पत्रकारों से अभद्रता और उत्पीड़न पर रोक लगाने की मांग,

यूपी बस्ती नेशनल प्रेस क्लब ने राष्ट्रपति को भेजा पांच सूत्रीय ज्ञापन
पत्रकारों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय स्तर पर कड़ा कानून बनाने की मांग,फर्जी मुकदमे वापस लेने और बीमा सुविधा उपलब्ध कराने का उठाया मुद्दा
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पत्रकारों के साथ हुई अभद्रता, प्रशासनिक दुर्व्यवहार और उत्पीड़न की घटनाओं के विरोध में नेशनल प्रेस क्लब, बस्ती मंडल की ओर से राष्ट्रपति को संबोधित पांच सूत्रीय ज्ञापन 12 अक्टूबर 2026 को सौंपा गया। ज्ञापन जिला अधिकारी, बस्ती के माध्यम से भेजा गया है।
इसमें पत्रकारों और स्वतंत्र मीडिया कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, उनके साथ दुर्व्यवहार करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने तथा पत्रकारिता के दौरान आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र सरकार से प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई है। नेशनल प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में जनता की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने और जनहित के मुद्दों को सामने लाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।
ऐसे में पत्रकारों के साथ अभद्रता, मारपीट, उत्पीड़न और प्रशासनिक दुर्व्यवहार की घटनाएं स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए चिंता का विषय हैं। पत्रकारों को निर्भीक होकर अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है।
ज्ञापन में राष्ट्रपति से पांच प्रमुख मांगों पर तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया है
पत्रकारों से दुर्व्यवहार करने वालों पर हो सख्त कार्रवाई—
पहली मांग में जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से कवरेज कर रहे पत्रकारों तथा महिला मीडियाकर्मियों के साथ बदसलूकी और अभद्रता करने वाले पुलिसकर्मियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की गई है। पत्रकारों की सुरक्षा के लिए बने केंद्रीय कानून—-
दूसरी मांग में देशभर के पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय स्तर पर कड़ा कानून बनाने की बात कही गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि कर्तव्य निर्वहन के दौरान पत्रकारों पर हमला करने या उनके साथ अभद्रता करने की घटनाओं को गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखा जाए,ताकि पत्रकारों के खिलाफ हिंसा औरउत्पीड़न
पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। फर्जी मुकदमे वापस लेने की मांग—–
तीसरी मांग में पत्रकारों को सच दिखाने और जनहित के मुद्दे उठाने से रोकने के उद्देश्य से उन पर दर्ज किए गए सभी प्रशासनिक एवं राजनीतिक रूप से प्रेरित फर्जी मुकदमों को तत्काल वापस लेने की मांग की गई है।
संगठन का कहना है कि पत्रकारों को बिना किसी भय या दबाव के निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने का अवसर मिलना चाहिए। ग्राउंड रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को मिले बीमा सुविधा—-
चौथी मांग में ग्राउंड रिपोर्टिंग करने वाले सभी पत्रकारों के लिए अनिवार्य जीवन एवं स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने का अनुरोध किया गया है।
इसके साथ ही फील्ड में काम करने वाले पत्रकारों को प्रशासनिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई है,जिससे जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में काम करने वाले मीडियाकर्मियों को सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण मिल सके। डिजिटल और स्वतंत्र पत्रकारों को भी मिले सम्मान व सुरक्षा—-
पांचवीं मांग में डिजिटल मीडिया,यूट्यूब पत्रकारों और स्वतंत्र मीडियाकर्मियों के योगदान को स्वीकार करते हुए उन्हें फील्ड कवरेज के दौरान उचित सुरक्षा और मान्यता प्रदान करने की मांग की गई है।
संगठन का कहना है कि बदलते मीडिया परिवेश में डिजिटल और स्वतंत्र पत्रकारिता भी जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसलिए ऐसे पत्रकारों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
नेशनल प्रेस क्लब, बस्ती मंडल ने राष्ट्रपति से इन पांचों मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है। संगठन का कहना है कि पत्रकारों की सुरक्षा, स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा करना लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक है।
ज्ञापन के अंत में नेशनल प्रेस क्लब, बस्ती मंडल के समस्त पदाधिकारियों एवं सदस्यों की ओर से पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की गई है
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