बस्ती सदर रेंज में हरियाली का कत्ल: गोटवा में सागौन के पेड़ों की अंधाधुंध कटान, विभाग बना मूकदर्शक

अजीत मिश्रा (खोजी)
हरियाली का कत्ल और महकमे की चुप्पी: गोटवा में सागौन के पेड़ों की अंधाधुंध कटान पर उठ रहे गंभीर सवाल
- गोटवा में लकड़ी माफियाओं के हौसले बुलंद: गैस एजेंसी के पास धड़ल्ले से कटे सागौन, रेंजर और दरोगा की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
- सूचना पर भी गहरी नींद में सोया वन विभाग: गोटवा में हरे पेड़ों की अवैध कटान पर उड़ाका दल की सिर्फ ‘लीपापोती’
वन विभाग की मिलीभगत से चल रहा कटान का खेल? - गोटवा में बेशकीमती सागौन के कत्लेआम पर डीएफओ की कार्रवाई का इंतजार
बस्ती।। गोटवा बाजार में पर्यावरण की हत्या: दो दिनों तक कटते रहे पेड़, फोन पर सूचना के बाद भी नदारद रहे जिम्मेदार कर्मचारी
बस्ती सदर वन रेंज के अंतर्गत गोटवा बाजार क्षेत्र में लकड़ी माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि दिन के उजाले में भी हरे-भरे सागौन के पेड़ों का कत्लेआम धड़ल्ले से जारी है। भारत गैस एजेंसी के पास पिछले दो दिनों से लगातार पेड़ों की कटान हो रही थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। यह घटना केवल एक अवैध कटान का मामला नहीं है, बल्कि वन विभाग के संरक्षण में पनप रहे उस गहरे भ्रष्टाचार का आईना है, जहां पर्यावरण की कीमत पर जेबें भरी जा रही हैं।
स्थानीय लोगों द्वारा लगातार सूचना देने के बावजूद हल्का वन दरोगा और वन रक्षक ने मौके पर जाने की जहमत तक नहीं उठाई। जब तक लकड़ी ठेकेदार बेशकीमती सागौन के पेड़ों को काटकर मौके से गायब करने में सफल हो चुके थे, तब तक विभाग के नुमाइंदे गहरी नींद में सोते रहे। हालात यह हैं कि जांच के नाम पर भेजी गई उड़ाका दल (फ्लाइंग स्क्वाड) की टीम भी केवल कागजी खानापूर्ति और लीपापोती में जुटी रही। क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि रेंजर बस्ती सदर की कथित मिलीभगत और फुटहिया चौकी प्रभारी की संदिग्ध चुप्पी के बिना इस तरह खुलेआम अवैध कटान होना असंभव है।
वन विभाग की यह कार्यप्रणाली महकमे की साख पर बड़ा बट्टा लगा रही है। जब जनता खुद आगे बढ़कर वनों की सुरक्षा के लिए आवाज उठा रही है, तब विभाग के जिम्मेदार कर्मचारी ही माफियाओं की ढाल बनकर खड़े नजर आ रहे हैं। क्या वन विभाग के इन कर्मचारियों का काम सिर्फ शिकायतों को नजरअंदाज करना और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना रह गया है?
मामला तूल पकड़ने और उच्चाधिकारियों तक शिकायत पहुंचने के बाद डीएफओ ने जांच कराकर नियम विरुद्ध कटान पाए जाने पर लकड़ी ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि, कागजी आश्वासनों से कटे हुए हरे पेड़ वापस नहीं लौटेंगे। यदि इस बार भी लीपापोती कर निचले स्तर के भ्रष्ट कर्मचारियों और रसूखदार लकड़ी ठेकेदारों को बचाने की कोशिश की गई, तो जनता का महकमे से बचा-कुचा भरोसा भी पूरी तरह उठ जाएगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि डीएफओ की जांच में क्या सच सामने आता है और क्या वाकई दोषियों पर कोई ठोस गाज गिरती है या यह मामला भी फाइलों में ही दफन हो जाएगा।
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