केवट की भक्ति ने जीता दिल, सीता हरण के मार्मिक मंचन से भावुक हुए दर्शक

80वीं रामलीला के आठवें दिन राम-केवट संवाद से लेकर रावण द्वारा सीता हरण तक का हुआ सजीव मंचन,
भाजपा जिला उपाध्यक्ष मनोज कुमार मिश्रा ने की प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता की आरती
महुली, सोनभद्र(राकेश कुमार कन्नौजिया)_दुद्धी ब्लॉक के महुली स्थित श्री राजा बरियार शाह खेल मैदान में चल रही 80वीं रामलीला के आठवें दिन गुरुवार की रात राम-केवट संवाद से लेकर माता सीता के हरण तक की लीला का भव्य एवं भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया। विशेष रूप से केवट की निश्छल भक्ति, प्रभु श्रीराम के प्रति उसकी अगाध श्रद्धा और रावण द्वारा माता सीता के हरण के दृश्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि भाजपा सोनभद्र के जिला उपाध्यक्ष मनोज कुमार मिश्रा ने प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और जनकनंदिनी माता सीता की आरती कर किया। इसके बाद रामलीला का मंचन शुरू हुआ। मैदान में मौजूद श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयघोष से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
राम-केवट संवाद के मंचन में कलाकारों ने भक्ति, प्रेम और समर्पण का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण गंगा नदी के तट पर पहुंचते हैं। नदी पार करने के लिए जब श्रीराम केवट से नाव लाने का आग्रह करते हैं, तो केवट अपनी अनूठी भक्ति और विनम्रता से सबका मन मोह लेता है। वह प्रभु के चरण धोने की इच्छा व्यक्त करता है। केवट की श्रद्धा के पीछे यह मान्यता जुड़ी है कि प्रभु के चरणों की धूल के स्पर्श से पत्थर भी नारी रूप में परिवर्तित हो गया था। उसे आशंका होती है कि कहीं उसकी नाव भी किसी अन्य रूप में न बदल जाए।
केवट की भोली-भाली बातों और प्रभु श्रीराम के साथ उसके भावपूर्ण संवाद ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया। जब केवट प्रभु के चरण पखारकर उन्हें गंगा पार कराने की तैयारी करता है, तब उसकी भक्ति और समर्पण का अद्भुत दृश्य सामने आता है। नदी पार कराने के बाद श्रीराम उसे उतराई देना चाहते हैं, लेकिन केवट धन लेने से इनकार कर देता है। वह प्रभु से कहता है कि दोनों एक ही कार्य करते हैं—वह लोगों को नदी के इस पार से उस पार पहुंचाता है और प्रभु भवसागर से पार लगाते हैं। केवट की इस भावपूर्ण अभिव्यक्ति पर दर्शकों ने तालियों और जयकारों से पूरा मैदान गुंजायमान कर दिया। केवट की भूमिका निभा रहे सुमित कुमार कन्नौजिया ने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया।
इसके बाद पंचवटी में शूर्पणखा के आगमन की लीला का मंचन हुआ। भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को देखकर शूर्पणखा मोहित हो जाती है और विवाह का प्रस्ताव रखती है। लक्ष्मण द्वारा उसका प्रस्ताव अस्वीकार किए जाने के बाद घटनाक्रम आगे बढ़ता है। शूर्पणखा के अपमानित होकर अपने भाई रावण के पास पहुंचने और सीता की सुंदरता का वर्णन करने से रावण के मन में प्रतिशोध तथा माता सीता के हरण की योजना जन्म लेती है।
रावण मारीच को स्वर्ण मृग का रूप धारण करने के लिए कहता है। स्वर्ण मृग को देखकर माता सीता उसे प्राप्त करने की इच्छा व्यक्त करती हैं। उनके आग्रह पर श्रीराम मृग के पीछे चले जाते हैं और लक्ष्मण को सीता की रक्षा का दायित्व सौंपते हैं। कुछ समय बाद मारीच श्रीराम की आवाज में सहायता के लिए पुकार लगाता है। आवाज सुनकर माता सीता चिंतित हो जाती हैं और लक्ष्मण से श्रीराम की सहायता के लिए जाने का आग्रह करती हैं। माता सीता की चिंता को देखते हुए लक्ष्मण उन्हें समझाकर कुटिया से निकल पड़ते हैं।
इसी अवसर का लाभ उठाकर रावण साधु का वेश धारण कर कुटिया के पास पहुंचता है। भिक्षा मांगने के बहाने वह माता सीता को अपनी बातों में उलझाता है और अंततः अपने वास्तविक रूप में आकर उनका हरण कर पुष्पक विमान से लंका की ओर चल देता है। माता सीता के करुण विलाप और प्रभु श्रीराम से बिछड़ने के मार्मिक दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। इस तरह राम-केवट संवाद से शुरू हुई लीला सीता हरण के प्रसंग के साथ संपन्न हुई।
राम की भूमिका में अमरेश कुमार कन्नौजिया, लक्ष्मण के रूप में निखिल कुमार कन्नौजिया, सीता के रूप में अभिषेक कुमार कन्नौजिया, केवट की भूमिका में सुमित कुमार कन्नौजिया, रावण के रूप में अभिरंजन कुमार कन्नौजिया तथा शूर्पणखा की भूमिका में रजनीशमणि कन्नौजिया सहित अन्य कलाकारों ने शानदार अभिनय कर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।
रामलीला समिति के अध्यक्ष अरविंद जायसवाल, कोषाध्यक्ष अमित कुमार कन्नौजिया, सचिव डॉ. राकेश कुमार कन्नौजिया सहित समिति के अन्य पदाधिकारी एवं हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शक उपस्थित रहे।
आज राम-सुग्रीव मित्रता और बाली वध का मंचन
रामलीला समिति के अनुसार, शुक्रवार 16 अक्टूबर को राम-सुग्रीव मित्रता एवं बाली वध की लीला का मंचन किया जाएगा। श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर रामलीला का आनंद लेने की अपील की गई है।
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