खादी को मिलेगा नया आयाम, पिण्डारूच में पुनरुत्थान का संकल्प

पिण्डारूच में खादी पुनरुत्थान दिवस का आयोजन, महिलाओं की भागीदारी पर दिया जोर
दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड अंतर्गत पिण्डारूच गांव में गांधी जयंती एवं शास्त्री जयंती के अवसर पर खादी पुनरुत्थान दिवस का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पिण्डारूच में संचालित संस्था अनादि फाउण्डेशन के तत्वावधान में अनादि खादी एवं ग्रामोद्योग विकास संस्थान द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की तस्वीरों पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इसके बाद “वैष्णव जन तो तेने कहिए” वंदना प्रस्तुत कर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में क्षेत्र के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि के रूप में नाबार्ड की जिला विकास पदाधिकारी श्रीमती राजनंदिनी तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री ललित रंजन दत्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वयोवृद्ध शिवकांत झा ने की। अपने संबोधन में श्री झा ने खादी उद्योग को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर देते हुए अनादि खादी एवं ग्रामोद्योग विकास संस्थान द्वारा खादी उद्योग के पुनरुद्धार के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से क्षेत्र की महिलाओं से खादी एवं ग्रामोद्योग की गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया। उनका कहना था कि ग्रामीण महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से न केवल पारंपरिक हस्तकला और खादी को नई दिशा मिल सकती है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
खादी को आत्मनिर्भरता और ग्रामीण विकास से जोड़ने का संकल्प
कार्यक्रम में विशिष्ट वक्ता के रूप में नवीन चौधरी और मणिकांत चौधरी ने भी अपने विचार रखे तथा उपस्थित लोगों को खादी एवं ग्रामोद्योग के प्रति जागरूक और प्रेरित किया। वक्ताओं ने खादी को केवल वस्त्र के रूप में देखने के बजाय इसे ग्रामीण जीवन, स्वावलंबन, श्रम और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण परंपरा के रूप में आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई। संस्था के संचालक एवं दिल्ली विश्वविद्यालय से अवकाश प्राप्त प्रोफेसर प्रदीप कांत चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि अनादि खादी एवं ग्रामोद्योग विकास संस्थान खादी और ग्रामोद्योग के पुनरुत्थान के लिए सभी आवश्यक प्रयास करेगा। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर उपलब्ध कराने तथा अधिक से अधिक लोगों को खादी आधारित गतिविधियों से जोड़ने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम महात्मा गांधी के स्वदेशी, स्वावलंबन और ग्राम विकास के विचारों को वर्तमान समय से जोड़ने का प्रयास भी रहा। कार्यक्रम के अंत में प्रो. प्रदीप कांत चौधरी ने उपस्थित अतिथियों, गणमान्य लोगों और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया। इसके साथ ही कार्यक्रम का समापन हुआ। पिण्डारूच में आयोजित खादी पुनरुत्थान दिवस ने ग्रामीण स्तर पर खादी उद्योग को नई ऊर्जा देने, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और ग्रामोद्योग के माध्यम से आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सार्थक पहल का संदेश दिया।
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