कौलेश्वर राम हलवाई की रखी नींव आज भी जीवंत, गूंज रही फूलपुर की रामलीला

कौलेश्वर राम हलवाई की रखी नींव आज भी जीवंत, गूंज रही फूलपुर की रामलीला
रिपोर्टर- सुरेश कुमार धारिया
पद – जिला पत्रकार
जिला – आजमगढ़; प्रदेश – उत्तर प्रदेश।
फूलपुर, आजमगढ़। फूलपुर गल्ला मंडी की रामलीला और दशहरा मेला आज भी अपनी ऐतिहासिक पहचान बनाए हुए है। वर्षों पुरानी यह परंपरा क्षेत्र की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुकी है। इस गौरवशाली परंपरा की नींव वर्ष 1964 में प्रतिष्ठित व्यवसायी स्वर्गीय कौलेश्वर राम हलवाई ने रखी थी। नवरात्र के प्रथम दिन से शुरू होने वाला यह आयोजन प्रत्येक वर्ष श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
बच्चों की झांकी से हुई थी ऐतिहासिक शुरुआत
बताया जाता है कि वर्ष 1964 में कौलेश्वर राम हलवाई ने बच्चों के साथ मिलकर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता, भरत और शत्रुघ्न की झांकी रिक्शे पर सजाकर गल्ला मंडी से निकाली थी। छोटी-सी इस पहल ने आगे चलकर फूलपुर के दशहरा उत्सव को एक नई पहचान दिलाई। समय के साथ यह आयोजन धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया।
1974 में नव युवक दल ने शुरू किया रामलीला मंचन
फूलपुर की रामलीला के इतिहास में वर्ष 1974 भी महत्वपूर्ण माना जाता है। उस समय बांकेलाल आर्य के संयोजन में कई नवयुवकों ने नव युवक दल का गठन किया और रामलीला मंचन की शुरुआत की।
उस दौर में जगरनाथ पांडेय ने भगवान श्रीराम, अनिल प्रजापति ने लक्ष्मण, दत्ताराम सेठ ने राजा दशरथ तथा श्री चंद हलवाई और सुबास हलवाई ने रावण की भूमिका निभाकर दर्शकों का मन मोह लिया। वहीं, हास्य कलाकार सुरेश हलवाई और कामता प्रसाद कांदु ने अपनी अदाकारी से दर्शकों को खूब हंसाया।
पीढ़ियों से कायम है रामलीला की पहचान
फूलपुर की रामलीला ने समय के साथ अपनी अलग पहचान बनाई। धार्मिक प्रसंगों के मंचन, कलाकारों की प्रस्तुति और दशहरा मेले के आकर्षण ने इसे क्षेत्र की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक परंपराओं में शामिल कर दिया। इस आयोजन के माध्यम से नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, सत्य और धर्म की महत्ता को समझने का अवसर मिलता है।
आस्था और विरासत का प्रतीक है फूलपुर का दशहरा
स्वर्गीय कौलेश्वर राम हलवाई द्वारा शुरू की गई पहल आज भी लोगों की स्मृतियों में जीवंत है। यह परंपरा बताती है कि समाज के किसी एक व्यक्ति की छोटी-सी पहल भी आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ी विरासत बन सकती है।
फूलपुर की रामलीला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और सामाजिक एकजुटता की पहचान है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी लोगों के दिलों में भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा और भक्ति की अलख जगा रही है।
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