कुछ ही दिनों में प्रभारी अधिष्ठाता (डीन) की छुट्टी; गड़चिरोली मेडिकल कॉलेज की जिम्मेदारी नागपुर के डॉ. मोहम्मद फैजल को सौंपी गई

समीर वानखेड़े, ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट
गड़चिरोली में लंबे संघर्ष और वर्षों की मांग के बाद शासकीय मेडिकल कॉलेज शुरू हुआ था। हालांकि, स्थापना के समय से ही यह संस्थान प्रशासनिक बदलावों, विवादों और अव्यवस्था को लेकर लगातार चर्चा में बना हुआ है।
पूर्व प्रभारी अधिष्ठाता डॉ. टेकाड़े के विवादास्पद कार्यकाल के बाद कुछ ही दिन पहले डॉ.
राजेंद्र सुरपाम को डीन पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब उनसे भी यह प्रभार वापस ले लिया गया है, जिससे मेडिकल कॉलेज के प्रशासन में एक बार फिर बड़ा फेरबदल हुआ है।
महाराष्ट्र सरकार के चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, गड़चिरोली शासकीय मेडिकल कॉलेज का अतिरिक्त प्रभार डॉ. राजेंद्र सुरपाम से हटाकर नागपुर के इंदिरा गांधी शासकीय मेडिकल कॉलेज (IGGMCH) के अस्थिरोग (Orthopedics) विभाग के प्रोफेसर डॉ.
मोहम्मद फैजल अ. सलीम को अगले आदेश तक अस्थायी रूप से सौंपा गया है।
डॉ. सुरपाम से इतने कम समय में यह जिम्मेदारी क्यों वापस ली गई, इसका कोई स्पष्ट कारण सरकारी आदेश में दर्ज नहीं है।
इसके चलते प्रशासनिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह फैसला डॉ.
सुरपाम के कामकाज को लेकर मिली शिकायतों के कारण लिया गया है या इसके पीछे कोई अन्य प्रशासनिक वजह है? हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी कोई कारण सामने नहीं आया है।
मेडिकल कॉलेज आखिर किसके लिए? गड़चिरोली जैसे सुदूर और आदिवासी बहुल जिले में अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने, स्थानीय छात्रों को चिकित्सा शिक्षा का अवसर देने और नागरिकों को इलाज के लिए बड़े शहरों के चक्कर न काटने पड़ें—इसी उद्देश्य से इस मेडिकल कॉलेज के लिए बड़ा जन-संघर्ष हुआ था।
लिहाजा, जिलावासियों की इस संस्थान से भारी उम्मीदें हैं। लेकिन हालिया घटनाक्रम को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मेडिकल कॉलेज का मूल उद्देश्य पीछे छूट गया है और अधिकारियों का आंतरिक संघर्ष, आरोप-प्रत्यारोप तथा प्रशासनिक खींचतान हावी हो रही है।
इससे पहले भी कॉलेज परिसर में विकास कार्यों, बुनियादी सुविधाओं की कमी और निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। लगभग ₹28 करोड़ के विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और घटिया निर्माण की शिकायतें मिलने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी अविश्यांत पंडा ने खुद निरीक्षण कर जांच के आदेश दिए थे।
ऐसी स्थिति में बार-बार प्रभारी अधिष्ठाता बदले जाने से अब जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिलावासियों का कहना है कि जब गड़चिरोली को यह मेडिकल कॉलेज इतनी मशक्कत के बाद मिला है, तो फिर इसका प्रशासन स्थिर क्यों नहीं हो पा रहा?
अब नए प्रभारी अधिष्ठाता डॉ. मोहम्मद फैजल अ.
सलीम पर अपने मूल पद के साथ-साथ गड़चिरोली का प्रभार संभालने की जिम्मेदारी है। देखना होगा कि उनके नेतृत्व में संस्थान का कामकाज पटरी पर आता है या नहीं और क्या मरीज सेवा, शिक्षा तथा बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता मिलती है या नहीं।
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