कार्तिक मास कृष्ण पक्ष एकादशी, रमा एकादशी है

कार्तिक मास कृष्ण पक्ष एकादशी, जो कि दीपावली सै पहले आती है, इसे रमा एकादशी भी कहा जाता है। महाराष्ट्र, दक्षिण भारत, गुजरात, आदि जगहों पर पंचांग महीने को अमावस्या तीथि पर पूरा करतें है, अत: इन जगहों पर रमा एकादशी को अश्विन मास में ही गिना जाता है।
गुजरात क्षेत्र के लोग इसे अंगियारस भी कहतें है। कार्तिक मास कृष्ण पक्ष एकादशी/ रमा एकादशी व्रत पूजन भगवान श्री हरि विष्णु जी के लिए किया जाता है, इस दिन विष्णु जी के साथ साथ देवी मां लक्ष्मी जी की भी पूजा की जाती है।
माना जाता है कि कार्तिक मास भगवान श्री विष्णुजी को अति प्रिय होता है, इसलिए इस महिने का हर व्रत पर्व नियम महत्वपूर्ण हो जातें हैं। एकादशी आदि उपवास करने से मन, इंद्रियां संयमित, शांत होतीं हैं।.कार्तिक मास कृष्ण एकादशी/ रमा एकादशी से एक दिन पूर्व हल्का भोजन करना चाहिए, बहुत लोग सूर्यास्त के बाद भोजन भी नहीं करतें।
रमा एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान आदि दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण, अपने घर के पूजा स्थल की सफाई कर लेनी चाहिए। एक साफ स्वच्छ लकड़ी की चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर, उस पर भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण, तथा माता लक्ष्मी जी मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करना चाहिए।
भगवान के समक्ष आसन पर बैठकर व्रत पूजन का संकल्प लेकर व्रत रखना चाहिए। विष्णु जी ,लक्ष्मी जी के समक्ष घी का दीपक, धूप-बत्ती प्रज्ज्वलित कर लेना चाहिए।.भगवान को पंचामृत- दूध, दही घी, चीनी, मधुरस, से स्नान कराकर, फिर शुद्ध जल से भी स्नान कराया चाहिए, तस्वीर हो तो उस पर शुद्ध जल की कुछ बूंदे छिड़कना चाहिए।
भगवान को स्नान कराने के बाद चंदन, पुष्प, तुलसी दल( तुलसीदल एकादशी के दिन नहीं तोड़ना चाहिए, अत: इसे पहले ही व्यवस्था बनाई लेनी चाहिए),अर्पित करना चाहिए, माता लक्ष्मी जी को लाल पुष्प अर्पित करना चाहिए। भगवान को नैवेद्य में तुलसीदल ,फल, बिना अन्न की बनी हुई मिठाई आदि का भोग अर्पित करना चाहिए।
इस दिन पूजा के दौरान विष्णु सहस्त्रनाम,विष्णु स्तोत्र, आदि का पाठ करना, परिवार के साथ रमा एकादशी व्रत कथा पाठ करना ,सुनना चाहिए। इस दिन सायंकाल में घर के मुख्य द्वार पर दीपक प्रज्वलित करना चाहिए, और तुलसी के पौधे के पास भी दीपक प्रज्वलित करना चाहिए।
इस दिन में शयन नहीं करना चाहिए। एकादशी व्रत करने वाले व्रती को दूसरे दिन द्वादशी तिथि पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी जी की पूजा आरती कर नैवेद्य अर्पित करके शुभ समय पर व्रत का पारण करके व्रत खोलना चाहिए।
रमा एकादशी प्रमुख पूजन सामग्री = विष्णुजी या श्रीकृष्ण जी मूर्ति या तस्वीर, माता लक्ष्मी जी तस्वीर, लकड़ी की साफ चौकी, साफ लाल या पीला रंग का कपड़ा, घी का दीपक, रूई की बत्तियां, धूप बत्ती, पंचामृत, तुलसीदल, पुष्प, लाल पुष्प, चंदन, स्वच्छ जल भरा कलश या लोटा, फल, मिठाई, शाम के लिए छोटे दीपक, पूजा की पुस्तक आदि।। एकादशी व्रत पूजन के दिन अन्न, गेहूं,चावल, दाल, आदि नही खाना चाहिए, इस दिन तेल मसाले, प्याज, लहसुन, तामसिक भोजन भी नहीं करना चाहिए।
इस दिन पूरा दिन ईश्वर की प्रार्थना, जप ,चिंतन मनन में गुजारना उचित रहता है। इस बार कार्तिक मास कृष्ण पक्ष एकादशी/ रमा एकादशी गुरूवार 05 नवंबर 2026 को व्रत रखा जायेगा।
हिंदू पंचांग अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष एकादशी/ रमा एकादशी तिथी 04 नवंबर बुधवार सुबह 11:03 बजे प्रारंभ होगी, और इस तिथि का समापन 05 नवंबर गुरुवार सुबह 10:35 बजे होगा ।हिंदू धर्म मान्यतानुसार किसी भी व्रत उपवास को उदया तिथि के आधार पर किया जाता है, इस अनुसार रमा एकादशी व्रत पूजन, उपवास 05 नवंबर गुरुवार 2026 को रखा जायेगा। रमा एकादशी व्रत उपवास पारण = 06 नवंबर शुक्रवार 2026, सुबह 06:37बजे से लेकर सुबह 07:48 बजे तक शुभ समय रहेगा।
एकादशी तिथी ,पारण तिथि, अलग अलग शहरों में सूर्योदय, और स्थानीय पंचांग अनुसार समय में भेद हो सकता है, अत: श्रद्धालु भक्तजन व्रत करने वाले व्रती अपने क्षेत्र के विद्वान ब्राह्मण, या अपने क्षेत्र के पंचांग को देखकर जानकारी प्राप्त कर लें। रमा देवी लक्ष्मी जी का ही एक नाम है, और कार्तिक मास कृष्ण पक्ष एकादशी उन्ही की एकादशी है।
इस दिन विष्णुजी एवं माता लक्ष्मी जी की की पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है। एकादशी मंत्र = ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय।
नारायणाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु: प्रचोदयात्। ।
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ,प्रणत क्लेश नाशाय गोविंदाय नमो नम:।। ऊँ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वतराये: अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय, त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुरूप श्री धन्वंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नम: ।।
।।। इतिश्री।।
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