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सावन मास में बीमारियों से बचना है तो सुधारें खान-पान, डॉ. सर्वेश कुमार शुक्ला आयुर्वेदिक कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. निशा शर्मा ने दिए खास टिप्स
13 Jul 2026, 11:00 PM • Vande Bharat Live TV News


बहराइच।
रिपोर्ट बुद्धेश मणि पाण्डेय जिला प्रभारी।
सावन मास में बीमारियों से बचना है तो सुधारें खान-पान, डॉ. सर्वेश कुमार शुक्ला आयुर्वेदिक कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. निशा शर्मा ने दिए खास टिप्स
सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही जहां चारों ओर उत्साह का माहौल है, वहीं मौसम में अचानक आए इस बदलाव (वर्षा ऋतु) के कारण मौसमी बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ने लगा है। आयुर्वेद के विशेषज्ञों का मानना है कि इस मौसम में सेहत के प्रति थोड़ी सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है।
‘डॉ. सर्वेश कुमार शुक्ला आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल बहराइच’ की स्वास्थ्यवृत्त एवं योग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. निशा शर्मा (MD) ने सावन मास में स्वस्थ रहने के लिए आयुर्वेदिक ‘ऋतुचर्या’ और योग के महत्व पर विशेष जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि इस मौसम में वातावरण में नमी बढ़ने के कारण इंसानी शरीर की पाचन शक्ति (जठराग्नि) काफी कमजोर हो जाती है, जिससे पेट के रोग और वात से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगती हैं।
सावन में भूलकर भी न खाएं हरी पत्तेदार सब्जियां
डॉ. निशा शर्मा ने चौंकाने वाला तथ्य साझा करते हुए बताया कि अक्सर सेहत के लिए अच्छी मानी जाने वाली हरी पत्तेदार सब्जियां (साग) सावन के महीने में गंभीर रूप से बीमार कर सकती हैं। उन्होंने कहा, “इस मौसम में अत्यधिक नमी के कारण पत्तों पर सूक्ष्म जीव, बैक्टीरिया और कीड़े पनपने लगते हैं। इसलिए आयुर्वेद के ‘स्वास्थ्यवृत्त’ सिद्धांतों के अनुसार सावन में हरी सब्जियों से परहेज करना चाहिए।”
पानी उबालकर पिएं और बासी भोजन से बचें
कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर ने स्वास्थ्य रक्षा के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
गुनगुना पानी: जल जनित रोगों (Water-borne diseases) से बचने के लिए हमेशा पानी को उबालकर और छानकर ही पिएं।
ताजा भोजन: सावन में केवल गरम और सुपाच्य भोजन ही लें। बासी भोजन शरीर में ‘वात’ दोष को बढ़ाता है, जिससे जोड़ों का दर्द शुरू हो सकता है।
दिन में सोने से परहेज: वर्षा ऋतु में दिन में सोने से कफ बढ़ता है और पाचन क्रिया और अधिक सुस्त हो जाती है।
योग और प्राणायाम से मजबूत होगी जठराग्नि
डॉ. शर्मा के अनुसार, कमजोर पड़ चुकी पाचन क्रिया को दुरुस्त करने के लिए दवाओं से बेहतर योग का सहारा लेना है। उन्होंने सावन के महीने में नियमित रूप से वज्रासन, पवनमुक्तासन और पश्चिमोट्टानासन करने की सलाह दी है। ये आसन पेट की गैस को दूर कर पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं। इसके साथ ही, त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) को संतुलित रखने के लिए रोजाना अनुलोम-विलोम और कपालभाति प्राणायाम करना बेहद लाभकारी साबित होगा।
संक्षिप्त संदेश:
डॉ. निशा शर्मा ने निष्कर्ष देते हुए कहा कि यदि आम जनमानस सावन के महीने में प्रकृति के नियमों के अनुसार अपने आहार-विहार को बदल ले और योग को जीवन का हिस्सा बनाए, तो बिना किसी दवा के पूरे चातुर्मास में पूरी तरह स्वस्थ रहा जा सकता है।
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