
लगातार तेज बरसात के चलते जनता के मकान ढह जाते हैं और जब कोई पीड़ित परिवार शासन प्रशासन के पास ये उम्मीद लेकर जाता है की मुआवजे के नाम पर कुछ आर्थिक सहायता राशि मिलेंगी तो हल्का पटवारी से लेकर उच्च अधिकारियों तक इतनी शालीनता से कानून सिखाना शुरू कर देते है मानो विधि के विधान के राचियाता यही हो जनता को अच्छे बुरे कर्मो का दिव्य दृष्टि से सब कुछ घर बैठे ही देख लेते हैं, आपको बता दें ऐसा ही मामला अलवर जिले के कठूमर विधानसभा क्षेत्र के गांव रेटा का सामने आया जहां दो अलग अलग लोगो के मकान लगातार तेज बरसात के चलते भरभराकर गिर गए लेकिन प्रार्थी द्वारा सूचित करने पर हल्का पटवारी ने कानून सिखाने की प्रक्रिया शुरू कर दी और एक ही पल में बजाय उचित सहायता के प्रयास के उच्च स्तर तक के नियम कानून का पाठ पढ़ा दिया खैर बेचारा करता भी क्या क्योंकि सरकार द्वारा एक और तो आम जन को इतने कोरे आश्वासन दे रखे हैं की मनुष्य अपनी किसी भी क्षति के उपरांत कुछ दिन के लिए उस संकट को भुलाकर छाती पर पत्थर रखकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने लग जाता हैं इस आशा की किरण के साथ की मुझे मुआवजे के नाम से कुछ आर्थिक सहायता प्राप्त हो जायेगी लेकिन उस बेचारे को क्या पता की ये योजना नियम कानून कहने मात्र के लिए है धरातल पर पूरा करने के लिए नही ,और कोई पूछने लग जाए तो इस तरह संतुष्ट कर देंगे ,की घूंसा मारकर पसली भी तोड़ दे और दर्द होने पर रो भी ना सके ,अरे भाई कास आपने पट्टा कराया होता मकान का , अरे भाई वीडियो फोटो लोकेशन,टाइम दिनांक के साथ खिचवाया होता ,रद्द हो गया अरे भैया मकान गिरा उसमे कोई पशु या। आदमी दब के मर जाता तो शायद क्लेम की संभावना और बढ़ जाती,कुछ तो शर्म करो। आखिर क्या होगा इस भ्रष्ट शासन प्रशासन का और इतने कानून तो उसको बताए जा रहे जो दिन आंधी तुफान अपना हर काम छोड़कर वो राष्ट के चौथे स्तंभ के सिपाही हर पल की खबर लोगो इनके बारे में पहुंचाते हैं अगर आज राष्ट का चौथा स्तंभ अपना काम बंद कर दे तो इस शासन प्रशासन की टाय टाय फिश होने में एक पल ना लगे



