नारनौल के समीपवर्ती दुलोठ जाट मे आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा कें तृतीय दिवस पर सर्वप्रथम आचार्य मनीष

नारनौल के समीपवर्ती दुलोठ जाट मे आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा कें तृतीय दिवस पर सर्वप्रथम आचार्य मनीष शास्त्री ने यश शास्त्री ने गोपेश शास्त्री ने मुख्य यजमान परिवार से सभी देवी देवताओं का पूजन करवाया और भागवत की आरती करवाई उसके उपरांत भागवत आचार्य पंडित बजरंग शास्त्री जी ने भागवत कथा में बताया की श्रीमद्भागवत साक्षात नारायण का स्वरूप है और मुक्ति प्रदाता है और आचार्य जी ने बताया की घर परिवार का पालन पोषण करना हमारा धर्म है लेकिन हमारी हर एक श्वास में प्रभु का नाम स्मरण होता रहे यही मानव जीवन का परम धर्म है हम सभी को विश्वास के साथ निस्वार्थ भक्ति करनी चाहिये इसके उपरांत श्री शुकदेव जी परीक्षित जी को उपदेश करते हुए बताया कि भगवान नारायण द्वारा बह्मा को चतु:श्लोकि भागवत उपदेश किया और बताया की किस प्रकार भगवान वराह रूप धारण किया और हिरण्याक्ष का उद्धार किया और रसातल मे गई पृथ्वी को लेकर आये। आचार्य जी ने बताया की भगवान नारायण की आज्ञा से ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण आरम्भ किया और सर्वप्रथम दस प्रकार की सृष्टि निर्माण का वर्णन किया उसके उपरांत ब्रह्मा जी ने अपने शरीर से सृष्टि के पहले पुरुष मनु और स्त्री शतरूपा को महारानी को प्रकट किया और और इन्ही के द्वारा आगे पूरी सृष्टि कि रचना हुई हम सभी लोग मनु कि संतान है इसलिये हम सभी मानव कहलाते है इन्ही मनु जी के यहा पर तीन पुत्री आकुति , देवहूति, प्रसूति , और दो पुत्र प्रियव्रत और उत्तानपाद का जन्म हुआ और इन्ही से सृष्टि का विस्तार हुआ ।
आचार्य जी ने भागवत कथा मे कर्दम देवहूति संवाद , कपिल देवहूति संवाद सुनाया । सती चरित्र का वर्णन करते हुए बताया की जहाँ किसी जगह पर जाने पर अपमान हो आदर ना हो तो ऐसी जगह पर बिना बुलाये नही जाना चाहिए ।
माता सती बिना बुलाये पिता दक्ष के यज्ञ में गई और वहाँ पर माता सती को अपना और शंकर भगवान का अपमान सहन नही हुआ और योग अग्नि के द्वारा अपने शरीर को जलाकर भस्म कर दिया। आचार्य जी ने कथा मे कहा की मनुष्य को अपने घर और समाज के कार्य करते हुए प्रभु का नाम स्मरण एवम पुण्य के कार्य भी अवश्य करते रहने चाहिये वो व्यक्ति धन्य होता है जो प्रभु का नाम स्मरण करता है और करवाता है क्योंकि व्यक्ति दुनिया से विदा होकर जाता है तब सब यही छोड़कर चला जाता है केवल उसके पुण्य कर्म एवम भजन स्मरण और उसकी अछाई बुराई ही उसके साथ जाती है इसलिये व्यक्ति को कोशिश यही करनी चाहिये की हमारे हाथो से सभी का भला हो ।कथा के अंत में आचार्य जी ने ध्रुव जी की सुंदर कथा का बडा ही मार्मिक वर्णन किया है जिसके सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए कथा के अंत में भगवान नारायण और ध्रुव जी की सुंदर झांकी का दर्शन भी करवाया गया कार्यक्रम के बारे जानकारी देते हुए आयोजक ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर 11 बजे से शाम 3 बजे तक भगवताचार्य पं.बजरंग शास्त्री जी महाराज अपने मुखारबिंद से भक्तो को भागवत कथा की गंगा मे आनंद दिलाते है जिसमे सभी सभी धर्म प्रेमी बंधुओ से इस धार्मिक आयोजन मे भागवत की ज्ञान गंगा में सपरिवार आकर कर भाग लेने की अपील की।
इस अवसर मुख्य रूप से राकेश कुमार, सुरेश कुमार, महिपाल सिंह ,अशोक कुमार ,प्रवीण कुमार ,राहुल सहित समस्त किन्जा परिवार सहित सैकडों की संख्या अनेक माताओ बहनो सहित सैकड़ों की संख्या में अनेक गणमान्य लोग मुख्य रूप से मौजूद रहे
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