जय श्रीराम के जयघोष से गूंजा महुली, अहंकार का प्रतीक रावण धू-धू कर जला

विजयादशमी पर श्रीराम ने किया रावण का अंत, अधर्म पर धर्म की विजय का साक्षी बना महुली का रामलीला मैदान; हजारों दर्शकों की मौजूदगी में स्थानीय कलाकारों ने जीवंत किया रामायण का प्रसंग, अतिथियों ने पुरस्कार देकर बढ़ाया कलाकारों का मान

महुली, सोनभद्र(राकेश कुमार कन्नौजिया)_असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और अहंकार पर सदाचार की विजय का संदेश लेकर आई विजयादशमी पर बुधवार को महुली का श्री राजा बरियार शाह खेल मैदान भक्ति, उत्साह और उल्लास से सराबोर हो उठा। यहां चल रही 80वीं रामलीला के तेरहवें दिन सायं चार बजे रावण वध की भव्य लीला का मंचन किया गया।
प्रभु श्रीराम और रावण के बीच हुए भीषण युद्ध को देखने के लिए हजारों की संख्या में दर्शक उमड़ पड़े। जैसे ही श्रीराम का बाण रावण की नाभि में लगा, रावण का विशाल पुतला धू-धू कर जल उठा।
आसमान में उठती आग की लपटों और गूंजते जय श्रीराम के नारों के बीच पूरा रामलीला मैदान धर्म और आस्था के रंग में रंग गया। रामलीला के समापन समारोह में मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी संजीव जौहरी तथा विशिष्ट अतिथि कृष्ण मुरारी सोनी, दुद्धी ब्लॉक प्रमुख रंजना चौधरी और सेवानिवृत्त जिला जज राजन चौधरी रहे।
रामलीला समिति के पदाधिकारियों ने अतिथियों का माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र भेंटकर स्वागत किया। इसके बाद मुख्य अतिथि संजीव जौहरी और विशिष्ट अतिथि कृष्ण मुरारी सोनी ने रामलीला में विभिन्न पात्रों का अभिनय करने वाले कलाकारों को अपनी ओर से पुरस्कार देकर सम्मानित किया।
मंच पर श्रीराम और रावण की सेनाओं के बीच युद्ध का रोमांचक दृश्य प्रस्तुत किया गया। विभीषण के बताए रहस्य के अनुसार प्रभु श्रीराम ने रावण की नाभि पर बाण चलाया और उसका अंत कर दिया।
रावण के पुतले के दहन के साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश जन-जन तक पहुंचा। दर्शकों ने तालियों और जयघोष के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
मुख्य अतिथि संजीव जौहरी ने अपने संबोधन में कहा कि रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संस्कार और आदर्श जीवन मूल्यों की जीवंत पाठशाला है। भगवान श्रीराम का चरित्र हमें मर्यादा, त्याग, सत्य, कर्तव्यनिष्ठा और जनसेवा की प्रेरणा देता है।
वहीं, रावण का अंत संदेश देता है कि ज्ञान, शक्ति और वैभव होने के बावजूद अहंकार तथा अधर्म का मार्ग विनाश की ओर ले जाता है। विजयादशमी हमें अपने भीतर की बुराइयों को समाप्त कर सत्य, सद्भाव और मानवता को अपनाने की सीख देती है।
उन्होंने महुली की रामलीला समिति और स्थानीय कलाकारों की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि कलाकारों ने अपनी मेहनत, लगन और उत्कृष्ट अभिनय से रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया। स्थानीय प्रतिभाओं का यह समर्पण सराहनीय है।
ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ गांव में सामाजिक एकता, भाईचारे और धार्मिक सद्भाव को मजबूत करते हैं। रामलीला की परंपरा को जीवित रखने में समिति के पदाधिकारियों, कलाकारों और सहयोगियों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर रामलीला समिति के अध्यक्ष एवं ग्राम प्रधान अरविंद जायसवाल, उपाध्यक्ष वीरेंद्र कुमार कन्नौजिया, कोषाध्यक्ष अमित कुमार कन्नौजिया, सुशील गुप्ता, धर्मेंद्र गुप्ता, रामलीला मंडली के व्यास दिलीप कुमार कन्नौजिया, निर्देशक विश्वनाथ शर्मा, महंत दयाराम कन्नौजिया, कृष्ण मुरारी कन्नौजिया, अमरेश कुमार कन्नौजिया, विंध्याचल प्रसाद कन्नौजिया, राजनाथ गोस्वामी, मनोज कुमार कन्नौजिया, मुकेश कुमार कन्नौजिया सहित समिति के पदाधिकारी एवं हजारों दर्शक मौजूद रहे।
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