*कोरिया में आदिवासी आश्रमों की बदहाली: 2 बच्चों की मौत और बाल श्रम के बाद भी सहायक आयुक्त और अधीक्षक पर कार्रवाई क्यों नहीं?*

कोरिया-(सोनहत): जिले में आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित आश्रमों की व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। हाल ही में सोनहत विकासखंड के तेलीमुड़ा बालक आश्रम में अधीक्षक द्वारा अपने निजी वाहन के आवागमन के लिए नाबालिग आदिवासी बच्चों से सड़क की मरम्मत कराने का मामला सामने आया है। एक के बाद एक हो रही गंभीर घटनाओं के बावजूद विभाग के सहायक आयुक्त और दोषी अधीक्षकों पर प्रशासन द्वारा अब तक कोई कड़ी कार्रवाई न किया जाना सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है।
लगातार हादसों के बाद भी मौन है प्रशासन
जिले के आदिवासी आश्रमों में लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व मझारटोला बालक आश्रम में तालाब में डूबने से एक मासूम बच्चे की दर्दनाक मौत हो चुकी है। कुल दो मौतों और बच्चों के घायल होने जैसी गंभीर घटनाओं के बाद भी विभागीय मॉनिटरिंग शून्य नजर आ रही है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बार-बार होने वाली इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार सहायक आयुक्त (आदिवासी विकास विभाग) की जवाबदेही तय क्यों नहीं की जा रही है?
कलेक्टर जनदर्शन में सबूतों के साथ शिकायत
बीते 13 अक्टूबर 2026 को जागरूक नागरिकों—नीरज पटेल, अंकित विश्वकर्मा, सुनील कुमार, विपुल कुमार और हिमांशु ने कलेक्टर जनदर्शन में फोटो और वीडियो प्रमाणों के साथ लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में तेलीमुड़ा आश्रम के अधीक्षक पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैँ
*निजी स्वार्थ के लिए बाल श्रम*
अधीक्षक ने अपने निजी वाहन को निकालने के लिए आश्रम के बाहर की सड़क की मरम्मत नाबालिग छात्रों से करवाई।
*गंभीर घटना पर पर्दा*
आश्रम परिसर में एक छात्रा का हाथ टूट गया, जिसकी सूचना उच्च अधिकारियों को देने के बजाय मामले को दबाने के लिए गुपचुप तरीके से निजी डॉक्टर से इलाज कराया गया।
*भोजन में कटौती*
बच्चों को शासन के मेन्यू के अनुसार पर्याप्त व गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं दिया जा रहा है।
*सुरक्षा से खिलवाड़*
मझारटोला आश्रम में बच्चे की डूबने से हुई मौत के बाद भी अन्य आश्रमों की सुरक्षा व्यवस्था की कोई समीक्षा नहीं की गई।
शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर से मांग की है कि केवल निचले स्तर पर खानापूर्ति करने के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी अधीक्षक सहित मॉनिटरिंग में विफल रहे अधिकारियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
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