प्रसिद्ध स्थल होने के बाद भी माँ शारदा मंदिर एवं परिसर और मैहर क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं से दूर है

मैहर के समाजसेवी रमापति गौतम ने माँ शारदा की महिमा की जानकारी देते हुए बताया कि संस्कृत भाषा में माता शारदा को सरस्वती कहा गया है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में कई बार माँ शारदा का उल्लेख किया है। दुर्गा सप्तशती एवं देवी पुराण में शारदा और सरस्वती एक ही देवी को कहा गया है, ऐसा शास्त्र सम्मत है।
*मैहर का इतिहास माँ शारदा के नाम से विश्व विख्यात है। माई का हार जहाँ गिरा, उसे मैहर के नाम से जाना गया, इसलिए मैहर माँ सरस्वती का हृदय स्थल है। उनके सपूत आल्हा-ऊदल माँ शारदा की आराधना करते थे। आल्हा अखाड़ा और उनकी अमर गाथा आज भी विश्व प्रसिद्ध है।*
*इतना प्रसिद्ध स्थल होने के बाद भी माँ शारदा मंदिर एवं परिसर और मैहर क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं से दूर है*।
श्री गौतम ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में प्रदेश के मुख्यमंत्री, धर्मस्व मंत्री, सांसद, विधायक, शारदा प्रबंधन समिति, मैहर के बुद्धिजीवी, व्यापारियों एवं समस्त जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि –
*मैहर में वेद विद्यालय की स्थापना तत्कालीन सतना कलेक्टर श्रीमान खरे जी के कार्यकाल में 20 वर्ष पहले हुई थी, लेकिन स्थापना के बाद भी उसके विकास पर किसी प्रकार का ध्यान नहीं दिया गया। वेद विद्यालय में मात्र वेद मंत्र की शिक्षा दी जाती है, जबकि वेद विद्यालय को महाविद्यालय के रूप में विकसित होना चाहिए, जहाँ संस्कृत भाषा, आयुर्वेद शास्त्र, वैदिक पद्धति, पूजा पद्धति, कर्मकांड आदि संस्कृत के विषय खोले जाने चाहिए। यह माँ सरस्वती का स्थान होने के कारण संस्कृत भाषा की जितनी शाखाएँ हैं, सभी खोली जानी चाहिए।*
*माँ शारदा के नाम से विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों की स्थापना होनी चाहिए*, जहाँ संस्कृत भाषा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा, इंजीनियरिंग, आई.टी.आई., तकनीकी एवं गैर तकनीकी कोर्स संचालित किए जाने चाहिए। *माँ शारदा प्रबंध समिति का पंजीयन ट्रस्ट एक्ट के तहत कराया जाना चाहिए एवं माँ शारदा प्राधिकरण चित्रकूट की तर्ज पर बनाया जाना चाहिए। मध्य प्रदेश में महाकालेश्वर उज्जैन, पचमढ़ी, ओंकारेश्वर, अमरकंटक, ओरछा, चित्रकूट, ग्वालियर में प्राधिकरण बनाया गया है, मैहर में बहुत समय पहले प्राधिकरण बनाने हेतु प्रस्तावित है, लेकिन मैहर की उपेक्षा क्यों*?
श्री गौतम ने सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक, शैक्षिक, धार्मिक जनों से अपील की है कि मैहर के विकास एवं माँ शारदा धाम को विकसित करने हेतु आगे आएं।
*श्री गौतम ने कहा कि मैहर बड़ा अखाड़ा में संस्कृत मात्र माध्यमा तक पढ़ाई जाती है एवं यह जो संस्कृत विद्यालय है वह अखाड़ा क्षेत्र का है, जिसमें सरकारी कोई प्रयास नहीं किया गया, यह चिंता का विषय है। संस्कृत भाषा का समुचित कोर्स न होने के कारण मैहर में पढ़ने वाले संस्कृत के विद्यार्थी बनारस, मथुरा, वृंदावन, अयोध्या, प्रयागराज, खजुरीताल, सोहावल आदि जाते हैं, जबकि शास्त्री की डिग्री बी.ए. है और आचार्य की डिग्री एम.ए. है। मैहर में ग्रेजुएट एवं पोस्ट ग्रेजुएशन संस्कृत से न होने के कारण बहुत से विद्यार्थी आगे की शिक्षा प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। धार्मिक नगरी होने से संस्कृत भाषा के सभी पाठ्यक्रम खोले जाने चाहिए।*
*इसी प्रकार मैहर में संगीत विद्यालय है, लेकिन निर्धारित समय अवधि पर दिन में नहीं लगाया जाता है। साथ ही संस्कृत विद्यालय में योग शिक्षकों की कमी है एवं आज तक स्थाई प्राचार्य की नियुक्ति नहीं हो सकी है*।
🔔 Vande Bharat News Alerts
नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।





