*आगर-मालवा।* पिछले दिनों बस स्टैंड परिसर में सटोरियों का जुलूस निकालकर "सट्टा लिखना पाप है, पुलिस हमारा बाप है" के नारे लगवाने वाली आगर पुलिस की कार्रवाई का असर धरातल पर हवा होता दिख रहा है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने जिन तीन सटोरियों को गिरफ्तार कर जुलूस निकाला था, वे महज मोहरे थे। असली सट्टा कारोबारी और मुख्य सरगना अब भी पूरी तरह महफूज हैं और पर्दे के पीछे से अपने नेटवर्क को बेधड़क संचालित कर रहे हैं।
पुलिस के जुलूस के बाद भी शुक्रवार को आगर के पुराने बस स्टैंड के पीछे नवीन बस स्टैंड पर सट्टे का कारोबार चालू है। सटोरिए बेधड़क होकर सट्टा लिख रहे हैं और अपना काला कारोबार चला रहे हैं। इससे प्रतीत होता है कि सटोरियों को कानून का किसी प्रकार का कोई भय नहीं है। सूत्रों के मुताबिक यह भी पता चला है कि यह सब कारोबार मिली-जुली भगत से ही संचालित हो रहा है।
*जब तक मुख्य सट्टा किंगपिनों पर शिकंजा नहीं कसेगा, अवैध धंधा बंद होना नामुमकिन*
नागरिकों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि दिखावटी कार्रवाई के बजाय सट्टे के असली सरगनाओं को बेनकाब कर जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाए। तभी आगर-मालवा में यह अवैध धंधा पूरी तरह बंद हो सकेगा।