गढ़चिरौली: भू-अधिग्रहण के खिलाफ आक्रमक हुए 14 गांवों के किसान, चामोर्शी के मुख्य चौक पर रातभर डटे रहे आंदोलनकारी

समीर वानखेड़े ब्यूरो चीफ:
महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित माने जाने वाले गढ़चिरौली जिले की चामोर्शी तहसील में औद्योगिक परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित भू-अधिग्रहण (Land Acquisition) के खिलाफ किसानों का गुस्सा अब सड़कों पर फूट पड़ा है। भेंडाला क्षेत्र के 14 गांवों के हजारों किसानों और महिलाओं ने मिलकर चामोर्शी शहर के मुख्य लक्ष्मीगेट चौक और आष्टी क्रॉसिंग पर जोरदार धर्ना आंदोलन और रास्ता रोको (चक्काजाम) शुरू कर दिया है।
प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर ही चूल्हे जलाकर रात बिताई और स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन खत्म नहीं होगा। 1.
मुख्य विवाद: 3,500 हेक्टेयर से अधिक उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण
राज्य सरकार और महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) द्वारा चामोर्शी तहसील के भेंडाला परिसर के गांवों (चित्रंजनपुर, किष्टापुर, चेनपूर, दुर्गापुर, सलूर, लक्ष्मीपूर, गणपूर, विहीरपूर आदि) में लगभग 3,500 हेक्टेयर (1,600 हेक्टेयर से अधिक निजी शेतजमीन) भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई है। यह जमीन लॉयड मेटल्स (Lloyd Metals) के ‘इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट’ और अन्य औद्योगिक परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित है।
किसानों का तर्क: यह पूरी भूमि बहुपसली और उपजाऊ (Fertile Land) है। किसानों की आजीविका का यह एकमात्र जरिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें बिना विश्वास में लिए और बिना पूर्व-सहमति के जबरन जमीनें छीनी जा रही हैं। 2.
आंदोलन का स्वरूप: 19 घंटे से अधिक का चक्काजाम और महामार्ग पर मुक्काम
सड़कों पर उतरीं महिलाएं व किसान: ‘शेतकरी बचाव जनआंदोलन समिति’ और महिला संगठनों के आह्वान पर हजारों की संख्या में ग्रामीण चामोर्शी पहुंचे। यातायात ठप: आष्टी क्रॉसिंग और लक्ष्मीगेट चौक पर रास्ता रोको किए जाने से चामोर्शी-चंद्रपुर, गडचिरोली-आष्टी और नागपुर मुख्य मार्ग पर भारी वाहनों की कतारें लग गईं।
सड़क पर रात: दिनभर प्रदर्शन के बाद जब शाम तक कोई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ज्ञापन लेने या बात करने नहीं पहुंचा, तो किसानों ने चौक पर ही चूल्हे जलाकर खाना पकाया और रातभर सड़क पर ही मुक्काम किया।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगे
अधिसूचना व जनसुनवाई तुरंत रद्द हो: भेंडाला परिसर की 14 गांवों की कृषि भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना तुरंत वापस ली जाए और प्रस्तावित जनसुनवाई स्थगित की जाए। मुख्यमंत्री स्तर की बैठक: मुख्यमंत्री और जिला सह-पालक मंत्री की उपस्थिति में किसान प्रतिनिधियों के साथ आधिकारिक व सामूहिक बैठक बुलाई जाए।
पेसा और ग्रामसभा के अधिकार: PESA अधिनियम के तहत ग्रामसभाओं के अधिकारों का सम्मान करते हुए बिना सहमति किसी भी परियोजना को मंजूरी न दी जाए। मुकदमे वापस लिए जाएं: जमीन बचाने के संघर्ष के दौरान किसानों व आंदोलनकारियों पर दर्ज किए गए पुलिस मुकदमों को निरस्त किया जाए।
प्रशासन का रुख व वर्तमान स्थिति
स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।
हालांकि, किसान इस बात से नाराज हैं कि शासन की ओर से कोई जिम्मेदार अधिकारी सीधे संवाद के लिए आगे नहीं आया। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि आष्टी पेपर मिल की तरह जमीनों के चले जाने के बाद युवाओं को रोजगार भी नहीं मिलता और खेती भी छिन जाती है।
जब तक जमीन अधिग्रहण का फैसला वापस नहीं लिया जाता, तब तक यह जनआंदोलन जारी रहेगा।
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