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जीवन के अनुभवों की कहानी है ‘थका बटोही’

25 Oct 2026, 02:18 AM • Vande Bharat Live TV News
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जीवन के अनुभवों की कहानी है ‘थका बटोही’ - दरभंगा, बिहार

पिण्डारूच में साहित्यिक समारोह, न्यायमूर्ति धरणीधर झा ने किया ‘थका बटोही’ का लोकार्पण

रुक्मिणी कांत चौधरी की संस्मरणात्मक कृति का हुआ विमोचन, वक्ताओं ने जीवन के अनुभवों को लिपिबद्ध करने की पहल को सराहा

पिण्डारूच, दरभंगा। जीवन की लंबी राह में संचित अनुभव जब शब्दों का रूप लेते हैं, तो वे केवल लेखक की निजी स्मृतियां नहीं रह जाते, बल्कि समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण धरोहर बन जाते हैं। इसी भावभूमि के बीच शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड अंतर्गत पिण्डारूच गांव में पुस्तक विमोचन समारोह आयोजित हुआ। रतिकान्त सदन परिसर में आयोजित कार्यक्रम में अवकाश प्राप्त न्यायाधीश रुक्मिणी कांत चौधरी की पुस्तक ‘थका बटोही’ का लोकार्पण पटना उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति धरणीधर झा ने किया।

साहित्यिक अभिरुचि रखने वाले विद्वानों, स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों और अन्य अतिथियों की उपस्थिति ने समारोह को विशेष बना दिया। कार्यक्रम में पुस्तक के विषय के साथ-साथ लेखक के जीवन अनुभवों, उनके संस्मरणों और उनसे मिलने वाली प्रेरणा पर भी विचार रखे गए। आयोजन की अध्यक्षता पिण्डारूच के पूर्व सरपंच एवं वयोवृद्ध शिवकांत झा ने की। आकाशवाणी के प्रख्यात व्यक्तित्व मणिकांत झा भी मंच पर उपस्थित रहे।

वैदिक परंपरा के बीच आरंभ हुआ पुस्तक विमोचन समारोह

समारोह की शुरुआत अवकाश प्राप्त सैनिक पंडित मणिनाथ मिश्रा के वेदोच्चारण से हुई। वैदिक मंत्रों के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके बाद फिल्म अभिनेता नवीन चौधरी ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया और समारोह में आए अतिथियों का अभिनंदन किया।

स्वागत संबोधन के उपरांत ‘थका बटोही’ का विधिवत विमोचन किया गया। इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों और उपस्थित विद्वानों ने लेखक की साहित्यिक पहल को महत्व दिया। कार्यक्रम का वातावरण साहित्य, आत्मीयता और पारिवारिक जुड़ाव से परिपूर्ण रहा।

संस्मरणों के माध्यम से सामने आएंगे जीवन के विविध प्रसंग

पुस्तक के लोकार्पण के बाद लेखक रुक्मिणी कांत चौधरी ने अपनी रचना के उद्देश्य और उसकी विषयवस्तु पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ‘थका बटोही’ उनकी जीवन यात्रा के संस्मरणों पर आधारित है। इसमें उनके व्यक्तिगत जीवन के विभिन्न आयामों को स्थान दिया गया है।

लेखक के इस वक्तव्य से स्पष्ट हुआ कि पुस्तक उनके जीवन के अनुभवों को संकलित करने का प्रयास है। इसमें जीवन के अलग-अलग पड़ावों से जुड़े प्रसंगों को पाठकों के सामने रखने की कोशिश की गई है।

संस्मरण किसी व्यक्ति के जीवन को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं। इनके जरिए पाठकों को लेखक की सोच, अनुभव और जीवन से जुड़े प्रसंगों को जानने का अवसर मिलता है। ‘थका बटोही’ भी इसी दृष्टि से लेखक की जीवन यात्रा को शब्दों में प्रस्तुत करने वाली कृति के रूप में सामने आई है।

रुक्मिणी कांत चौधरी ने अपने संबोधन में पुस्तक की विषयवस्तु के बारे में जानकारी देते हुए इसके व्यक्तिगत अनुभवों से जुड़े स्वरूप को रेखांकित किया। उनके वक्तव्य के बाद समारोह में उपस्थित लोगों के बीच पुस्तक को लेकर साहित्यिक संवाद का अवसर बना।

धरणीधर झा ने व्यक्त की आत्मीयता, पिण्डारूच आने की इच्छा हुई पूरी

मुख्य अतिथि अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति धरणीधर झा ने अपने संबोधन में लेखक के साथ अपने आत्मीय संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रुक्मिणी कांत चौधरी उनके लिए ज्येष्ठ भ्राता के समान हैं और उनसे उन्हें हमेशा अपार स्नेह मिलता रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि पिण्डारूच गांव आने की उनकी दिली इच्छा थी। पुस्तक विमोचन के अवसर पर यहां पहुंचना उनके लिए संतोष और प्रसन्नता का विषय रहा।

न्यायमूर्ति धरणीधर झा ने कहा कि विद्वानों की इस भूमि पर आयोजित साहित्यिक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर वे गौरवान्वित अनुभव कर रहे हैं।

उनके वक्तव्य में लेखक के प्रति सम्मान के साथ पारिवारिक आत्मीयता का भाव भी उभरकर सामने आया। पुस्तक विमोचन का अवसर उनके लिए गांव की साहित्यिक-सांस्कृतिक पहचान से जुड़ने का माध्यम भी बना।

शिवकांत झा ने पुस्तक से मिलने वाली प्रेरणा पर जताया विश्वास

समारोह के अध्यक्ष शिवकांत झा ने लेखक के व्यक्तित्व और उनकी जीवन यात्रा की सराहना की। उन्होंने रुक्मिणी कांत चौधरी के अनुभवों को प्रेरणादायक बताते हुए पुस्तक के महत्व पर अपने विचार रखे।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘थका बटोही’ में लिखे गए शब्द पाठकों को प्रेरित करने की क्षमता रखते होंगे। उनके अनुसार, जीवन के अनुभवों को लेखन के माध्यम से दूसरों तक पहुंचाना महत्वपूर्ण कार्य है।

किसी व्यक्ति की जीवन यात्रा में अनेक ऐसे प्रसंग आते हैं, जिनसे दूसरे लोग सीख ले सकते हैं। जब इन अनुभवों को पुस्तक के रूप में संजोया जाता है, तो वे लंबे समय तक पाठकों के लिए उपयोगी बने रह सकते हैं।

शिवकांत झा के वक्तव्य ने पुस्तक को लेकर सकारात्मक अपेक्षाओं को सामने रखा। उन्होंने लेखक की यात्रा को प्रेरणा से जोड़ते हुए संस्मरण लेखन की उपयोगिता पर बल दिया।

विद्वानों के विचारों से समृद्ध हुआ आयोजन

पुस्तक विमोचन समारोह में उपस्थित अन्य विद्वानों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। साहित्य और सामाजिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों की सहभागिता ने कार्यक्रम को व्यापक स्वरूप प्रदान किया।

पिण्डारूच में आयोजित इस समारोह ने स्थानीय स्तर पर साहित्यिक संवाद का अवसर उपलब्ध कराया। पुस्तक के माध्यम से लेखक के अनुभवों को पाठकों तक पहुंचाने के साथ-साथ साहित्य के महत्व पर विचार करने का अवसर भी मिला।

समारोह में स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों के अलावा मीडियाकर्मी भी मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति ने आयोजन को स्थानीय सामाजिक और साहित्यिक गतिविधियों से जोड़ा।

मणिकांत चौधरी ने संभाली संचालन की जिम्मेदारी

कार्यक्रम का मंच संचालन मणिकांत चौधरी ने किया। उन्होंने समारोह के विभिन्न चरणों को क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया। अतिथियों के संबोधन और पुस्तक विमोचन के बाद कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

अंत में ललित चौधरी ने उपस्थित अतिथियों और समारोह में शामिल सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम में सहभागिता के लिए सभी का धन्यवाद किया।

इस आयोजन की आयोजक लेखक रुक्मिणी कांत चौधरी की दौहित्रीद्वय स्वाती एवं स्वेता थीं। वहीं, आयोजन की जिम्मेदारी ज्ञानेश चौधरी ने संभाली। कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों और मीडियाकर्मियों की उपस्थिति रही।

पुस्तक के जरिए पाठकों तक पहुंचेगी लेखक की जीवन गाथा

‘थका बटोही’ के विमोचन ने रुक्मिणी कांत चौधरी के जीवन अनुभवों को पुस्तक के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाने का अवसर दिया। समारोह में वक्ताओं ने लेखक की जीवन यात्रा, उनके व्यक्तिगत अनुभवों और संस्मरण लेखन की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।

पिण्डारूच के रतिकान्त सदन परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम स्थानीय साहित्यिक गतिविधियों के लिए एक उल्लेखनीय अवसर रहा। आयोजन ने यह संदेश दिया कि जीवन के अनुभवों को शब्दों में सुरक्षित रखना व्यक्ति की स्मृतियों को संरक्षित करने के साथ-साथ दूसरों तक विचार पहुंचाने का माध्यम भी बन सकता है।

समारोह का प्रमुख केंद्र पुस्तक का विमोचन रहा, लेकिन वक्ताओं के विचारों ने इसे जीवन अनुभवों और साहित्यिक अभिव्यक्ति पर संवाद का अवसर भी बनाया। ‘थका बटोही’ के माध्यम से लेखक की यात्रा अब पुस्तक के पन्नों में पाठकों के सामने उपलब्ध होगी।

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