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महाराष्ट्र सीमा पर जल परियोजना का संकट: 152 मीटर ऊंचाई की अनुमति मिलने पर कई गाँव और चपराला अभयारण्य जलमग्न होने की आशंका

26 Oct 2026, 10:22 PM • Vande Bharat Live TV News
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महाराष्ट्र सीमा पर जल परियोजना का संकट: 152 मीटर ऊंचाई की अनुमति मिलने पर कई गाँव और चपराला अभयारण्य जलमग्न होने की आशंका - गडचिरोली, महाराष्ट्र

समीर वानखेड़े ब्यूरो चीफ:
महाराष्ट्र और तेलंगाना की सीमा से बहने वाली तथा चपराला अभयारण्य (Chaprala Wildlife Sanctuary) से सटी प्राणहिता नदी पर तेलंगाना सरकार 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से ‘सुजला स्रवंती’ सिंचाई परियोजना का निर्माण करने जा रही है। हैदराबाद और तेलंगाना के अन्य हिस्सों में जलापूर्ति करने के उद्देश्य से यह परियोजना प्रस्तावित की गई है।

इस परियोजना के तहत बाँध की ऊँचाई 152 मीटर रखने के लिए महाराष्ट्र सरकार की सहमति अनिवार्य है। इसी सिलसिले में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए.रेवंत रेड्डी और तेलंगाना के सिंचाई मंत्री ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की और औपचारिक सहमति की मांग की।

मेडिगट्टा परियोजना के कड़वे अनुभव
इससे पहले भी जब महाराष्ट्र सरकार ने तेलंगाना की ‘मेडिगट्टा परियोजना’ को सहमति दी थी, तब गढ़चिरौली जिले के सिरोंचा तालुका के किसानों के हितों का ध्यान नहीं रखा गया था।

इसका भारी नुकसान वहाँ के स्थानीय किसानों को उठाना पड़ा था और आज भी वे बाढ़ तथा जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं। चपराला अभयारण्य और 3 तालुके खतरे में
स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि महाराष्ट्र सरकार इस बार 152 मीटर ऊँचाई की अनुमति देती है, तो निम्नलिखित क्षेत्रों पर बड़ा संकट मंडरा सकता है:
* चपराला अभयारण्य: दुर्लभ वन्यजीवों और वनस्पतियों का यह समृद्ध क्षेत्र जलमग्न हो सकता है।

* चामोर्शी और अहेरी तालुका (गढ़चिरौली): नदी किनारे बसे कई गाँव और कृषि भूमि पानी में डूबने का खतरा है। * गोंडपिपरी तालुका (चंद्रपुर जिला): चंद्रपुर जिले के इस तालुका के कई गाँवों में पानी भरने की गंभीर आशंका है।

सरकार से सावधानी बरतने की मांग
महाराष्ट्र के सीमावर्ती गाँवों और पर्यावरण पर आने वाले इस भीषण संकट को ध्यान में रखते हुए ही राज्य सरकार को कोई भी फैसला लेना चाहिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बिना किसी ठोस सुरक्षा उपाय और अध्ययन के अनुमति दी गई, तो इन गाँवों को डूबने से और ग्रामीणों को विस्थापित होने से कोई नहीं बचा पाएगा।

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