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श्री वीरभद्र मंदिर में दो संतों का महामंडलेश्वर पद पर भव्य पट्टाभिषेक

30 Sep 2026, 10:19 AM • Vande Bharat Live TV News
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श्री वीरभद्र मंदिर में दो संतों का महामंडलेश्वर पद पर भव्य पट्टाभिषेक - HARIDWAR, उत्तराखंड

श्री वीरभद्र मंदिर में दो संतों का महामंडलेश्वर पद पर भव्य पट्टाभिषेक

संत समाज ने दी शुभकामनाएं, सनातन धर्म की वैश्विक चेतना को आगे बढ़ाने का लिया संकल्प

हरिद्वार-ऋषिकेश। प्रसिद्ध श्री वीरभद्र मंदिर परिसर में पंचायती श्री निरंजनी अखाड़े की ओर से दो संतों को महामंडलेश्वर पद से विभूषित करने के लिए भव्य पट्टाभिषेक समारोह आयोजित किया गया। धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में वैदिक मंत्रोच्चार और संत परंपराओं के अनुरूप संपन्न हुए समारोह में संत-महापुरुषों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की शोभा बढ़ाई।

समारोह में महादेवानंद पुरी जी महाराज एवं कृष्णानंद पुरी जी महाराज को विधिवत महामंडलेश्वर पद पर विभूषित किया गया। संत समाज ने दोनों महामंडलेश्वरों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक जीवन और सनातन धर्म की सेवा के लिए मंगलकामनाएं कीं।

इस अवसर पर पंचायती श्री निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं पंचायती श्री निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी जी महाराज, महंत सचिव राजगिरि जी महाराज, महंत स्वामी दर्शन भारती जी महाराज सहित अनेक संत-महापुरुष उपस्थित रहे।

समारोह में स्वामी दर्शन भारती जी महाराज का भी विशेष पट्टाभिषेक संपन्न हुआ। आयोजकों के अनुसार उन्होंने बौद्ध धर्म की परंपरा से अलग होकर सनातन धर्म की शरण ग्रहण की और सनातन परंपरा में अपनी आस्था व्यक्त की। संत समाज की उपस्थिति में उन्हें संत परंपरा के अनुरूप सम्मान प्रदान किया गया।

विश्वभर में फैल रही सनातन धर्म की चेतना

समारोह में संत-महापुरुषों ने कहा कि सनातन धर्म की संत परंपरा सदियों से मानवता, आध्यात्मिकता, सेवा और सदाचार का संदेश देती आई है। आज भारत की सीमाओं से आगे बढ़कर विभिन्न देशों में भी सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति लोगों की रुचि बढ़ रही है। जापान सहित कई देशों में सनातन संस्कृति से जुड़े आध्यात्मिक केंद्रों और संत परंपराओं के माध्यम से धर्म एवं संस्कृति का संदेश पहुंच रहा है।

संतों ने कहा कि अलग-अलग देशों में संतों और आध्यात्मिक आचार्यों का सक्रिय होना सनातन धर्म की व्यापक स्वीकार्यता और वैश्विक आध्यात्मिक चेतना को दर्शाता है। महामंडलेश्वर जैसे पद केवल सम्मान का प्रतीक नहीं, बल्कि धर्म, संस्कृति, सेवा और समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी भी हैं।

उन्होंने कहा कि संतों का दायित्व है कि वे सनातन धर्म के मूल संदेश—मानव सेवा, सद्भाव, सत्य, करुणा और आध्यात्मिक उन्नति—को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाएं और युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करें।

पट्टाभिषेक समारोह के दौरान श्री वीरभद्र मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने संत-महापुरुषों के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम का समापन संत-महापुरुषों के आशीर्वचन एवं मंगलकामनाओं के साथ हुआ।

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