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बड़ी खबर | हाईकोर्ट से सीतापुर कांग्रेस कमेटी को झटका

18 Aug 2026, 07:09 PM • Vande Bharat Live TV News
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🚨 बड़ी खबर | हाईकोर्ट से सीतापुर कांग्रेस कमेटी को झटका

नजूल संपत्ति विवाद में अंतरिम राहत से इनकार, 1971 की ₹320 की रसीद बनी मुख्य दस्तावेज

 

हाईकोर्ट ने सीतापुर जिला कांग्रेस कमेटी की अंतरिम राहत की मांग को खारिज कर दिया है।

मामला सीतापुर के तामसेनगंज इलाके में स्थित प्लॉट नंबर 244/1 से जुड़ा है, जहां ऐतिहासिक घंटाघर भवन के ऊपरी हिस्से में कांग्रेस कार्यालय संचालित होने की बात सामने आई है।

अदालत में कांग्रेस की ओर से यह दावा किया गया कि वह लंबे समय से, यानी वर्ष 1971 से इस परिसर का इस्तेमाल कर रही है।

लेकिन सुनवाई के दौरान दस्तावेजों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हुआ।


🔴 1971 की सिर्फ ₹320 की रसीद!

अब इस मामले की सबसे बड़ी बात।

कांग्रेस की ओर से अपने कब्जे के समर्थन में वर्ष 1971 में ₹320 किराया जमा करने की रसीद पेश की गई।

लेकिन अदालत के सामने सवाल यह था कि क्या सिर्फ दशकों पुराने कब्जे और एक पुरानी किराया रसीद के आधार पर सरकारी नजूल संपत्ति पर वैध अधिकार साबित किया जा सकता है?

रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता की ओर से ऐसा कोई आवंटन पत्र, वैध लीज, किरायानामा या अन्य आधिकारिक दस्तावेज पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि विवादित सरकारी जमीन विधिवत कांग्रेस को आवंटित की गई थी।


🔴 55 साल तक किराया जमा हुआ या नहीं?

मामले में एक और अहम तथ्य सामने आया।

अदालत के समक्ष यह बात रखी गई कि वर्ष 1971 के बाद लंबे समय तक किराया भुगतान का कोई प्रमाण पेश नहीं किया जा सका।

यानी जिस संपत्ति को लेकर कांग्रेस की ओर से लंबे समय से कब्जे का दावा किया जा रहा है, उसके संबंध में पिछले करीब 55 वर्षों के किराया भुगतान का रिकॉर्ड अदालत के सामने नहीं रखा जा सका।

यही बिंदु इस पूरे विवाद को और गंभीर बनाता है।


⚖️ हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

अदालत ने यह स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर लंबे समय तक कब्जा बने रहने मात्र से कब्जा वैध नहीं हो जाता।

यदि सरकारी संपत्ति पर कब्जे के पीछे वैध आवंटन, लीज या अधिकार साबित करने वाला आधिकारिक दस्तावेज नहीं है, तो केवल पुराना कब्जा अपने आप में कानूनी अधिकार पैदा नहीं करता।

यही वजह रही कि हाईकोर्ट ने कांग्रेस कमेटी को फिलहाल अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।


🔥 नगर पालिका के आदेश को चुनौती

दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत नगर पालिका प्रशासन की कार्रवाई से हुई।

रिपोर्टों के मुताबिक, सीतापुर नगर पालिका परिषद के प्रभारी अधिशासी अधिकारी की ओर से विवादित संपत्ति के राजस्व रिकॉर्ड से कांग्रेस का नाम हटाने और परिसर खाली कराने का आदेश दिया गया था।

इसी आदेश को चुनौती देते हुए सीतापुर जिला कांग्रेस कमेटी हाईकोर्ट पहुंची।

कांग्रेस की ओर से अपने पुराने कब्जे और उपयोग का हवाला दिया गया, जबकि राज्य की ओर से संपत्ति को सरकारी नजूल भूमि बताते हुए कब्जे को वैध न मानने का पक्ष रखा गया।


🚨 अब आगे क्या होगा?

हाईकोर्ट ने फिलहाल मामले को खत्म नहीं किया है।

अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित पक्षों को तीन सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

इसके बाद याचिकाकर्ता को दो सप्ताह में रिजॉइंडर दाखिल करने का समय दिया जाएगा।

और इस मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।


🎙️ बड़ा सवाल — क्या सिर्फ पुराना कब्जा काफी है?

इस पूरे मामले ने एक बड़ा कानूनी सवाल भी खड़ा कर दिया है।

अगर किसी सरकारी नजूल संपत्ति पर कोई संस्था या संगठन दशकों से कब्जे में है, तो क्या सिर्फ लंबे समय से वहां मौजूद रहने से उस कब्जे को कानूनी अधिकार माना जा सकता है?

हाईकोर्ट के सामने फिलहाल जवाब साफ दिखाई देता है—सिर्फ लंबे समय का कब्जा पर्याप्त नहीं है; वैध अधिकार का दस्तावेज भी जरूरी है।

हालांकि, यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है और अंतिम फैसला आगे की सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।


📰वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ की खास रिपोर्ट

सीतापुर का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विवाद किसी निजी जमीन का नहीं, बल्कि नजूल सरकारी संपत्ति से जुड़ा है।

एक तरफ वर्षों पुराने कब्जे का दावा है, दूसरी तरफ प्रशासनिक रिकॉर्ड और वैध आवंटन से जुड़े दस्तावेजों का सवाल।

और अब हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है।

यानी फिलहाल सीतापुर कांग्रेस कमेटी को अदालत से राहत नहीं मिली है।

मामले की अगली सुनवाई अब 1 अक्टूबर 2026 को होगी।

वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ इस मामले में आगे होने वाली हर कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई पर अपनी नजर बनाए रखेगा।


⚠️ महत्वपूर्ण

यह रिपोर्ट उपलब्ध न्यायिक/मीडिया रिपोर्टों और अदालत में सामने आए पक्षों पर आधारित है। हाईकोर्ट ने मामले का अंतिम निर्णय अभी नहीं दिया है। किसी भी पक्ष के अधिकार और दावे पर अंतिम स्थिति न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।

📰वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़  — सच के साथ, हर पल आपके साथ।

✍️ विशेष रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक: वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
सहारनपुर

📞 समाचार, सूचना एवं संपर्क: 8217554083

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