गाजीपुर: 13 साल से पढ़ा रहे शिक्षक की बीए डिग्री पर उठे सवाल, निलंबन और वेतन वसूली की तैयारी

शैक्षणिक दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी की शिकायत के बाद जांच तेज, जिला विद्यालय निरीक्षक ने प्रबंध समिति को कार्रवाई के दिए निर्देश
गाजीपुर। जिले के जसवंत राय स्मारक इंटर कॉलेज में सहायक अध्यापक देवी प्रसाद चौबे की शैक्षणिक योग्यता को लेकर मामला सामने आया है। शिक्षक की बीए की डिग्री में कथित गड़बड़ी होने की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शिक्षक पिछले करीब 13 वर्षों से विद्यालय में सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ा रहे थे। अब उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई और पूर्व में दिए गए वेतन की वसूली की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
इस मामले ने विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के दौरान शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन और लंबे समय तक दस्तावेजों की जांच की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सहायक अध्यापक देवी प्रसाद चौबे के शैक्षणिक अभिलेखों में कथित अनियमितता को लेकर जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय और आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू हुई। जांच के दौरान शिक्षक की बीए डिग्री को लेकर सवाल उठने की बात सामने आई है।
हालांकि, डिग्री में कथित गड़बड़ी की प्रकृति क्या है, संबंधित विश्वविद्यालय के सत्यापन में क्या निष्कर्ष निकला है और प्रमाणपत्र को लेकर अंतिम रूप से क्या पुष्टि हुई है, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है। इसलिए मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित अभिलेखों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
कॉपी मूल्यांकन के दौरान विद्यालय छोड़ने का भी मामला
जानकारी के मुताबिक, बीते अप्रैल महीने में मुहम्मदाबाद क्षेत्र के एक विद्यालय में यूपी बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्य चल रहा था। इसी दौरान देवी प्रसाद चौबे के बीच में ही विद्यालय छोड़कर चले जाने की बात सामने आई थी।
बताया जा रहा है कि इस घटनाक्रम के बाद कॉलेज प्रबंधन ने अप्रैल से उनका वेतन रोक दिया था। हालांकि, वेतन रोके जाने के पीछे के सभी आधिकारिक कारणों और विभागीय अभिलेखों का विस्तृत विवरण सामने आना बाकी है।
निलंबन और वेतन वापसी की प्रक्रिया की तैयारी
मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से विद्यालय की प्रबंध समिति को शिक्षक के निलंबन और वेतन वापसी की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए जाने की जानकारी है। इसके बाद अब विद्यालय प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।
कॉलेज के प्रबंधक ओमकार पांडेय के मुताबिक, डिग्री में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया है।
यदि जांच में शैक्षणिक प्रमाणपत्र गलत या अमान्य पाए जाते हैं, तो नियमानुसार नियुक्ति, सेवा संबंधी कार्रवाई और वेतन की वसूली जैसे प्रश्नों पर निर्णय लिया जा सकता है। हालांकि, किसी भी कार्रवाई की अंतिम स्थिति संबंधित विभागीय आदेशों, जांच रिपोर्ट और लागू नियमों पर निर्भर करेगी।
13 वर्षों तक दस्तावेजों का सत्यापन कैसे हुआ?
इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल यह है कि यदि शिक्षक की बीए डिग्री में वास्तव में कोई अनियमितता थी, तो नियुक्ति के समय उसके सत्यापन में यह बात सामने क्यों नहीं आई? क्या नियुक्ति के समय सभी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की विधिवत जांच की गई थी? क्या बाद में किसी स्तर पर दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया? और यदि सत्यापन प्रक्रिया में लापरवाही हुई, तो इसकी जिम्मेदारी किस अधिकारी या संबंधित संस्था की होगी?
इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने और संबंधित अभिलेख सार्वजनिक होने के बाद ही मिल सकेगा। साथ ही यह भी स्पष्ट होना आवश्यक है कि कथित अनियमितता के लिए शिक्षक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी क्या है और सत्यापन प्रक्रिया में किसी अन्य स्तर पर चूक हुई या नहीं।
जांच के आधिकारिक निष्कर्षों का इंतजार
गाजीपुर के इस मामले में अब शिक्षा विभाग और विद्यालय प्रबंधन की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। डिग्री की वैधता की आधिकारिक पुष्टि, जांच रिपोर्ट, निलंबन आदेश और वेतन वसूली के संबंध में लिए गए निर्णय से ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर शिक्षक की बीए डिग्री को लेकर कथित गड़बड़ी का मामला जांच और विभागीय कार्रवाई के दायरे में है। अंतिम निष्कर्ष आने तक आरोपों को प्रमाणित तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज गाजीपुर की नजर इस मामले में होने वाली आगामी विभागीय कार्रवाई और जांच के आधिकारिक निष्कर्षों पर बनी रहेगी।
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