पिता के निधन के दुःख में भी बेटे “विकास गर्ग” ने निभाया मानवता का धर्म

विजय कुमार बंसल हरिद्वार ब्यूरो
*पिता के निधन के दुःख में भी बेटे "विकास गर्ग" ने निभाया मानवता का धर्म,*
नेत्रदान से दो लोगों के जीवन में जगेगी रोशनी
*श्री वेद प्रकाश गर्ग जी का नेत्रदान बना समाज के लिए प्रेरणा;*
*दधीचि देहदान समिति ने परिवार के सेवा-भाव को किया नमन*
हरिद्वार, 11 अक्टूबर 2026।
मानवता और सेवा-भाव की सच्ची पहचान कठिन परिस्थितियों में होती है। अपने प्रियजन को खोने का दुःख असहनीय होता है, लेकिन इसी दुःख की घड़ी में यदि कोई परिवार दूसरों के जीवन में उजाला भरने का निर्णय ले, तो वह पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन जाता है। ऐसा ही अनुकरणीय कार्य शिवालिक नगर, हरिद्वार निवासी (Managing Director V – Marc India Limited) श्री विकास गर्ग जी ने अपने पूज्य पिता स्वर्गीय श्री वेद प्रकाश गर्ग जी के निधन के उपरांत उनके नेत्रदान का निर्णय लेकर किया।
दिनांक 11 अक्टूबर 2026 को श्री वेद प्रकाश गर्ग जी के निधन के बाद उनके सुपुत्र श्री विकास गर्ग जी ने गहन शोक के बीच भी मानवता और परोपकार को सर्वोपरि रखते हुए अपने पिताजी का नेत्रदान करवाने का निर्णय लिया। उनके इस निर्णय ने यह संदेश दिया कि सच्चे संस्कार वही हैं, जो दुःख की घड़ी में भी दूसरों के जीवन में खुशियाँ लाने की प्रेरणा देते हैं।
इस पुनीत कार्य के लिए श्री विकास गर्ग जी ने अपने मित्र श्री संजीव गुप्ता जी, जो दधीचि देहदान समिति के संरक्षक भी हैं, से संपर्क किया। श्री संजीव गुप्ता जी ने तत्काल समिति के अध्यक्ष श्री सुभाष चाँदना जी को इसकी सूचना दी। अध्यक्ष जी ने तुरंत एम्स, ऋषिकेश के नेत्रदान विभाग से संपर्क स्थापित किया।
सूचना मिलते ही एम्स, ऋषिकेश की टीम से डॉ. प्रियंका मटोला जी एवं उनके सहयोगी श्री पवन जी ने तत्परता दिखाते हुए शिवालिक नगर स्थित श्री विकास गर्ग जी के निवास, एन-327, शिवालिक नगर, हरिद्वार पहुँचकर स्वर्गीय श्री वेद प्रकाश गर्ग जी के दोनों कॉर्निया सुरक्षित रूप से प्राप्त किए। इस प्रकार नेत्रदान की प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
नेत्रदान: मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा का अवसर
दधीचि देहदान समिति के अध्यक्ष श्री सुभाष चाँदना जी ने कहा कि श्री विकास गर्ग जी का यह निर्णय अत्यंत सराहनीय एवं अनुकरणीय है। अपने पिता को खोने के दुःख के बीच नेत्रदान का निर्णय लेना उनके परिवार के सेवा-संस्कारों और मानवीय संवेदनाओं को दर्शाता है।
कॉर्निया के सफल प्रत्यारोपण से दो जरूरतमंद व्यक्तियों को दृष्टि मिलने की संभावना है। वे व्यक्ति, जो कॉर्निया की समस्या के कारण स्पष्ट रूप से देख नहीं पा रहे हैं, प्रत्यारोपण सफल होने पर फिर से इस सुंदर एवं रंगीन संसार को देखने का अवसर प्राप्त कर सकते हैं।
नेत्रदान केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता के प्रति संवेदनशीलता, करुणा और परोपकार का प्रतीक है। यह ऐसा पुण्यकार्य है, जिसके माध्यम से व्यक्ति मृत्यु के उपरांत भी किसी अन्य के जीवन में आशा और प्रकाश का माध्यम बन सकता है।
दधीचि देहदान समिति ने परिवार के सेवा-भाव को किया नमन
दधीचि देहदान समिति (रजि.), हरिद्वार ने स्वर्गीय श्री वेद प्रकाश गर्ग जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए श्री विकास गर्ग जी एवं उनके समस्त परिवार के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।
समिति ने परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में दुःख सहन करने की शक्ति दें। साथ ही, परिवार में सेवा, त्याग, परोपकार एवं मानवता के संस्कार सदैव बने रहने की कामना की।
समिति का मानना है कि ऐसे प्रेरणादायी कार्यों की जानकारी समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचनी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान, अंगदान एवं देहदान के महत्व को समझें और समय रहते इसका संकल्प लें।
समाज से अपील: नेत्रदान का संकल्प लेकर किसी के जीवन में उजियारा भरें
दधीचि देहदान समिति ने आमजन से अपील की कि नेत्रदान के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करें और इस महान कार्य के लिए आगे आएँ। नेत्रदान के विषय में परिवार के सदस्यों से पहले ही चर्चा करें, ताकि मृत्यु के समय परिजन दिवंगत व्यक्ति की इच्छा का सम्मान करते हुए समय पर आवश्यक कदम उठा सकें।
आइए, हम सभी संकल्प लें—
जीते जी रक्तदान करें।
मरणोपरांत नेत्रदान एवं अंगदान का संकल्प लें।
देहदान के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान में योगदान दें।
सेवा और परोपकार की भावना को अपने परिवार तथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाएँ।
जैसा कि कहा गया है—
“परहित सरिस धर्म नहिं भाई।”
मृत्यु जीवन का अंत अवश्य है, लेकिन मानवता के लिए किया गया सेवा-कार्य सदैव जीवित रहता है। स्वर्गीय श्री वेद प्रकाश गर्ग जी का नेत्रदान और उनके सुपुत्र श्री विकास गर्ग जी का निर्णय इसी भावना का सशक्त उदाहरण है।
नेत्रदान महादान है—आइए, संकल्प लें और दूसरों के जीवन में प्रकाश भरें।
संकल्प एवं जानकारी हेतु संपर्क करें:
दधीचि देहदान समिति (रजि.), हरिद्वार
9410326582, 9411111675, 9410395622, 9927205993
सेवा परमो धर्मः | नर सेवा नारायण सेवा
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