मोहन राज’ में 50 लाख से अधिक हितग्राहियों की जमीन की फ्री रिजिस्ट्री… RI और प्रभारी RI को मिला सब-रजिस्ट्रार का अधिकार

इंदौर / तेजकुमार जारवाल / वंदे भारत लाइव टीवी / न्यूज़/
ज़िला रिपोर्टर, इंदौर, मध्य प्रदेश/
मध्यप्रदेश में आबादी की जमीन पर वर्षों से काबिज लोगों को अब उनके संपत्ति अधिकार का कानूनी दस्तावेज मिल सकेगा। राज्य सरकार ने स्वामित्व योजना के तहत आबादी भूमि की मुफ्त रजिस्ट्री कराने की तैयारी पूरी कर ली है।
17 सितंबर 2026 से प्रदेश में मुफ्त रजिस्ट्री अभियान शुरू किया जाएगा। इसके तहत 50 लाख से अधिक हितग्राहियों को जमीन और आवास का वैधानिक मालिकाना हक देने का लक्ष्य रखा गया है।
50 लाख से ज्यादा हितग्राहियों को मिलेगा लाभ
स्वामित्व योजना के पहले चरण में करीब 48.80 लाख हितग्राहियों को चिन्हित किया गया था। अब लाभार्थियों की संख्या 50 लाख से अधिक होने की जानकारी सामने आई है।
सरकार का उद्देश्य लंबित रजिस्ट्रियों को तेजी से पूरा करना और ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी की जमीन पर रहने वाले लोगों को उनके संपत्ति अधिकार का प्रमाण उपलब्ध कराना है। RI और प्रभारी RI को मिला सब-रजिस्ट्रार का अधिकार
रजिस्ट्री की प्रक्रिया को गति देने के लिए सरकार ने पंजीयन अधिकारियों के अधिकारों का विस्तार किया है।
राजस्व निरीक्षक (RI) और प्रभारी राजस्व निरीक्षक को उनके निर्धारित क्षेत्र में सब-रजिस्ट्रार की शक्तियां दी गई हैं। पंजीयन अधिनियम 1908 की धारा 6 के तहत उन्हें यह अधिकार प्रदान किया गया है।
इसके जरिए वे स्वामित्व योजना के तहत आबादी भूमि की मुफ्त रजिस्ट्री कर सकेंगे। इसी तरह पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सहायक विकास विस्तार अधिकारी और पंचायत समन्वय अधिकारी को उनके पदस्थ जिले के जनपद क्षेत्र में उप-पंजीयक के रूप में अधिकृत किया गया है।
तहसीलदारों को भी स्वामित्व योजना के तहत मुफ्त रजिस्ट्री करने की जिम्मेदारी पहले ही दी जा चुकी है, रोज 40 रजिस्ट्रियों का टारगेट
योजना को तेजी से लागू करने के लिए राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार ने मुख्यमंत्री डॉ.
मोहन यादव और मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल के समक्ष इसका प्रेजेंटेशन दिया था। रजिस्ट्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए अधिकार प्राप्त अधिकारी-कर्मचारियों को प्रतिदिन कम से कम 40 रजिस्ट्रियां पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किए जाने की जानकारी है।
संबंधित क्षेत्र के हल्का पटवारी का नाम रजिस्ट्रार के तौर पर दर्ज रहने की व्यवस्था भी की गई है। पटवारियों ने जताई चिंता
इस व्यवस्था को लेकर पटवारियों की ओर से विरोध की बात सामने आई है।
पटवारियों का कहना है कि भविष्य में यदि किसी जमीन की रजिस्ट्री को लेकर विवाद उत्पन्न होता है तो कानूनी कार्रवाई या विवाद की स्थिति में उन्हें भी अनावश्यक रूप से कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। मुफ्त रजिस्ट्री से मिलेगा मालिकाना हक
सरकार का उद्देश्य स्वामित्व योजना के माध्यम से ग्रामीण आबादी को बिना शुल्क मालिकाना दस्तावेज उपलब्ध कराना है।
इसके साथ ही बड़ी संख्या में लंबित रजिस्ट्रियों को तेजी से पूरा करने की रणनीति तैयार की गई है। अब 17 सितंबर 2026 से शुरू होने वाले इस अभियान पर नजर रहेगी कि प्रशासनिक स्तर पर इसे कितनी तेजी से लागू किया जाता है और 50 लाख से अधिक संभावित हितग्राहियों को अपने घर और जमीन का कानूनी मालिकाना हक कितनी आसानी से मिल पाता है।
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