केनौना में धड़ल्ले से बिक रही कच्ची शराब: छावनी थाना क्षेत्र के केनौना गांव में सुबह-शाम अवैध शराब की बिक्री का मामला गरमाया, पीड़ित महिला ने एसपी और मुख्यमंत्री पोर्टल से लगाई गुह

अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती में कच्ची शराब का काला कारोबार और खाकी की संदिग्ध चुप्पी: केनौना की दास्तां व्यवस्था के मुंह पर तमाचा
- विरोध करने पर हंसिया लेकर दौड़ाने का आरोप: शराब बिक्री का विरोध करने पर दबंगों द्वारा जान से मारने की धमकी देने और जानलेवा हमला करने का गंभीर आरोप।
- चौकी पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल: केनौना चौकी प्रभारी पर प्रभावी कार्रवाई की बजाय मनगढ़ंत आख्या भेजने और सुलह के लिए दबाव बनाने का आरोप।
- छतौना के रमेश पर सिंडिकेट चलाने का शक: छतौना निवासी रमेश के जरिए कच्ची शराब मंगवाकर बेचने का दावा, प्रशासनिक जांच पर टिकी ग्रामीणों की निगाहें।
- खाकी और आबकारी विभाग की चुप्पी पर सवाल: मुख्यमंत्री पोर्टल, डीएम, एसपी और आबकारी विभाग तक मामला पहुंचने के बाद भी कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश।
बस्ती: उत्तर प्रदेश शासन और आबकारी विभाग के लाख दावों के बावजूद ग्रामीण अंचलों में अवैध कच्ची शराब का कारोबार किस कदर फल-फूल रहा है, इसकी बानगी बस्ती जिले के छावनी थाना क्षेत्र अंतर्गत केनौना गांव से सामने आई है। छावनी क्षेत्र के केनौना गांव में सुबह-सर्च और शाम ढलते ही धड़ल्ले से बिक रही अवैध कच्ची शराब ने न केवल सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर दिया है, बल्कि स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग की कार्यशैली को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक पीड़ित महिला मुख्यमंत्री पोर्टल से लेकर पुलिस अधीक्षक (एसपी), जिलाधिकारी और आबकारी विभाग तक गुहार लगा रही है, तब भी खाकी की नींद क्यों नहीं खुल रही?

शिकायत करो तो जानलेवा हमला, पुलिस साठगांठ का अंदेशा
केनौना गांव की रहने वाली मंजू देवी (पत्नी राम शंकर निषाद) की पीड़ा किसी एक परिवार की नहीं, बल्कि उस हर ग्रामीण की है जो इस अवैध जहर के कारोबार से त्रस्त है। मंजू देवी ने हिम्मत जुटाकर जब गांव में चल रहे इस अवैध खेल का विरोध किया, तो शराब माफियाओं और उनके नुमाइंदों के तेवर देखने लायक थे। उन पर हंसिया लेकर दौड़ाने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती देते हैं।
जब कानून के रखवाले ही सुस्त पड़ जाएं, तो अपराधियों के हौसले बुलंद होना लाजिमी है। आरोप है कि छतौना निवासी रमेश के जरिए कच्ची शराब मंगवाकर बेची जा रही है और जब पीड़िता ने न्याय की गुहार लगाई, तो केनौना चौकी प्रभारी राधेश्याम त्रिपाठी ने कथित तौर पर प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय मनगढ़ंत आख्या भेज दी। सवाल यह उठता है कि क्या चौकी पुलिस अपराधियों को बचाने की फिराक में थी? क्यों पीड़िता पर ही सुलह का दबाव बनाया गया? क्या पुलिस किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रही है?
कागजी दावों और जमीनी हकीकत के बीच पिसती जनता
सरकार और प्रशासन का महकमा मंचों से भले ही अपराध और अवैध शराब मुक्त समाज का राग अलापता हो, लेकिन बस्तियों और गांवों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। केनौना गांव में खुलेआम बिक रही कच्ची शराब के कारण वहां का सामाजिक माहौल दूषित हो रहा है। शराबियों के जमावड़े से महिलाओं और बच्चों का घर से निकलना मुहाल हो गया है, और विरोध करने पर जान का खतरा बना हुआ है।
यदि मुख्यमंत्री पोर्टल और पुलिस अधीक्षक के स्तर पर शिकायत पहुंचने के बाद भी धंधा बदस्तूर जारी है, तो यह प्रशासनिक मशीनरी की विफलता नहीं तो और क्या है? क्या जिम्मेदार अधिकारी तब जागेंगे जब इस अवैध जहर के सेवन से कोई बड़ा हादसा या जनहानि हो जाएगी?
अब टिकी हैं निगाहें: क्या एसपी और आबकारी विभाग दिखाएंगे सख्ती?
केनौना गांव का यह मामला अब सिर्फ अवैध शराब की बिक्री तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह स्थानीय पुलिस की जवाबदेही, प्रशासनिक पारदर्शिता और कानून के राज की परीक्षा बन चुका है।
वक्त आ गया है कि बस्ती पुलिस अधीक्षक और आबकारी विभाग इस मामले में संज्ञान लें। केवल कागजी आख्या लगाने वाले चौकी प्रभारी की भूमिका की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच हो, अवैध शराब का कारोबार कराने वालों पर गैंगस्टर और एनएसए जैसी सख्त कार्रवाई हो, और शिकायतकर्ता मंजू देवी को मुकम्मल सुरक्षा व न्याय मिले। यदि अब भी प्रशासन ने लाचारी दिखाई, तो जनता का कानून से भरोसा उठना तय है।
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