयुग की उस घटना का भी जिक्र किया जिसमें केवट कछुआ के रूप में शेष शैया पर विराजमान भगवान विष्णु के चरण पखारना चाहता था लेकिन शेषनाग और माता लक्ष्मी उसे बार-बार हटा देते थे लेकिन भक्त की इच्छा को पूरा करने के लिए वही भगवान राम के रूप में और माता लक्ष्मी सीता के रूप में है जबकि शेष अवतार लक्ष्मण के रूप में और वह पूर्व जन्म के चरण छूने की अपनी अभिलाषा को पूर्ण कर लेता है। धरती को राक्षस जाति से मुक्त करने का संकल्प लेते हुए प्रभु राम वन को प्रस्थान करते हैं इधर राजा भरत पुनः वापस अयोध्या चलने का निवेदन करते हैं लेकिन प्रभु राम उन्हें क्षत्रिय धर्म की मर्यादा का पाठ पढ़ाते हुए अपने अपने धर्म के तहत अपने कर्तव्य को पूरा करने की सीख देते हैं।

बड़ी संख्या में उपस्थित रहे श्रोता

श्रीराम कथा के इस शुभ अवसर पर राजेन्द्र मिश्रा टीआई, रामकेत शास्त्री, विनोद पाण्डेय, नंद कुमार अग्रवाल, राजेश कंदेले, नंदराम सैनी, विपिन जैन, अनमोल अग्रवाल, मनोज शुक्ला, शिवचरण सकवार, बिंजन श्रीवास, छेदीलाल पटेल, सतोष पटेल शिक्षक, महेश बर्मन, राजू मूर्तिकार, अज्जू पटेल, ओमशंकर शुक्ला, रघुवीर साहू गणेश अग्रवाल, कमलकांत पाण्डे, महेंद्र पाण्डेय, नीतेश दुबे, चंदा सकवार, नरेश पाण्डेय, घोसी पटेल, डीलन सिंह, मुकेश विश्वकर्मा, प्रदीप कंदेंले, कंछेदी बाबा पटेल,निर्मल गुप्ता, अतुल गुप्ता, मुकेश पटेल, नत्थू पटेल, सतोष श्रीवास, सुशील पटेल शिक्षक, जितेंद्र पटेल, अंकुश सोनी, नारेंद्र सिंह,संजू दुबे,अजय सेन, मुन्ना बर्मन, उत्तम राय, मोंटू राय,पवन दुबे अनिल यादव सहित बड़ी संख्या में श्रोताओं उपस्थित थे।

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