अभय कोठारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजा सुझाव,मतदाता सूची में बालिग होते ही नाम जुड़ जाए तथा मृत्यु होते ही कट जाए|

जावरा– मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और प्रमाणिक बनाने के लिए जावरा के अभय कोठारी ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त को सुझाव भेजे हैं। उन्होंने मांग की है कि मतदाता सूची को जन्म-मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था से जोड़ा जाए, ताकि 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में जोड़ने और मृत मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया आसान हो सके।
कोठारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त, भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली को संबोधित सुझाव पत्र सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी, जावरा, जिला रतलाम के माध्यम से भेजा है। इसमें उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को तकनीकी रूप से सरल बनाकर विवादों की आशंका कम की जा सकती है।
जन्म पंजीकरण के आधार पर जुड़े पात्र मतदाताओं के नाम
कोठारी ने सुझाव दिया कि देश में जन्म लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति का जन्म पंजीकरण शासन के पास उपलब्ध रहता है। ऐसे में जन्म रिकॉर्ड को निर्वाचन आयोग की व्यवस्था से जोड़ने पर 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले पात्र नागरिकों की पहचान करना आसान हो सकता है। इससे कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची में नाम जुड़वाने से वंचित नहीं रहे, इस दिशा में प्रभावी व्यवस्था विकसित की जा सकती है।
उन्होंने निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के नियम 13(1) और 26 का उल्लेख करते हुए कहा कि 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नागरिकों के नाम जोड़ने की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि नाम जोड़ने के लिए संबंधित नागरिक की पहल आवश्यक हो सकती है, लेकिन जन्म पंजीकरण का रिकॉर्ड इस प्रक्रिया का आधार बन सकता है।
मृत्यु होने पर नाम हटाने की प्रक्रिया हो आसान
सुझाव में कहा गया है कि किसी मतदाता की मृत्यु होने पर जन्म-मृत्यु पंजीकरण विभाग में उसका रिकॉर्ड दर्ज किया जाता है। यदि यह जानकारी निर्वाचन आयोग तक स्वतः पहुंचने की व्यवस्था हो जाए, तो मृत मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने में आसानी होगी। इससे सूची को अद्यतन रखने में मदद मिलेगी और मृत व्यक्तियों के नाम लंबे समय तक मतदाता सूची में बने रहने की समस्या कम हो सकती है।
कोठारी ने जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 तथा 11 अगस्त 2023 के संशोधन का उल्लेख करते हुए जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को निर्वाचन प्रक्रिया से जोड़ने की आवश्यकता बताई।
बीएलओ के माध्यम से नियमित प्रकाशन का सुझाव
उन्होंने सुझाव दिया कि बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के माध्यम से संबंधित मतदान केंद्र की ऐसी सूचियों का मासिक, त्रैमासिक, अर्धवार्षिक या वार्षिक अंतराल पर प्रकाशन किया जा सकता है। यह व्यवस्था किसी चुनाव की घोषणा या आयोजन पर निर्भर रहने के बजाय लगातार चलने वाली प्रक्रिया का हिस्सा होनी चाहिए, ताकि मतदाता सूची में आवश्यक सुधार समय पर किए जा सकें।
स्थान परिवर्तन के नियम पहले की तरह रहें
कोठारी ने स्पष्ट किया कि मतदाता के स्थान परिवर्तन की स्थिति में निर्वाचन आयोग के मौजूदा नियमों के अनुसार फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की प्रक्रिया प्रभावी रह सकती है। उनके सुझाव का मुख्य उद्देश्य नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने और मृत मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि इन सुझावों पर विचार करने से मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया अधिक प्रमाणिक, सरल और प्रभावी बन सकेगी। इससे पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने तथा मृत मतदाताओं के नाम हटाने में निर्वाचन आयोग को भी सहायता मिलेगी।
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