ग्वालियर के शिक्षा विभाग में कथित अनियमितताओं पर उठे सवाल, स्कूलों की सुरक्षा से लेकर अतिथि शिक्षकों की ज्वाइनिंग प्रक्रिया तक पारदर्शिता की मांग

ग्वालियर, मध्य प्रदेश। शिक्षा को समाज निर्माण का सबसे सशक्त माध्यम माना जाता है और विद्यालयों को शिक्षा के मंदिर की संज्ञा दी जाती है। लेकिन जब इन्हीं विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठने लगें, तो शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। ग्वालियर जिले में सामने आए कुछ मामलों ने विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता को फिर से उजागर किया है।
एक ओर सीएम राइज पद्मा कन्या विद्यालय, ग्वालियर में कक्षा आठवीं की छात्रा के साथ कथित मारपीट और विद्यालय में सीसीटीवी कैमरे चालू नहीं होने को लेकर चिंता जताई जा रही है। यदि विद्यालय जैसे सुरक्षित माने जाने वाले परिसर में इस प्रकार की घटना होती है और निगरानी व्यवस्था प्रभावी नहीं रहती, तो यह विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए गंभीर विषय है। मामले की निष्पक्ष जांच कर घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए तथा विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए।
वहीं दूसरी ओर, घाटीगांव विकासखंड स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय अजयपुर (कक्षा 6 से 8) में अतिथि शिक्षकों की मैनुअल ज्वाइनिंग प्रक्रिया को लेकर भी कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक मनोज अरोरा एवं शिक्षिका सपना दीक्षित द्वारा अतिथि शिक्षक को ज्वाइनिंग देने के एवज में राशि की मांग की गई। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह न केवल नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करेगा, बल्कि शासन के नियमों एवं प्रशासनिक मर्यादाओं के उल्लंघन का विषय भी होगा।
प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराती है। नियमित शिक्षकों को वेतन एवं अन्य सुविधाएं प्रदान की जाती हैं तथा अतिथि शिक्षकों से भी विद्यालयों में शिक्षण कार्य सुचारु रूप से संचालित करने की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में यदि किसी शिक्षक या अधिकारी पर नियुक्ति अथवा ज्वाइनिंग के नाम पर अनुचित राशि मांगने का आरोप लगता है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। किसी भी अभ्यर्थी को उसकी योग्यता, मेरिट और शासन के निर्धारित नियमों के बजाय कथित लेन-देन के आधार पर अवसर दिया जाना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
शासन एवं शिक्षा विभाग से प्रमुख मांगें
सीएम राइज पद्मा कन्या विद्यालय में छात्रा के साथ हुई कथित मारपीट के मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा विद्यालय के सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता की जांच की जाए।
शासकीय माध्यमिक विद्यालय अजयपुर में अतिथि शिक्षक की मैनुअल ज्वाइनिंग के संबंध में लगाए गए राशि मांगने के आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
जांच के दौरान संबंधित अभिलेखों, ज्वाइनिंग प्रक्रिया, मेरिट सूची, आदेशों एवं उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जाए।
अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति एवं ज्वाइनिंग प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और प्रत्येक विद्यालय में शासन के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध आरोप प्रमाणित होते हैं, तो नियमानुसार कठोर अनुशासनात्मक एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।
विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी विद्यालयों में सीसीटीवी कैमरों सहित आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा की जाए।
शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही, पक्षपात अथवा भ्रष्टाचार के आरोपों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। सरकार और शिक्षा विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि विद्यालयों में विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण मिले और अतिथि शिक्षकों को बिना किसी अनुचित दबाव या कथित लेन-देन के, निर्धारित नियमों के अनुसार ज्वाइनिंग का अवसर प्राप्त हो।
अब आवश्यकता है कि संबंधित विभागीय अधिकारी इन मामलों का संज्ञान लें, तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच कराएं और दोष सिद्ध होने पर जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करें, ताकि शिक्षा विभाग के प्रति आम जनता का विश्वास बना रहे।
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