रिपोर्टर-अनिरुद्ध अग्रहरि संपादक अतुल अग्रवाल सहित चार लोगों की हिरासत के विरोध में पत्रकारों ने भरी हुंकार

संतकबीरनगर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन के जरिए उठाई निष्पक्ष जांच की मांग, महिला पत्रकार की सुरक्षा और पत्रकारिता की स्वतंत्रता का मुद्दा
संतकबीरनगर लिविंग इंडिया एवं हिंदी ख़बर (न्यूज़ चैनल) के प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल सहित चार लोगों को हरियाणा पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के प्रकरण को लेकर संतकबीरनगर के पत्रकारों में रोष और चिंता देखने को मिली। इस मामले में निष्पक्ष जांच, पत्रकारों की सुरक्षा तथा पत्रकारिता की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की मांग को लेकर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब, संतकबीरनगर के बैनर तले पत्रकारों ने एकजुट होकर आवाज उठाई। संगठन की ओर से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन के माध्यम से मामले में हस्तक्षेप कर उचित कार्रवाई की मांग की गई।कार्यक्रम की अध्यक्षता जर्नलिस्ट प्रेस क्लब के जिलाध्यक्ष शक्ति श्रीवास्तव 'बाबुल' ने की, जबकि महामंत्री मिथिलेश कुमार धुरिया की अगुवाई में पत्रकारों ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। पत्रकारों ने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। पत्रकार समाज की समस्याओं, भ्रष्टाचार और जनहित से जुड़े मुद्दों को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। ऐसे में पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। नशाखोरी के मुद्दे पर खबर प्रसारित करने के बाद कार्रवाई का आरोप ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि हरियाणा में बढ़ती नशाखोरी के मुद्दे पर समाचार प्रसारित किए जाने के संदर्भ में लिविंग इंडिया एवं हिंदी ख़बर (न्यूज़ चैनल) के प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल सहित चार लोगों को हिरासत में लिए जाने का मामला सामने आया है। हिरासत में एक महिला पत्रकार के शामिल होने की जानकारी भी ज्ञापन में दी गई है। इस घटनाक्रम को लेकर पत्रकारिता जगत में चिंता जताते हुए संबंधित कार्रवाई के आधार और परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई। पत्रकारों ने कहा कि नशाखोरी जैसी गंभीर सामाजिक समस्या को उजागर करना जनहित से जुड़ा विषय है। यदि किसी खबर या प्रसारण को लेकर कोई कानूनी आपत्ति है, तो उसका समाधान विधिसम्मत और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए। किसी भी पत्रकार के विरुद्ध कार्रवाई कानून के दायरे में होनी चाहिए और पत्रकारिता के पेशेवर कार्यों के कारण किसी को प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए। जर्नलिस्ट प्रेस क्लब की ओर से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन में पूरे प्रकरण की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने की मांग की गई। साथ ही हिरासत में लिए गए सभी व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई के आधार और संबंधित कानूनी प्रक्रिया की समीक्षा करने, किसी भी प्रकार की अवैध हिरासत पाए जाने पर विधिसम्मत राहत सुनिश्चित करने तथा महिला पत्रकार की सुरक्षा, गरिमा और कानूनी अधिकारों का संरक्षण करने की मांग उठाई गई। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि यदि जांच में किसी प्रकार की दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। पत्रकारों को डराने-धमकाने और उनके पेशेवर कार्यों में अनुचित हस्तक्षेप की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने की भी मांग की गई।
इस अवसर पर पत्रकारों ने कहा कि स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का आधार है। मीडिया जनता की आवाज को सरकार तक पहुंचाने के साथ ही शासन-प्रशासन को जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए पत्रकारों की सुरक्षा और उनके स्वतंत्र रूप से कार्य करने के अधिकारों की रक्षा करना आवश्यक है। कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष बाबुल श्रीवास्तव, महामंत्री मिथिलेश कुमार धुरिया की अगुवाई में देवीलाल गुप्ता, विपिन राय, अमित अग्रहरि, अनिरुद्ध अग्रहरि, राजेश्वर, गंगेश्वर यादव, मोहन राजभर, साहिल, विजय गुप्ता, सदरे आलम खान, असलम खान, आलमगीर, धर्मेंद्र पांडेय, सुधाकर त्रिपाठी, उपेंद्र मणि त्रिपाठी, के.पी. मौर्य सहित सैकड़ों पत्रकारों की मौजूदगी रही। पत्रकारों ने एकजुटता प्रदर्शित करते हुए मांग की कि संबंधित मामले में तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्रता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
संतकबीरनगर के पत्रकारों ने एक स्वर में मांग की कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सरकार इस प्रकरण का गंभीरता से संज्ञान लेकर आवश्यक कदम उठाए।
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