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झालावाड़ में दिखी विशाल टसर सिल्क मॉथ, जैव-विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण रिकॉर्ड सहायक आचार्य डॉ. कमलेश कुमार वर्मा ने किया दुर्लभ रात्रिचर पतंगे का अवलोकन व फोटोग्राफिक रिकॉर्ड

18 Sep 2026, 04:51 PM • Vande Bharat Live TV News
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झालावाड़ में दिखी विशाल टसर सिल्क मॉथ, जैव-विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण रिकॉर्ड सहायक आचार्य डॉ. कमलेश कुमार वर्मा ने किया दुर्लभ रात्रिचर पतंगे का अवलोकन व फोटोग्राफिक रिकॉर्ड - JHALAWAR, राजस्थान

झालावाड़ 18 सितंबर। झालावाड़ जिले की समृद्ध जैव-विविधता में एक और आकर्षक प्रजाति का रिकॉर्ड सामने आया है। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, झालावाड़ के सहायक आचार्य (जूलॉजी) डॉ. कमलेश कुमार वर्मा ने क्षेत्र में बड़े आकार के रेशम उत्पादक पतंगों के समूह से संबंधित टसर सिल्क मॉथ का अवलोकन कर उसका फोटोग्राफिक रिकॉर्ड तैयार किया है।

नेत्र-जैसे चिह्नों ने खींचा ध्यान
फोटो में दिखाई दे रहे इस पतंगे के दोनों पंखों पर स्पष्ट नेत्र-जैसे चिह्न नजर आते हैं। गुलाबी-भूरे से तांबई रंग, चौड़ा पंख-विस्तार और विशिष्ट आकृति इसे सामान्य छोटे पतंगों से अलग पहचान देते हैं। यह पतंगा लेपिडोप्टेरा गण और सेटरनिडी (Saturniidae) कुल के एन्थेरिया (Antheraea) वंश से संबंधित बताया गया है। उपलब्ध टैक्सोनॉमिक स्रोतों में एन्थेरिया पेफिया को टसर सिल्क मॉथ के रूप में दर्ज किया गया है, जबकि भारतीय टसर सिल्क से संबंधित एन्थेरिया मिलिटा भी इसी समूह की महत्वपूर्ण प्रजाति है।

प्राकृतिक रेशम संसाधन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण
टसर सिल्क मॉथ केवल अपनी आकर्षक बनावट के कारण ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि भारत के प्राकृतिक रेशम संसाधनों में भी इसकी विशेष भूमिका है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुसार भारतीय टसर सिल्कवर्म एन्थेरिया मिलिटा उष्णकटिबंधीय भारत की प्राकृतिक जीव-जगत का हिस्सा है। इसके 40 से अधिक इको-रेसेस का उल्लेख मिलता है तथा अर्जुन, आसन और साल सहित विभिन्न वृक्ष इसकी पोषक वनस्पतियों में शामिल हैं।

मानसून के बाद अनुकूल होता है वातावरण
डॉ. वर्मा के अनुसार झालावाड़ का भौगोलिक एवं वनस्पति परिदृश्य विभिन्न प्रकार के कीटों के लिए अनुकूल आवास उपलब्ध कराता है। मानसून के बाद वनस्पतियों की वृद्धि, वातावरण में आर्द्रता और उपलब्ध पोषक पौधे रात्रिचर लेपिडोप्टेरा की विविधता को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक हो सकते हैं।

मोथ जैव-विविधता के अध्ययन में मिलेगा आधार
टसर सिल्क मॉथ का यह अवलोकन झालावाड़ क्षेत्र में रात्रिचर लेपिडोप्टेरा की जैव-विविधता के वैज्ञानिक अध्ययन की दिशा में उपयोगी रिकॉर्ड साबित हो सकता है। ऐसे फोटोग्राफिक रिकॉर्ड भविष्य में क्षेत्र में मोथ प्रजातियों की विविधता, मौसमी प्रचुरता तथा उनके पोषक पौधों से संबंधों के अध्ययन के लिए आधारभूत जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं।

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