बस्ती में बोरिंग घोटाला: जमीन सूखी, कागजों पर बहा पानी, करोड़ों हजम!

अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती में सरकारी योजना में करोड़ों के गबन का आरोप – विकास के नाम पर लूट कब तक?
🎯 विक्रमजोत में मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना बनी भ्रष्टाचार की भेंट, कागजों पर बोरिंग और जेब में भुगतान
बस्ती। जिले के विक्रमजोत विकासखंड में मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना में जिस तरह का खेल सामने आया है, उसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि गरीब किसान के नाम पर चलने वाली योजनाएं अफसरों और बिचौलियों के लिए एटीएम बन चुकी हैं। आरोप बेहद गंभीर हैं – बिना एक इंच बोरिंग धरती में कराए, कागजों पर बोरिंग दिखाकर करोड़ों का भुगतान करा लिया गया।
यह कोई लिपिकीय भूल नहीं है। यह संगठित लूट है।
जानकारी के मुताबिक योजना के तहत लाभार्थी किसानों के फर्जी आवेदन तैयार कराए गए। फर्जी जॉब कार्ड, फर्जी सत्यापन और फिर बोरिंग हुए बिना ही भुगतान की फाइलें दौड़ा दी गईं। फाइल संख्या 40018526058442 जैसे मामलों में तो फर्जी लाभार्थी का नाम लेकर ही पूरा पैसा हजम करने का आरोप है। सवाल यह है कि बिना स्थलीय सत्यापन के भुगतान कैसे हो गया? किस अधिशासी अभियंता ने, किस सहायक अभियंता ने आंख मूंदकर फाइल पर दस्तखत किए?
यह विक्रमजोत का अकेला मामला नहीं है। यह पूरे सिस्टम की सड़ांध है।
1. किसान ठगा गया: जिसे बोरिंग मिलनी थी, वह आज भी सूखे खेत को देख रहा है।
2. सरकारी खजाना लूटा गया: जो पैसा जल संरक्षण और सिंचाई के लिए था, वह कमीशनखोरों की तिजोरी में गया।
3. जांच का नाटक: हर बार शिकायत होती है, जांच बैठती है, और फिर लीपापोती कर फाइल बंद कर दी जाती है।
अब सबसे तीखा सवाल – इस लूट में कौन-कौन शामिल है? क्या यह काम बिना ब्लॉक से लेकर जिले तक के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव है? क्या भुगतान करने वाले मंडल और कोषागार ने बिना मौके पर गए ही भुगतान कर दिया?
यह मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना पर सीधा हमला है। मुख्यमंत्री किसानों को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं और नीचे बैठे अधिकारी उन्हीं किसानों के हक पर डाका डाल रहे हैं।
हमारी मांग स्पष्ट है:
1. इस पूरे प्रकरण की जांच बस्ती के अधिकारियों से नहीं, बल्कि मंडलायुक्त या शासन स्तर की किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।
2. जब तक जांच पूरी न हो, विक्रमजोत में इस योजना से जुड़े सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए, ताकि वे सबूतों से छेड़छाड़ न कर सकें।
3. हर लाभार्थी के खेत का भौतिक सत्यापन ड्रोन कैमरे और जीपीएस लोकेशन के साथ कराया जाए। कागज नहीं, जमीन बोलेगी।
यदि यह आरोप आधा भी सच है, तो यह भ्रष्टाचार नहीं, किसानों के साथ राष्ट्रद्रोह है। बस्ती प्रशासन को अब यह तय करना होगा कि उसे किसानों के साथ खड़ा होना है या भ्रष्टाचारियों के साथ। पर्दा डालने का समय खत्म हो गया है।
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