जिला संवाददाता — नंदकिशोर सिंह मेरावी (बालाघाट )
बालाघाट, 12 सितंबर 26। जिले में धान की फसल पर कीट एवं रोगों के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए कृषि विभाग ने खेतों की निगरानी तेज कर दी है। उपसंचालक कृषि फूल सिंह मालवीय ने विभागीय अधिकारियों के साथ कटंगी, खैरलांजी और वारासिवनी विकासखंडों का सघन भ्रमण कर धान की फसलों का निरीक्षण किया। उन्होंने किसानों को फसल की वर्तमान अवस्था में यूरिया का उपयोग नहीं करने तथा कीट-रोग नियंत्रण के लिए जैविक उपाय अपनाने की सलाह दी।
निरीक्षण के दौरान कई खेतों में तना छेदक, पत्ती लपेटक एवं माहू जैसे रस चूसक कीटों के साथ ब्लास्ट और शीथ ब्लाइट रोग के लक्षण पाए गए। उपसंचालक कृषि ने किसानों को बताया कि पत्ती लपेटक एवं तना छेदक के नियंत्रण के लिए स्थानीय स्तर पर तैयार अग्न्यास्त्र या ब्रह्मास्त्र का 6 लीटर घोल 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव किया जा सकता है। पत्ती लपेटक की इल्लियों को नियंत्रित करने के लिए खेत में रस्सी चलाने की विधि भी अपनाई जा सकती है।
माहू एवं अन्य रस चूसक कीटों के नियंत्रण के लिए नीमास्त्र अथवा दशपर्णी अर्क के छिड़काव की सलाह दी गई। वहीं ब्लास्ट जैसे फफूंदजनित रोगों की रोकथाम के लिए प्राकृतिक फफूंदनाशक का उपयोग करने तथा खेत एवं मेड़ों की साफ-सफाई बनाए रखने पर जोर दिया गया।
वर्तमान अवस्था में यूरिया से बचें
उपसंचालक कृषि मालवीय ने किसानों को विशेष रूप से समझाइश दी कि धान की वर्तमान अवस्था में खेतों में यूरिया का उपयोग नहीं करें। उन्होंने बताया कि अधिक मात्रा में नाइट्रोजन देने से पौधों की पत्तियां अत्यधिक कोमल हो जाती हैं, जिससे कीट एवं रोगों का प्रकोप बढ़ने की संभावना रहती है। किसानों से फसल की नियमित निगरानी करने और लक्षण दिखाई देने पर तत्काल कृषि अधिकारियों से मार्गदर्शन लेने को कहा गया।
उन्होंने कहा कि जैविक कीटनाशकों एवं प्राकृतिक उपायों के उपयोग से खेती की लागत कम करने के साथ पर्यावरण और मित्र कीटों को भी सुरक्षित रखा जा सकता है। निरीक्षण के दौरान सहायक संचालक कृषि राजेश खोबरगाड़े सहित संबंधित ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने किसानों को खेतों में कीट-रोग की नियमित निगरानी और समय पर प्रबंधन उपाय अपनाने की जानकारी दी।