संवेदनशील मामला: बस्ती जिले के कप्तानगंज अंतर्गत खपड़ही गांव की इस घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी संवेदनशीलता बनी हुई है.

अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती का खपड़ही हत्याकांड: 20 महीने बाद भी न्याय से दूर पीड़ित परिवार, पुलिस की कार्यशैली पर बड़े सवाल
- अंबेडकर वाहिनी का दौरा: समाजवादी बाबा साहब अंबेडकर वाहिनी, बस्ती द्वारा थाना कप्तानगंज के खपड़ही गांव में 11 वर्षीय दलित बालिका की हत्या के संबंध में 07 अक्टूबर 2026 को पीड़ित परिवार से भेंट करने का कार्यक्रम तय किया गया है.
- परिवार से संवाद और समर्थन: जिलाध्यक्ष रतिक कुमार के नेतृत्व में कार्यकर्ता पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर उनकी स्थिति और समस्याओं की जानकारी लेंगे तथा न्याय के लिए हरसंभव सहयोग पर चर्चा करेंगे.
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के कप्तानगंज थाना क्षेत्र का खपड़ही गांव आज भी उस खौफनाक दिन को भूला नहीं पाया है। 10 फरवरी 2025 को खपड़ही कंपोजिट विद्यालय में एक 11 वर्षीय दलित छात्रा का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। घटना को 20 महीने बीत चुके हैं, लेकिन कप्तानगंज पुलिस के हाथ अभी तक खाली हैं। जिले में पुलिस अधीक्षक बदले, थानों के थानेदार बदले, लेकिन मासूम की मौत का रहस्य आज भी पर्दें के पीछे ही कैद है।
पुलिस की संवेदनहीनता और लचर कार्यशैली
- पीड़ित पिता द्वारा तहरीर दिए जाने के पूरे 10 दिन बाद कप्तानगंज पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज किया था, जो शुरुआती दौर में ही पुलिस की नीयत और कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े करता है।
- घटना को 20 माह बीत जाने के बावजूद पुलिस यह पता नहीं लगा पाई कि आखिर इस जघन्य हत्याकांड का असली गुनहगार कौन है।
- पुलिस की इस नाकामी के चलते आज तक यह साफ नहीं हो सका है कि हत्यारे आखिर किसकी शह पर कानून की गिरफ्त से दूर हैं।
अब तूल पकड़ रहा मामला: संगठनों की सक्रियता
- न्याय न मिलने के कारण अब यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।
- समाजवादी बाबा साहब अम्बेडकर वाहिनी के जिला अध्यक्ष रतिक कुमार के नेतृत्व में आज (07 अक्टूबर 2026) दोपहर 12 बजे कार्यकर्ता खपड़ही गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात करेंगे और उन्हें न्याय दिलाने के लिए हरसंभव सहयोग पर चर्चा करेंगे।
- खुफिया और राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, बहुजन मुक्ति पार्टी भी इस गंभीर मामले को लेकर एक बड़े और उग्र आंदोलन की तैयारी में जुटी हुई है।
एक तीखा सवाल
आखिर कप्तानगंज पुलिस खपड़ही की इस बेटी के हत्यारे को बेनकाब करने से क्यों कतरा रही है? क्या खाकी की सुस्ती किसी राजनीतिक दबाव का नतीजा है या फिर गरीब और दलित परिवार की चीखें प्रशासनिक दीवारों से टकराकर दम तोड़ रही हैं? जिले के जिम्मेदार अधिकारियों को इसका जवाब देना ही होगा।
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