जिला रिपोर्टर सुरेश चौहान आगर मालवा मध्य प्रदेश *गुमशुदगी के मामलों में लापरवाही नहीं चलेगी! आगर पुलिस को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई के सख्त निर्देश

*गुम इंसान और लापता बच्चों की तलाश में तेजी लाने पर जोर, 50 से 60 पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों ने लिया प्रशिक्षण*
*FIR दर्ज करने से लेकर साक्ष्य संकलन तक की प्रक्रिया समझाई, SOP और चेकलिस्ट के पालन पर विशेष जोर*
आगर-मालवा। गुम इंसान और लापता बच्चों की तलाश में शुरुआती समय की अहमियत को देखते हुए आगर-मालवा पुलिस ने अनुसंधान की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। गुमशुदगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई, सटीक पतासाजी और साक्ष्यों के मजबूत संकलन को लेकर बुधवार को नवीन पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रभारी पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार शुक्ला के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रविन्द्र कुमार बोयट के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण में करीब 50 से 60 अनुसंधानकर्ता अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए।
प्रशिक्षण के दौरान स्पष्ट किया गया कि गुम इंसान अथवा गुम बालक की सूचना मिलने पर पुलिस की कार्रवाई केवल गुमशुदगी दर्ज करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आवश्यक होने पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और पुलिस मुख्यालय की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुरूप काम करने पर विशेष जोर दिया गया।
*गुमशुदगी की सूचना मिलते ही शुरू हो प्रभावी कार्रवाई*
प्रशिक्षण में उप पुलिस अधीक्षक के.एल. पटेल, प्रभारी महिला सुरक्षा तथा उपनिरीक्षक राखी गुर्जर ने पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों को गुम इंसान और गुम बालक संबंधी मामलों की विवेचना के महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। अधिकारियों को बताया गया कि शुरुआती समय में त्वरित कार्रवाई से गुमशुदा व्यक्ति की तलाश को गति मिल सकती है। इसलिए प्रत्येक मामले में उपलब्ध जानकारी का आकलन कर संभावित स्थानों पर तलाश, संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ और अन्य जरूरी कदम समय पर उठाए जाएं।
यदि अपहरण, व्यपहरण, मानव दुर्व्यापार या किसी अन्य अपराध की आशंका सामने आती है, तो परिस्थितियों के अनुसार उचित वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
*SOP और चेकलिस्ट के पालन पर जोर*
पुलिस मुख्यालय द्वारा निर्धारित SOP और चेकलिस्ट के अनुसार विवेचना करने की प्रक्रिया भी समझाई गई। पतासाजी के दौरान मिलने वाली प्रत्येक महत्वपूर्ण जानकारी, पूछताछ, संभावित ठिकानों पर की गई कार्रवाई और तकनीकी साधनों से जुटाए गए तथ्यों का केस डायरी में विधिवत उल्लेख करने के निर्देश दिए गए।
प्रशिक्षण में बताया गया कि विवेचना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित होनी चाहिए, ताकि मामले की जांच पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रभावी रहे।
*मानव दुर्व्यापार और महिला संबंधी अपराधों पर विशेष ध्यान*
मानव दुर्व्यापार की आशंका वाले मामलों की पहचान, रोकथाम और अनुसंधान को लेकर भी मार्गदर्शन दिया गया। ऐसे मामलों में पर्याप्त आधार मिलने पर नियमानुसार संबंधित विशेष इकाई को प्रकरण हस्तांतरित करने की प्रक्रिया समझाई गई। गुमशुदा व्यक्ति या बालक के मिलने पर उसकी पहचान और वैधानिक अभिभावक का सत्यापन कर नियमानुसार सुपुर्दगी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
इसके साथ ही महिला संबंधी अपराधों की विवेचना, उम्र निर्धारण, गंभीर मामलों में प्रभावी पर्यवेक्षण और साक्ष्य संकलन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी गई।
*थाना प्रभारियों की जवाबदेही भी होगी अहम*
प्रशिक्षण के दौरान थाना प्रभारियों और अनुसंधानकर्ताओं को सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के निर्देशों, पुलिस मुख्यालय की SOP और संबंधित परिपत्रों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। पर्यवेक्षण अधिकारियों को मामलों की नियमित समीक्षा कर कार्रवाई की गुणवत्ता, समयबद्धता और वैधानिक प्रक्रिया पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य गुम इंसान और लापता बच्चों के मामलों में पुलिस की संवेदनशीलता, तत्परता और अनुसंधान क्षमता को मजबूत करना है, ताकि पीड़ितों को जल्द राहत मिले और प्रत्येक मामले में कानून के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
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